पौधे लगाइये

01-09-2025

पौधे लगाइये

प्रो. (डॉ.) सौरभ दीक्षित  (अंक: 283, सितम्बर प्रथम, 2025 में प्रकाशित)


बारिश भी हो रही है, मौसम भी ख़ुशनुमा है। 
धरती उमग रही है, नज़दीक आसमां है। 
 
चलिए किसी जगह, और यदि बसाइये, 
शीतल पवन को छेड़कर, मुस्कुराइए। 
 
बस आप ही नहीं हैं, सारा जहाँ यहाँ है। 
महसूस कीजिये, अपना बनाइये, 
 
हैं धड़कनें ज़रूरी, इनको बचाइए। 
सरकार आपकी है, पौधे लगाइये। 
 
फल, फूल, छाँव, धूप, सब कुछ यह मिलेगा। 
देर हो चुकी है, जग जाइये। 

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