कितना

इन्दु जैन

(कुछ न कुछ टकराएगा ज़रूर)
प्रेषक : रेखा सेठी

 

कितना वक़्त लेगी वह
ग़लती जानने में


फिर कितना मानने में?

 

और और कितना
अपने हाथ से अपना ही दूसरा थामने में?

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