पुस्तक विमोचन कार्यक्रम : अगले जनम मोहे कुत्ता कीजो व्यंग्य संग्रह

29 Mar, 2019
पुस्तक विमोचन कार्यक्रम : अगले जनम मोहे कुत्ता कीजो व्यंग्य संग्रह

पुस्तक विमोचन कार्यक्रम : अगले जनम मोहे कुत्ता कीजो व्यंग्य संग्रह


 दिनांक 20 मार्च 2019: स्वामी विवेकानंद लाइब्रेरी भोपाल - 


श्री सुदर्शन कुमार सोनी की पुस्तक ’अगले जनम मोहे कुत्ता कीजो’ का विमोचन दिनांक 20 मार्च 2019 को स्वामी विवेकानंद लाइब्रेरी भोपाल में लब्ध प्रतिष्ठित व्यंग्यकार ’पदमश्री’ डॉक्टर ज्ञान चतुर्वेदी के मुख्य आतिथ्य में आयोजित एक कार्यक्रम में किया गया। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में श्री मकरंद देऊस्कर आईजी इंटेलीजेंस तथा वरिष्ठ व्यंग्यकार श्री शांतिलाल जैन उपस्थित थे। 

व्यंग्य पुरोधा डॉक्टर ज्ञान चर्तुवेदी जी ने इस अवसर पर कहा कि सुदर्शन की वर्तमान पुस्तक व्यंग्य में एक नया प्रयोग कह सकते हैं। पूरे चौंतीस व्यंग्य कुत्तों पर हैं। व्यंग्य अपने आप में मज़ेदार हैं। इस संग्रह में उनका भोगा हुआ यथार्थ भी दिखता है। कुत्तों पर आप असीमित लिख सकते हो। किसी ने कहा कि ये देश का पहला ऐसा संग्रह है। एक कुत्ता अपने मालिक से निस्वार्थ प्रेम प्यार करता है। नया विषय तो है इसके कई व्यंग्य में तो वे गहराई पर गये हैं लेकिन कई अन्य में विकसित होने की और संभावनायें हैं। मेरी ज़्यादा सहानुभूति गली-कूचे के कुत्तों से है। उनका कोई ठिकाना नहीं है कि सुबह रोटी मिली तो शाम को कुछ मिलेगा कि नहीं? कहाँ कब कौन लतिया दे पत्थर मार दे! मेरे प्रत्येक उपन्यास में कुत्ते की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है जबकि मैंने स्वयं कभी कुत्तापालन नहीं किया।


श्री मकरंद देऊस्कर आईजी (इंटेलीजेंस) ने कहा कि सुदर्शन सोनी की किताबों की ताज़ी प्रति मुझे मिल जाती है। आज का जो व्यंग्य संग्रह है यह लाजबाब है पूरा कुत्तामय होकर लिखा है उन्होंने। मैंने भी कुत्तापालन किया है लेकिन मात्र एक रात के लिये और उसी में मैंने कुत्ते के पूरे रूप जो इस पुस्तक के अलग-अलग व्यंग्यों  में अलग-अलग तरह से वर्णिंत हैं, देख लिये। 

भोजपाल साहित्य संस्थान के अध्यक्ष प्रियदर्शी खैरा ने कहा कि सुदर्शन का रचनाकर्म मैं लगातार कई सालों से देख रहा हूँ। ख़ास बात तो यह है कि वे शासकीय सेवा के विभिन्न दायित्वों को पूर्ण कुशलता से निभाते हुये भी लगातार सृजनशीलता बनाये रखे हुये हैं। ख़ुशी की बात है कि भोजपाल साहित्य संस्थान के कार्यकारी अध्यक्ष का एक और संकलन आया है। श्री खैरा ने कहा कि केवल कुत्तों पर ही केन्द्रित व्यंग्य संग्रह पूरे देश क्या पूरे ब्रह्मांड में पहले कभी नहीं आया है! इनका यह तीसरा व्यंग्य संग्रह है उन्होंने इस संग्रह के माध्यम से कुछ नये शब्दों को भी गढ़ डाला है। कुत्तों की दिनचर्या, उनकी आदतों, अच्छाइयों, बुराइयों का इन्होंने माइक्रोस्कोपिक विश्लेषण अपने व्यंग्यों में किया है। उन्होंने लेखक की धर्मपत्नी डॉक्टर सीमा सोनी व सुपुत्री सुभुति का भी व्यंग्य पाठ हेतु आभार माना।

सुदर्शन सोनी ने कहा कि इंसान को कुत्तों के प्रति अपने नज़रिये को बदलने की ज़रूरत है; वह वैसा नहीं है जैसा कि अधिकांश लोग समझते हैं। संग्रह के व्यंग्य पिछले दस सालों में लिखे गये हैं। उन्होंने इस संग्रह को अपने प्रिय कुत्ते राॅकी जिसका दो साल पहले आकस्मिक अवसान बीमारी से हो गया था को श्रंद्वाजलि देने का एक तरीक़ा बताया। लेखक ने पुस्तक के कार्टून रचियता श्री हरिओेम तिवारी का विशेष आभार माना। जिन्होंने अत्यंत कम समय में पुस्तक के लिये बेहतरीन कार्टून बना उसे और आकर्षक बनाया। भोजपाल साहित्य संस्थान व धर्मपत्नी डॉक्टर सीमा पुत्र अभ्युदय व पुत्री सुभुति का भी विशेष आभार माना। लेखक ने पुस्तक से ही एक व्यंग्य ’जेनरेशन गैप इन कुत्तापालन’ का वाचन किया। सुभुति सोनी ने ’अगले  जनम मोहे कुत्ता कीजो’ रचना का वाचन किया जिसे उपस्थित साहित्य प्रेमियों द्वारा सराहा गया। स्वामी विवेकानंद लायब्रेरी के प्रबंधक रनवीर सिंह सहायक प्रबंधक श्री यतीश भटेले का भी आभार लेखक ने किया। 

वरिष्ठ व्यंग्यकार श्री शांतिलाल जैन ने पुस्तक के व्यंग्यों पर एक आलोचनात्मक वक्तव्य दिया। उन्होने कहा कि आज जब शब्दों की हत्या का समय चल रहा है तब लेखक ने इस संग्रह में कुछ नये शब्दों जैसे ’जेबकुतरा’ को गढ़ा है। कुत्तों के प्रतीक के माध्यम से उन्होने सर्वहारा वर्ग की तकलीफ़ों को सामने लाने का कार्य किया है। उन्होंने कुत्तों को न जाने कितने कोणों से परखा है। जब विषय एक हो तो ज़्यादा लिखने की गुंजाइश नहीं रहती लेकिन सुदर्शन सोनी जी ने यह साहस किया है। सारे व्यंग्यों के केन्द्र पर कुत्ता ही है। हाँ, ऐसा संग्रह हिंदी व्यंग्य में पहले कभी नहीं आया है। वे एक सजग व्यंग्यकार हैं।

कार्यक्रम का सफल व प्रभावी संचालन साहित्यकार श्री चन्द्रभान राही ने किया। कार्टूनिस्ट श्री हरिओम तिवारी द्वारा पुस्तक के व्यंग्यों को बहुचर्चित जर्जर भोपाली के किरदार के माध्यम से कॉमेडी के रूप में प्रस्तुत करके उपस्थित साहित्यकारों व साहित्य पे्रमियों की वाहवाही लूटी। 

आभार प्रदर्शन भोजपाल साहित्य संस्थान के सक्रिय पदाधिकारी श्री जगदीश किंजल्क ने किया। उन्होंने कुत्तों के संबंध मे हरिशंकर जी परसाई के एक प्रसंग का भी उल्लेख किया कि कैसे परसाई जी जो कभी आकाशवाड़ी जबलपुर नहीं आये थे वे कुत्तों के शोर के कारण रिकार्डिंग हेतु आकाशवाणी आये। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में साहित्यकार साहित्य प्रेमी व अधिकारीगण उपस्थित थे। 

प्रियदर्शी खैरा 
अध्यक्ष भोजपाल साहित्य संस्थान 
90-91 यशोदा विहार चूना भट्टी भोपाल 

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