07-03-2009

मेरा रोशनी से कोई नाता नहीं

अवनीश कुमार गुप्ता

मेरा रोशनी से कोई नाता नहीं 
मैं इसलिए चिराग़ ज़लाता नहीं


बर्फ़ का खंज़र लगा है सीने में
दिल को आँच कोई दिखाता नहीं


बाँटकर आये खुशी हर घर जाकर 
ग़म बँटाने को मेरे घर कोई आता नहीं


ये मेरी मासूमियत है या अहम की
मैं दोष किसी पर लगाता नहीं


हमें अपनी अदाकारी पर नाज़ है
चेहरा देखकर हाल कोई पहचानता नहीं

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