बद्री सिंह भाटिया

बद्री सिंह भाटिया

बद्री सिंह भाटिया

जन्म : ४ जुलाई, १९४७ को सोलन जिले की अर्की तहसील के गांव ग्याणा में।

शिक्षा : स्नात्कोत्तर (हिन्दी) तथा लोक सम्पर्क एवं विज्ञापन कला में डिप्लोमा।

संप्रति : अब सरकारी सेवा से निवृति के बाद लेखन के इलावा पैतृक गाँव ग्याण में खेती-बाड़ी में संलग्न।

लेखकीय विकास :

कहानी संग्रह:

  • ठिठके हुए पल,

  • मुश्तरका जमीन,

  • छोटा पड़ता आसमान,

  • बावड़ी तथा अन्य कहानिय़ाँ,

  • यातना शिविर,

  • कवच

उपन्यास:

  • पड़ाव

कविता संग्रह

  • कंटीली तारों का घेरा

कहानी संग्रह, सहयोगी सम्पादन

  • सूत्रगाथा और धन्धा

इसके इलावा अनेक सम्पादित संग्रहों में कहानियाँ संकलित तथा देश की विभिन्न पत्रिकाओं में प्रकाशित। कुछ कहानियाँ अनूदित भी। 
विकासात्मक लेखन।

सम्पादन : पहली सरकारी नौकरी के समय में मेडिकल कालेज शिमला की कर्मचारी यूनियन की पत्रिका तरु-प्रछाया का सम्पादन, कालान्तर में सूचना एवं जन सम्पर्क विभाग में नौकरी के साथ साप्ताहिक पत्र गिरिराज और मासिक पत्रिका हिमप्रस्थ में सम्पादन सहयोग।

सम्मान :

  • साहित्यिक यात्रा में पड़ाव उपन्यास पर हि. प्र. कला, संस्कृति एवं भाषा अकादमी द्वारा १९८७ में,

  • ’कवच‘ कहानी संग्रह पर २००४ में

  • हिम साहित्य परिषद मण्डी द्वारा लेखन पर २००१ का साहित्य सम्मान

  • हिमोत्कर्ष साहित्य एंव संस्कृति परिषद ऊना द्वारा वर्ष २००६ का साहित्य श्री सम्मान प्राप्त।

अन्य : अर्की-धामी ग्राम सुधार समिति और ग्याणा मण्डल विकास संस्था के अध्यक्ष पद पर रहते हुए समाज सेवा तथा विभिन्न कर्मचारी यूनियनो, एसोसियशनों में अनेक गरिमामय पदों पर सक्रिय भागीदारी।
अर्पणा (साहित्यिक एवं वैचारिक मंच) के अध्यक्ष पद पर भी कार्य ।