आह्वान

गौरव सिंह

निष्पक्ष लिखो, कुछ क्रांतिपूर्ण,
कुछ ममतामयी, कुछ कालजयी,
कुछ लिखो भयंकर कालकूट,
फिर से जनता का राज लिखो।
 
तुम प्रेम लिखो शृंगार लिखो,
या लिखो विरह की निज गाथा,
कर जीवन के सारे दृश्य अलंकृत,
'गर मिले समय क्षण भर का,
तो वंचित की बात लिखो,
फिर खेतों की ओर मुड़ो,
फिर से किसान की बात लिखो,
कुछ क्रांति पूर्ण,कुछ ममतामयी,
निष्पक्ष लिखो कुछ कालजयी।
 
'गर पकड़ी है क़लम हाथ में,
तुम समाज की बात लिखो,
दें आवाज यूँ दग्ध हृदय को,
कि हाकिम की जड़ें हिलें,
जब-जब हो क़त्ल तंत्र का,
नई सत्ता की नींव लिखो।
कुछ क्रांति पूर्ण,कुछ ममतामयी,
निष्पक्ष लिखो कुछ कालजयी॥

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