चीरहरण

जैनन प्रसाद

हँस रहे हैं आज
कई दुःशासन।
द्रोपदी को निवस्त्र देख।
और झुकी हुई हैं
गर्दन वीरों के।
सोच रहे हैं!
इस आधुनिक जुग में
कैसे वार करें
तीरों के।
चीख़ती हुई उस
अबला की पुकार का दर्द
सभी को खल रहा है।
आज कृष्ण की जगह
लोगों में
दुर्योधन पल रहा है।

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