काल का साक्षी
नवल रौथान
चाहे वो इतिहास हो, या हो जीवन का सार कोई,
एकांत में उठी क़लम हो, या रण में गिरी तलवार कोई।
सृजन भी मैंने देखा है, विध्वंस भी मैंने जाना है,
तन तो कुछ नया सा है, मन शायद सदियों पुराना है।
चाहे वो विज्ञान हो, या गीतों का सार कोई,
दर्शन की गहराई हो, या मन का व्यापार कोई।
मैंने सब कुछ सीखा है, मैंने सब कुछ जाना है,
तन तो कुछ नया सा है, मन शायद सदियों पुराना है।
मैंने देखे राजमुकुट, डूबे हुए अवसादों में,
मैंने देखी राख उड़ती, जलते हुए प्रासादों में।
विजयी के जयघोष सुने, और हारे का चीत्कार सुना,
सिंहासन पर काल का, मैंने ही प्रहार सुना।
यह युग तो बस एक पन्ना है, पूरी पुस्तक का आना है,
तन तो कुछ नया सा है, मन शायद सदियों पुराना है।
वस्त्र बदल कर हर फेरी, मैं रंगमंच पर आता हूँ,
अपना ही किरदार पुराना, फिर-फिर कर दोहराता हूँ।
लोग जिसे कहते शैशव, वो थकी हुई इक निद्रा है,
मेरी तो पहचान, समय के मस्तक पर एक मुद्रा है।
जग समझता पथिक मुझे, जग तो मेरा ठिकाना है,
तन तो कुछ नया सा है, मन शायद सदियों पुराना है।
साज़ों की थरराहट में, मैंने ‘पीड़ा’ को गाया है,
रंगों के छींटों में मैंने, ‘शून्य’ को दिखलाया है।
मन के गहरे तलघर की, सब चाभी मेरे पास रही,
क्यों हँसता है पागल कोई, क्यों आँख किसी की उदास रही।
चेहरों को पढ़ना खेल मेरा, हर मस्तक एक फ़साना है,
तन तो कुछ नया सा है, मन शायद सदियों पुराना है।
कितनी बार इन आँखों ने, अपना ही सावन देखा है,
हाथों की इन लकीरों में, मिटता हुआ जीवन देखा है।
वही पुरानी रीत प्रेम की, वही मिलन, वही जुदाई है,
ऐसा लगता यह सारी पीड़ा, मैंने पहले भी पायी है।
यह धड़कन तो एक धोखा है, यह साँस तो बस बहाना है,
तन तो कुछ नया सा है, मन शायद सदियों पुराना है।
हर ग्रन्थ पढ़ा, हर वेद सुना, हर ज्ञान कण्ठस्थ कर बैठा,
संसार को समझते-समझते, मैं ख़ुद को मस्त कर बैठा।
यह ज्ञान नहीं, यह पीड़ा है, जो साँस-साँस में घुलती है,
जितनी गुत्थी सुलझाता हूँ, उतनी ही और उलझती है।
अब 'अज्ञानी' होने को ही, मेरा ये मन दीवाना है,
तन तो कुछ नया सा है, मन शायद सदियों पुराना है।
सब जान लिया, सब देख लिया, अब और न कोई चाह बची,
इस भीड़-भाड़ वाली दुनिया में, अब न कोई राह बची।
यह ज्ञान नहीं, यह बोझ है मेरा, जो कंधों पर ढोता हूँ,
मैं अपनी ही विद्वता के, नीचे दबकर रोता हूँ।
बच्चा बनकर जी लेने का, अब कोई ढूँढ़ता बहाना है,
तन तो कुछ नया सा है, मन शायद सदियों पुराना है।