डॉ. चन्द्रशेखर तिवारी
सोनभद्र (उ.प्र.)
जन्म-तिथि: 24 फरवरी (प्रमाणपत्रों में 02 जुलाई)।
जन्म-स्थान: सराय मुबारक, अबिसहन, गाजीपुर (उ.प्र.)।
शिक्षा: बी.ए. (हिन्दी, मध्यकालीन इतिहास, राजनीति विज्ञान), बी.ए. एकल विषय—संस्कृत), एम.ए. (हिन्दी, संस्कृत, अंग्रेज़ी), सी.आई.जी., बी. एड्., नेट (यूजीसी), पी.एच् डी., डी.लिट्. (मानद)।
प्रकाशन-कार्य: राष्ट्रीय-अन्तरराष्ट्रीय स्तर की पत्र-पत्रिकाओं में हिन्दी साहित्य की विभिन्न विधाओं से जुड़ी तीन सौ से अधिक रचनाएँ प्रकाशित। शताधिक पुस्तकों की समीक्षा। चार दर्जन सन्दर्भ-ग्रन्थों एवं साहित्यिक पुस्तकों में भूमिका-लेखन। अस्सी से अधिक शोधपत्र। दो दर्जन के आसपास रचनाएँ भोजपुरी में भी।
पुस्तकें: सृजन के विविध आयाम, विवेकी राय की ग्राम्यदृष्टि, बादल! तुम मत चाँद छिपाओ, मीरा-पदावली, विवेकी राय के उपन्यासों में ग्राम-जीवन, दलित विमर्श और 'बबूल', अक्षरपुरुष प्रणम्य, विवेकी राय की साहित्य-साधना, हिन्दी साहित्य की किसान कलम, आदिकालीन-भक्तिकालीन काव्य, वस्तुनिष्ठ हिन्दी साहित्य भाग-1 (आदिकाल, भक्तिकाल, रीतिकाल), वस्तुनिष्ठ हिन्दी साहित्य भाग-2 (आधुनिक काल, काव्यशास्त्र), डॉ. विवेकी राय जीवनवृत और उपलब्धियाँ।
पत्र-पत्रिकाएँ (सम्पादन/सम्पादन-सहयोग): बोहल शोध मंजूषा, साहित्यायन, हरिप्रभा, सेवा, ज्योति-स्तम्भ, शैक्षणिक विकास मंच।
प्रकाश्य: तीन आलोचना ग्रन्थ, एक जीवनी, एक उपन्यास, एक कहानी-संग्रह, एक संस्मरण-ग्रन्थ, एक लघु कथा संग्रह (लोकभाषा भोजपुरी में)।
सेमिनार-वेबिनार: राष्ट्रीय एवं अन्तरराष्ट्रीय स्तर की सत्तर से अधिक संगोष्ठियों तथा वेबिनारों में व्याख्यान एवं शोधपत्र प्रस्तुत ।
अध्यापन: अनेक प्रतिष्ठित महाविद्यालयों में अक्टूबर 2003 से जून 2019 तक हिन्दी प्रवक्ता। 03 अगस्त 2016 से 29 जून 2019 तक विभागाध्यक्ष।
सम्प्रति: हिन्दी-शिक्षक, ए.बी.आई.सी. रेणुसागर, सोनभद्र (उ.प्र.)।
पुरस्कार-सम्मान: भारत गौरव सम्मान, श्रेष्ठ शिक्षक और लेखक सम्मान, डॉ. प्रभुनाथ सिंह सम्मान, गुगनराम सिहाग साहित्य गौरव सम्मान, ज्ञान रत्न उपाधि, स्व. बालमुकुन्द सिंह स्मृति सम्मान सहित विभिन्न सामाजिक एवं सांस्कृतिक संस्थाओं द्वारा समय-समय पर कई छोटे-बड़े सम्मान पुरस्कार तथा मानपत्र प्राप्त।
अभिरुचि: शैक्षणिक गतिविधियों एवं संगोष्ठियों में सक्रिय सहभागिता। एक अनुसंधित्सु के रूप में सदैव कुछ सीखने-जानने, पढ़ने-सुनने और समझने की ललक।