ख़ुशहाली ले बरखा आई।
जहाँ-तहाँ हरियाली छाई॥

 

अजी लबा-लब ताल-तलैया।
डुबकी खूब लगायें भैया॥

 

मेंढ़क मामा टर्र-टर्र करके।
नाच रहे हैं ता-ता थैय्या॥

 

जब से बरखा रानी आई।
मस्त पवन है पुरवैया॥

0 Comments

Leave a Comment