अवनीश सिंह चौहान को 'बाबूसिंह स्मृति साहित्यरत्न सम्मान'

27 Nov, 2019
अवनीश सिंह चौहान को 'बाबूसिंह स्मृति साहित्यरत्न सम्मान'

अवनीश सिंह चौहान को 'बाबूसिंह स्मृति साहित्यरत्न सम्मान'

मथुरा : रविवार, 24 नवम्बर 2019 को आलोक पब्लिक स्कूल, पंचवटी कॉलोनी, मथुरा के सभागार में बरेली इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी, बरेली के मानविकी एवं पत्रकारिता महाविद्यालय में प्रोफेसर और प्राचार्य के पद पर कार्यरत वृन्दावनवासी कवि, आलोचक, अनुवादक डॉ. अवनीश सिंह चौहान को  'बाबूसिंह स्मृति साहित्यरत्न सम्मान' से सम्मानित किया गया। बहुभाषी रचनाकार डॉ. चौहान हिंदी भाषा एवं साहित्य की वेब पत्रिका— 'पूर्वाभास' और अंग्रेज़ी भाषा एवं साहित्य की अंतर्राष्ट्रीय शोध पत्रिका— 'क्रिएशन एण्ड क्रिटिसिज़्म' के संपादक हैं। यह सम्मान उन्हें आलोक प्रताप सिंह मैमोरियल शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक समिति, मथुरा, उत्तर प्रदेश ने प्रदान किया है।

डॉ. अवनीश सिंह चौहान के नवगीत 'शब्दायन', 'गीत वसुधा', 'सहयात्री समय के', 'समकालीन गीत कोश', 'नयी सदी के गीत', 'गीत प्रसंग', 'नयी सदी के नये गीत' आदि समवेत संकलनों में और मेरी शाइन द्वारा सम्पादित अंग्रेज़ी कविता संग्रह 'ए स्ट्रिंग ऑफ़ वर्ड्स' एवं डॉ. चारुशील एवं डॉ बिनोद मिश्रा द्वारा सम्पादित अंग्रेज़ी कविताओं का संकलन 'एक्ज़ाइल्ड अमंग नेटिव्स' में अंग्रेज़ी कविताएँ संकलित की जा चुकी हैं। पिछले पंद्रह वर्ष से आपकी आधा दर्जन से अधिक अंग्रेज़ी भाषा की पुस्तकें कई विश्वविद्यालयों में पढ़ी-पढ़ाई जा रही हैं। आपका नवगीत संग्रह 'टुकड़ा कागज़ का' साहित्य समाज में बेहद चर्चित रहा है। आपने 'बुद्धिनाथ मिश्र की रचनाधर्मिता' पुस्तक का बेहतरीन संपादन किया है। 'वंदे ब्रज वसुंधरा' सूक्ति को आत्मसात कर  जीवन जीने वाले ऐसे विलक्षण युवा रचनाकार को 'अंतर्राष्ट्रीय कविता कोश सम्मान', मिशीगन- अमेरिका से 'बुक ऑफ़ द ईयर अवार्ड', राष्ट्रीय समाचार पत्र 'राजस्थान पत्रिका' का 'सृजनात्मक साहित्य पुरस्कार', अभिव्यक्ति विश्वम् (अभिव्यक्ति एवं अनुभूति वेब पत्रिकाएँ) का 'नवांकुर पुरस्कार', उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान- लखनऊ का 'हरिवंशराय बच्चन युवा गीतकार सम्मान' आदि से अलंकृत किया जा चुका है।

कार्यक्रम का शुभारम्भ माँ शारदे की पूजा-अर्चना-वंदना से हुआ। समारोह की अध्यक्षता सेवानिवृत्त न्यायाधीश श्री एस.एस. यादव (आगरा) ने की, जबकि मुख्य अतिथि वरिष्ठ समाजसेवी डॉ. अशोक अग्रवाल (मथुरा), अति-विशिष्ट अतिथि महामंडलेश्वर योगी नवलगिरि जी महाराज (वृन्दावन), विशिष्ट अतिथि डॉ. अनिल गहलौत (मथुरा), श्री निशेश जार एवं डॉ शेषपाल सिंह शेष (आगरा) रहे। इस कार्यक्रम में चार अन्य शब्द-साधकों- डॉ. आर. पी. सारस्वत (सहारनपुर), डॉ. धर्मराज (मथुरा) एवं चित्रांश रजनीश राज ब्रजवासी (मथुरा) एवं कुमारी किरन वर्मा को भी उनकी साहित्यिक सेवाओं के लिए सम्मानित किया गया। साथ ही इस समारोह में मथुरा के वरिष्ठ साहित्यकार संतोष कुमार सिंह की एक साथ चार बाल साहित्य की पुस्तकों- 'वृक्षों में भी होता जीवन', ’अपने चाचा चंपकलाल', 'चींटा ले खर्राटे' तथा 'मैं पूछूँगा आप बताएँ' का भव्य लोकार्पण सम्मानित अतिथियों-साहित्यकारों के कर-कमलों से सम्पन्न हुआ।

इस कार्यक्रम में डॉ. आर.पी.सारस्वत, निखिता सिंह सेंगर, रवेन्द्र पाल सिंह रसिक, डॉ. विवेकनिधि, मदन मोहन अरविंद, चित्रांश रजनीश राज, सुमन पाठक, प्रिया शर्मा, मूलचंद शर्मा, अटलराम चतुर्वेदी, निशेश जार, डॉ अनीता चौधरी, सी.पी.शर्मा, जुगुनू सारस्वत, डॉ अनिल गहलौत, डॉ. धर्मराज, अनुपम गौतम आदि ने गीत, सजल और हास्य व्यंग्य की रचनाओं का पाठ कर श्रोताओं को आनंदित कर दिया। सभागार में ब्रज भूषण वर्मा, डॉ. महेन्द्र प्रताप सिंह, तेजपाल सिंह सेंगर, प्रेमपाल सिंह शास्त्री, देवेन्द्र कुमार, एस. एस.चौहान, ए. पी. सिंह, डॉ. कमल कौशिक, एम. के. शर्मा, डॉ. भुवनेश कुमार सिंह, प्रदीप अग्रवाल, एस.एम.शर्मा, एस. एस. यादव, शैलेन्द्र शर्मा, नीटू शर्मा, मोहन मोही, चौ. जगवीर सिंह आदि साहित्यप्रेमी उपस्थित रहे। मंच संचालन अनुपम गौतम तथा धन्यवाद ज्ञापन स्कूल प्रबंधक जितेन्द्रसिंह सेंगर ने किया।

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