ख़ुद से जंग

01-01-2026

ख़ुद से जंग

सुजल शर्मा (अंक: 291, जनवरी प्रथम, 2026 में प्रकाशित)

 

चल पड़ा हूँ मुश्किल राहों पर, 
अँधेरे से ढकी इन राहों पर, 
पर दिल में उजाले की तलाश है। 
हथियार सारे टूट चुके हैं मेरे, 
पर अब भी ख़ुद पर विश्वास है। 
 
इस युद्ध में, 
ना कोई राजा है, ना कोई प्रजा है, 
ना कोई मंत्री है, ना कोई शासन है, 
बस मैं हूँ—एक अकेला सिपाही, 
टूटी तलवार लिए, ज़िद पर अड़ा हूँ, 
और हौसले के साथ इस रणभूमि में खड़ा हूँ। 
 
थक गया हूँ, 
कमज़ोर भी पड़ गया हूँ, 
पर फिर भी युद्ध कर रहा हूँ, 
न जाने क्यों, मैं ख़ुद से ही डर रहा हूँ। 
 
गिरकर भी फिर से उठकर चल रहा हूँ, 
ज़ख़्मों और हार को चुनौतियों में बदल रहा हूँ। 
न कोई पराया, 
न कोई संग है, 
यह तो बस मेरी ख़ुद से चल रही एक जंग है। 

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