बीबियों का ख़ौफ़
कार्तिकेय गर्ग
जो मायके जाने से तुम मुझको रोके सैयाँ॥
तो मैं आँखें नोंच लूँगी।
जो काम कोई मुझसे करवाए सैयाँ॥
तो मैं उँगली तोड़ दूँगी।
मायके में चाहे साजन गोबर ही उठाऊँगी,
ससुरार में साजन एक ग्लास पानी भी न दूँगी।
अगर रोक टोक तुम करे जो राजा,
क़सम से आँखें फोड़ दूँगी।
करूँगी मैं अपने मन का तेरी बात न मैं मानूँगी,
मन की मैं रानी हूँ किसी भी हद तक मैं जाऊँगी।
इतने में तुम जो न माने सैयाँ॥
क़सम से मार के ड्रम में डाल दूँगी।
जो काम कोई मुझसे करवाए सैयाँ॥
तो मैं उँगली तोड़ दूँगी।