बुद्धिजीवी पत्रकार 

01-01-2021

मैं आज का पत्रकार हूँ
बुद्धिजीवी पत्रकार 
कवि से ऊपर का रचनाकार 
 
चित्रकार हूँ 
रवि से पहले पहुँच जाता हूँ 
मैं एक कलाकार हूँ 
 
घटना घटते ही मैं चित्र बना देता हूँ 
बेच देता हूँ 
मैं ही रचता घटनाक्रम 
निर्धारित करता
पत्रकारिता का पालकर्ता 
निर्दोष को दोषी करार देता हूँ 
 
मैं ही वकील न्यायाधीश भी मैं
मैं ही चुनता, मैं  ही बुनता 
किसे उठाना किसे गिराना
टाँग खींचना सर पे चढ़ाना
इन सब से नाता पुराना
 
वक़्त अनुसार मैं ढल जाता
कभी-कभी मछुआरा बन जाता 
क़लम को अपना जाल बनाता
 
किसे छिपाना किसे बताना
कौन ख़बर आगे ले आना
ग्राहक जाने मोल चुकाना
 
ख़बर बेचता चित्र बेचता
दाम मिले चरित्र बेचता
बेच-बेच कर महल बनाया
नेताओं संग विश्व-भ्रमण कर आया
 
मैं आज का पत्रकार हूँ
बुद्धिजीवी पत्रकार 
कवि से ऊपर का रचनाकार

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