मुहब्बत

01-08-2020

मुहब्बत

सरफ़राज़

ख़ामोशियों की गूँज से सहमे
लफ़्ज़ों की आवाज़ है मुहब्बत
दर्द के सीने में सुलगते
शोलों की सेज है मुहब्बत


बेरहम जिस्म से हरदम जूझती 
रुह की फ़रियाद है मुहब्बत
हालात के वार से लहुलुहान
ख़्वाहिशों की परवाज़ है मुहब्बत


शब के अँधेरों में रौशन
तन्हा माहताब है मुहब्बत
ज़मीं से फ़लक तक आबाद
कायनात का राज़ है मुहब्बत


साँसों की तकरार से परेशां
ख़ुशियों की हयात है मुहब्बत
सुकूं से लबालब सारे पाक
अहसासों में सरफ़राज़ है मुहब्बत

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