मन आशा के दीप . . .

15-10-2025

मन आशा के दीप . . .

इंजी. अरुण कुमार जैन (अंक: 286, अक्टूबर द्वितीय, 2025 में प्रकाशित)


(ज्योति पर्व दीपावली पर)
 
आओ मन का तिमिर हटाएँ, 
नेह, प्रेम के दीप जलाएँ। 
अधरों पर लाकर मुस्कानें, 
सबके मन की पीर मिटाएँ। 
आओ मन का . . .
 
नहीं जहाँ पर ज्योति किरण हैं, 
अवसादों के मेघ सघन हैं, 
पल पल जीवन त्रासद, शापित, 
मन आशा के दीप जलाएँ। 
आओ मन का . . .
 
अहं, दर्प से भरे हुए हैं, 
स्वयं को ईश्वर समझ लिए हैं
प्रतिपल करते महा प्रलय जो
जीवन का सच उन्हें बतायें। 
आओ मन का . . . 
 
राम, वीर प्रभु, दयानन्द जी, 
स्मृतियाँ मन पावन करतीं, 
उनके पदचिन्हों पर चलकर, 
इसी धरा को स्वर्ग बनायें। 
आओ मन का . . . 

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