स्त्री चाहती है
प्रेम
पनपने के लिए

सम्मान
खिलने के लिए

महत्व
महकने के लिए

इन तिरंगी पंखों के लगते ही
उड़ने लगती है वो
संतुष्टि के आकाश में

किन्तु अपना
सर्वत्र त्याग कर भी
मात्र इतना पाने में ही
उसका सम्पूर्ण जीवन
खर्च हो जाता है!!

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