
अमिताभ विक्रम द्विवेदी
प्रकाशन:
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एक काव्य-संग्रह “चिनार का सूखा पत्ता” (2015)
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"ए ग्रामर ऑफ़ हाड़ौती" (2012)
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"ए ग्रैमर ऑफ़ भदरवाही" (2013) लिंकोम यूरोपा, मुनिक जर्मनी से प्रकाशित
हिन्दी और अंग्रेज़ी में लिखी सौ से अधिक कविताओं को विश्वभर में अलग-अलग पत्र-पत्रिकाओं, संकलनों और जरनल्स में स्थान मिला है। अभी हाल में आपकी कविता "मदर" को पलग्रेव पब्लिकेशन्स से प्रकाशित "मदरहुड एण्ड वार: इंटरनेशनल पर्सपेकटिव्स" में प्रस्तावना के रूप में शामिल किया गया।
संप्रति: सहायक प्रोफेसर (भाषा और साहित्य विभाग), श्री माता वैष्णो देवी विश्वविद्यालय