21 Oct 2019
भोजपाल साहित्य संस्थान, भोपाल की मासिक काव्य गोष्ठी संपन्न

भोजपाल साहित्य संस्थान, भोपाल की मासिक काव्य गोष्ठी संपन्न

19 अक्टूबर 2019 को भोपाल में साहित्य के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय संस्था, भोजपाल साहित्य संस्थान, भोपाल की मासिक साहित्यिक गोष्ठी का आयोजन भोपाल हाट परिसर स्थित ’9 एम मसाला रेंस्तरां’ में किया गया। कार्यक्रम संस्था के कार्यकारी अध्यक्ष श्री सुदर्शन सोनी की अध्यक्षता, श्री प्रियदर्शी खैरा के मुख्य आतिथ्य व वरिष्ठ साहित्यकार द्वय श्री अशोक निर्मल व श्री वीरेंद्र जैन के विशिष्ट आतिथ्य में संपन्न हुआ। कार्यक्रम में बडी़ संख्या में साहित्यकार व साहित्य प्रेमी उपस्थित थे । 

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09 Oct 2019
पुस्तक विमोचन व विराट कवि सम्मेलन तमनार में सम्पन्न

पुस्तक विमोचन व विराट कवि सम्मेलन तमनार में सम्पन्न

’दर्दोगम की बस्ती’ नामक पुस्तक हृदय को उद्वेलित करने वाली है - जयशंकर


रायगढ़ - औद्योगिक व वनांचल तहसील तमनार के नवदुर्गा समिति बरभांठा द्वारा पुस्तक विमोचन एवं विराट कवि सम्मेलन का सफल आयोजन गत् दिवांक 05 अक्टूबर को किया गया।

उक्त आयोजन के मुख्य अतिथि रायगढ़ के ख्यातिलब्ध साहित्यकार पं. शिवकुमार पाण्डेय जी, कार्यक्रम अध्यक्ष ग़ज़लकार शुकदेव पटनायक जी, विशिष्ट अतिथि प्रो. के. के. तिवारी जी व कवि कमल बहिदार जी थे।

कार्यक्रम के प्रथम चरण में माँ ज्ञानदात्री महासरस्वती जी के छायाचित्र पर माल्यार्पण व समक्ष दीप, धूप प्रज्वलित करके कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ किया गया। तत्पश्चात स्वागत के क्रम में आयोजक समिति के सक्रिय सदस्यों ने सभी साहित्यकारों को तिलक लगाकर व श्रीफल प्रदान करके स्वागत - सम्मान किया।

स्वागत पश्चात् अंचल के प्रतिष्ठित ग़ज़लकार जयशंकर प्रसाद डनसेना जी द्वारा सृजित ग़ज़ल संग्रह "दर्दोगम की बस्ती" नामक पुस्तक का विमोचन अतिथियों व आमंत्रित कवियों के हाथों से हुआ। अपने उद्बोधन में जयशंकर जी ने कहा कि - "मैंने, जल - जंगल व ज़मीन को लक्ष्य बनाकर जो ग़ज़ल सृजन किया है। वह, प्रत्येक आँचलिक के हृदय को उद्वेलित करने वाली हैं। समस्त रचनाएँ मात्र कोरी कल्पना नहीं वरन् यथार्थ के धरातल पर सृजित की गई ग़ज़ल हैं। आशा है, पाठक जगत स्वागत करेंगे।"

तृतीय चरण में आमंत्रित रचनाकारों द्वारा अपने - अपने प्रतिनिधि कविताओं का पाठ किया गया। जिसमें पं. शिवकुमार पाण्डेय, प्रो. के. के. तिवारी, कमल बहिदार, राघवेन्द्र सिंह रुहेल, डॉ. दिलीप गुप्ता, शुकदेव पटनायक, रूखमणी राजपूत, स्नेहलता सिंह 'स्नेह', पुष्पलता पटनायक, संतोष पैंकरा, उग्रसेन स्वर्णकार, तेजराम चौहान, जय शंकर प्रसाद डनसेना, बालकवि प्रमोद सोनवानी 'पुष्प', सिमरन साहू, कन्हैया पड़िहारी, मिमिक्री कलाकार सेतकुमार गुप्ता आदि प्रमुख हैं।

कार्यक्रम के अंतिम चरण में आयोजक समिति द्वारा सभी प्रतिभागी रचनाकारों को स्मृति चिन्ह भेंटकर सम्मानित किया गया। 

कुशल मंच संचालन घरघोड़ा से पधारे प्रतिष्ठित कवि डॉ. दिलीप गुप्ता जी ने किया।

आयोजन को सफल बनाने में रूपचन्द्र गुप्ता, परमानंद पटनायक, डॉ. मित्रभान गुप्ता, अरविन्द गुप्ता, प्रमोद साव, गोपाल गुप्ता, प्रदीप नायक आदि  की भूमिका सराहनीय रही। 
उक्त सफल कवि सम्मेलन अंचल में चर्चा का विषय है।

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28 Sep 2019
हिन्दी हैं हम, चाहे, कोई वतन हमारा…..
’हिन्दी दिवस 2019' हिन्दी राइटर्स गिल्ड के कार्यक्रम के संचालक श्री विद्याभूषण धर और श्रीमती लता पाण्डे

हिन्दी हैं हम, चाहे, कोई वतन हमारा…..

हिन्दी राइटर्स गिल्ड ने 14 सितम्बर 2019 को अपनी मासिक गोष्ठी में ‘हिंदी दिवस’ का सुन्दर आयोजन किया। यह कार्यक्रम ब्रैमप्टन की स्प्रिंगडेल शाखा लाइब्रेरी में दोपहर 1:30 से 4:30 तक चला। ’हिन्दी दिवस’ के इस आयोजन में बच्चों की विशेष भूमिका रही। कार्यक्रम के केन्द्र में 18 बच्चों की ऑडियो और वीडियो प्रस्तुतियाँ थीं जिन्हें पहले ही एक निश्चित समय देकर मँगा लिया गया था। लगभग सभी बच्चे इस कार्यक्रम में उपस्थित थे।

इस गोष्ठी के सफल संचालन का कार्य श्री विद्याभूषण धर तथा श्रीमती लता पांडे ने किया। कार्यक्रम के आरम्भ में विद्याभूषण जी ने हिन्दी के महत्वपूर्ण इतिहास की चर्चा की और राजभाषा के रूप में हिंदी के महत्व को बताया। उन्होंने बच्चों के साथ ही उनके माता-पिताओं को भी उनके सहयोग के लिए धन्यवाद दिया।

इसके पश्चात लताजी ने प्रसिद्ध साहित्यकार श्री रामेश्वर काम्बोज ’हिमांशु’ जी को आमंत्रित किया। काम्बोज जी ने कहा कि कोई भी भाषा बोली जाने पर ही पल्लवित होती है अत: माता-पिता को चाहिए कि वे बच्चों से घर में हिंदी में ही बात करें। उन्होंने लेखक के दायित्व को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि लेखक को भाषा की शुद्धता पर सदैव ध्यान देना चाहिए। शुद्ध भाषा पढ़ने से पाठक भी शुद्ध भाषा सीखेगा। उन्होंने कहा कि यह लोगों का दायित्व है कि वे भाषा का प्रयोग करके उसे जीवित रखें, मात्र किसी राजतंत्र के द्वारा भाषा का संरक्षण नहीं किया जा सकता। श्री काम्बोज जी ने हिंदी भाषा में प्रयोग की जानेवाली अनेक अशुद्धियों के उदाहरण देकर लोगों को शुद्ध किंतु सरल भाषा लिखने तथा बोलने के लिए प्रेरित किया।

इसके उपरान्त, विद्याभूषण जी ने कौंसिलेट से आए मुख्य अतिथि श्री प्रवीण कुमार मुंजाल को मंच पर आमंत्रित किया तथा हिन्दी राइटर्स गिल्ड के संस्थापक निदेशक श्री विजय विक्रांत तथा सुमन घई जी ने पुष्प प्रदान कर उनका स्वागत किया। मुंजाल जी ने हिंदी राइटर्स गिल्ड के कार्य की सराहना की और कहा कि विदेश में रहनेवाले भारतीयों के मन में हिंदी के प्रति उत्साह देखकर अच्छा लगता है।

इसके पश्चात आरम्भ हुआ बच्चों का कार्यक्रम! सभी बच्चों की पहले से रिकॉर्ड की गई कविताओं को पावर पॉइंट के माध्यम से स्क्रीन पर दिखाया गया। हर कवितापाठ के अंत में भाग लेनेवाले उपस्थित बच्चे सबके सामने आकर अपना परिचय दे रहे थे। भाग लेनेवाले बच्चों के नाम इस प्रकार हैं :

अनिका तिवारी, आरोही काम्बोज, आन्या गुप्ता, आशी चौबे, आर्या काम्बोज, श्रेयांसी कानूनगो, नैना कपूर, याना कपूर, साँची मेहरा, अस्मि चंद्रा, ईशान वर्मा, सम्यक् कुमार, अच्युतम कुमार, ईशान, कश्यप, वैष्णवी। अंत में, वैष्णवी ने हिंदी में एक मधुर भजन गाकर बच्चों के कार्यक्रम का समापन किया। सभी बच्चों को उपहार तथा प्रमाण पत्र देकर उनका सम्मान किया गया।

इसके पश्चात गोष्ठी का मध्यांतर स्वादिष्ट जलपान और चाय के साथ हुआ। ‘दम पुख़्त रेस्टोरेंट’, मारखम ने इस कार्यक्रम में पकोड़े और स्प्रिंग रोल भिजवा कर अपना सहयोग दिया, हिंदी राइटर्स गिल्ड उनका धन्यवाद करती है। सभी अतिथियों ने जलेबी ढोकले और हलवे का भी भरपूर आनंद लिया।

दूसरे सत्र में समय कम होने के कारण केवल कुछ अतिथियों को ही स्वरचित रचनाओं की प्रस्तुति के लिए बुलाया गया। सबसे पहले श्री के. एल. पांडे को आमंत्रित किया गया। वो भारत से पधारे थे। उन्होंने एक ग्रंथ की रचना की है जिसमें 1933 से अभी तक के 17000 हिंदी फ़िल्मों के गानों का रागों के आधार पर वर्गीकरण किया गया है। कार्यक्रम में उन्होंने अपने प्रकाशित काव्य संग्रह से ‘बाँसुरी’ नामक एक कविता और एक लघुकथा सुनाई।

इसके पश्चात् फ्रांस के सबसे बड़े नागरिक सम्मान से सम्मानित और पेरिस की यूनिवर्सिटी में प्रोफ़ेसर, डॉक्टर सरस्वती जोशी ने अपनी कविता द्वारा नारी की महिमा का उल्लेख किया। उनकी पुत्री डॉक्टर साधना जोशी ,जो यूनिवर्सिटी ऑफ़ टोरंटो में प्रोफ़ेसर हैं, उन्होंने मोदी जी की माता के सम्बन्ध में एक कविता पढ़ी। श्री संदीप त्यागी ने अपने मधुर स्वर में मातृभाषा हिंदी का महिमा गान प्रस्तुत किया।

इनके अतिरिक्त, श्रीमती सरोजनी जौहर, प्रीति अग्रवाल तथा श्री संदीप कुमार ने भी अपनी रचनाएँ पढ़ीं। संदीपजी ने दानार्थी संस्था एकल विद्यालय के कार्यक्रमों के सम्बन्ध में बताया कि किस प्रकार एकल ज़रूरतमंद बच्चों के लिए शिक्षा का मार्ग सुलभ करता है। उनकी कविता मातृभाषा हिंदी से संबंधित थी ।

इस प्रकार हर्ष और उत्साह से हिन्दी राइटर्स गिल्ड का ’हिंदी दिवस’ समारोह संपन्न हुआ।

प्रस्तुति - आशा बर्मन, डॉ.  शैलजा सक्सेना

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28 Sep 2019
डॉ. सुरंगमा यादव को मिला ’हिन्दी रत्न सम्मान’

डॉ. सुरंगमा यादव को मिला ’हिन्दी रत्न सम्मान’

डॉ. सुरंगमा यादव को सुल्तानपुर की सर्वोच्च साहित्यिक संस्था ’सरिता लोकसेवा संस्थान’ द्वारा दिनांक 22 सितम्बर 2019 को अयोध्या शोध संस्थान,अयोध्या के हाल में आयोजित उन्नीसवें अखिल भारतीय सम्मान समारोह में उनके साहित्यिक योगदान के लिए ’हिन्दी रत्न सम्मान’ से सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि जगतगुरू श्री रामभद्राचार्य दिव्यांग विश्वविद्यालय,चित्रकूट के कुलपति प्रो. योगेश चन्द्र दुबे, सुप्रसिद्ध साहित्यकार डॉ. विद्याविन्दु सिंह एवं संस्था के अध्यक्ष डॉ. कृष्णमणि चतुर्वेदी ’मैत्रेय’ ने सुरंगमा यादव को सम्मान पत्र एवं अगं वस्त्र प्रदान कर सम्मानित किया । डॉ. सुरंगमा यादव ,महामाया राजकीय महाविद्यालय महोना, लखनऊ में एसो.प्रो. हिन्दी के पद पर कार्यरत हैं।

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28 Sep 2019
भोजपाल साहित्य संस्थान, भोपाल की मासिक काव्य गोष्ठी दिनांक 28 सितम्बर 2019 को भोपाल में संपन्न

भोजपाल साहित्य संस्थान, भोपाल की मासिक काव्य गोष्ठी दिनांक 28 सितम्बर 2019 को भोपाल में संपन्न

साहित्य के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय संस्था, भोजपाल साहित्य संस्थान, भोपाल की मासिक साहित्यिक गोष्ठी का आयोजन दिनांक 28 सितम्बर 2019 को भोपाल हाट परिसर स्थित ’9 एम मसाला रेंस्तरां’ में किया गया। कार्यक्रम संस्था के कार्यकारी अध्यक्ष श्री सुदर्शन सोनी की अध्यक्षता, वरिष्ठ साहित्यकार श्री अशोक व्यास के मुख्य आतिथ्य में संपन्न हुआ। 

कार्यक्रम में वरिष्ठ व्यंग्यकार श्री अशोक व्यास, दुर्गारानी श्रीवास्तव,  श्री के के दुबे, श्री जयपाल सिंह, सुश्री सरिता, श्री चन्द्रभान राही आदि उपस्थित थे। श्री अशोक व्यास द्वारा सशक्त  सामयिक व्यंग्य ’मेरे अनमोल रतन आयेंगे’, दुर्गारानी श्रीवास्तव द्वारा कविता ’नार्यस्तु पूजयंते  के देश में पशु घूमते मनुज के वेष में’ का  श्रोताओं को मुग्ध करने वाला पाठन किया। चन्दभान राही द्वारा शेर ’जब जब हमें पीठ में खंजर लगा है हमने अक्सर अपने को दोस्तों के बीच पाया है’ का पाठ किया गया। मुम्बई से पधारी सुश्री सरिता द्वारा वॉलीवुड पर हास्य कविता का पाठन किया। संस्था के कार्यकारी अध्यक्ष सुदर्शन सोनी द्वारा व्यंग्य ’कवि सम्मेलन आयोजन के लिये पापड़ बिलाई’ का पाठ किया जिसे खूब सराहा गया।  कार्यक्रम का संचालन श्री चन्द्रभान राही व आभार प्रदर्शन दुर्गारानी श्रीवास्तव द्वारा किया गया।  

- प्रियदर्शी खैरा 

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20 Sep 2019
सृजनलोक अंतरराष्ट्रीय साहित्योत्सव संपन्न
डॉ. संगीता शर्मा की पुस्तक का लोकार्पण करते हुए सुप्रसिद्ध कथाकार चित्रा मुद्गल।

सृजनलोक अंतरराष्ट्रीय साहित्योत्सव संपन्न

 

 

विशेष अतिथि डॉ. ऋषभदेव शर्मा को  सम्मानित करते हुए कुलपति डॉ. संदीप संचेती, मुख्य अतिथि चित्रा मुद्गल और वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. दिविक रमेश।

हैदराबाद, 20 सितंबर, 2019 - एसआरएम इंस्टीट्यूट ऑफ़ साइंस एंड टेक्नोलोजी, चेन्नै तथा सृजनलोक प्रकाशन समूह के संयुक्त तत्वावधान में एसआरएम विश्वविद्यालय के चेन्नै स्थित सभागार में ‘हिंदी की विकास यात्रा : विविध आयाम’ विषयक द्विदिवसीय सृजनलोक अंतरराष्ट्रीय साहित्योत्सव संपन्न हुआ। इस समारोह में चित्रा मुद्गल, डॉ. दिविक रमेश, शरद आलोक (नॉर्वे), डॉ. सत्यनारायण मुंडा, डॉ. बी.एल. आच्छा, डॉ. पुष्पिता अवस्थी (सूरीनाम), कुसुम भट्ट, रानू मुखर्जी, कंचन शर्मा, डॉ. उषा रानी राव आदि उपस्थित रहे। समारोह का उद्घाटन एसआरएम विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. संदीप संचेती ने किया। 

दो-दिवसीय सम्मेलन में सृजनलोक के चित्रा मुद्गल विशेषांक सहित आठ पुस्तकों का लोकार्पण भी संपन्न हुआ। अवसर पर हैदराबाद की डॉ. संगीता शर्मा की पुस्तक ‘चित्रा मुद्गल की कहानियों में यथार्थ और कथाभाषा’ का लोकार्पण स्वयं चित्रा मुद्गल के हाथों हुआ। इस अवसर पर देश भर के 9 मौलिक रचनाकारों को ‘सृजनलोक सम्मान’ प्रदान किया गया।

प्रस्तुति      
गुर्रमकोंडा नीरजा
सहायक आचार्य
उच्च शिक्षा और शोध संस्थान
दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा
खैरताबाद, हैदराबाद – 500004

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18 Sep 2019
लेख कैसे लिखें: एक सार्थक चर्चा
लेख के विषय अपने विचार प्रस्तुत करते हुए सुमन कुमार घई

लेख कैसे लिखें: एक सार्थक चर्चा

10 अगस्त, 2019 को हिंदी राइटर्स गिल्ड ने वैचारिक संगोष्ठी आयोजित की, विचार का विषय था: अच्छा लेख कैसे लिखा जाए!

कार्यक्रम का प्रारंभ डॉक्टर नरेन्द्र ग्रोवर द्वारा आयोजित जलपान से हुआ। अतिथियों का स्वागत करते हुए डॉ. शैलजा सक्सेना ने संचालन का कार्यभार सँभाला। उन्होंने आज की गोष्ठी की रूपरेखा बताते हुए कहा कि यह गोष्ठी दो सत्रों में विभाजित है, पहले सत्र में लेख पर बातचीत होगी और दूसरे सत्र में कविता पाठ होगा। विषय की भूमिका स्थापित करते हुए उन्होंने  कहा कि जो बात कविता और कहानी से इतर लेखक सीधे-सीधे पाठकों तक पहुँचाना चाहता है, उसके लिए वह प्राय: लेख  या निबंध विधा का उपयोग करता है। विषय के आधार पर लेखों का वर्गीकरण किया जा सकता है, जैसे वैचारिक लेख, संस्मरणात्मक लेख, व्यंग्य लेख, विश्लेषणात्मक लेख आदि। उन्होंने प्रसिद्ध लेखक श्री निर्मल वर्मा द्वारा लिखित लेखों की विशेषता की चर्चा करते हुए उदाहरण स्वरूप उनके लेख ’मेरे लिए भारतीय होने का अर्थ’ से कुछ अंश भी पढ़ा।

इसके पश्चात उन्होंने श्री सुमन कुमार घई को लेख पर चर्चा के लिए सादर आमंत्रित किया। सुमन जी ने लेख के विषय में विस्तार से चर्चा करते हुए कहा कि लेख की विधा बहुत विस्तृत है, कई शैलियाँ हैं इसलिए उसे एक ही परिभाषा में नहीं बाँधा जा सकता। उन्होंने कहा कि आवश्यक है कि जो भी लेख लिखा जाए वह तथ्यपरक हो, उसका विषय रुचिकर हो, लेखक को विषय की पूर्णरूप से जानकारी हो। लेखक को इस विषय पर लिखे हुए पहले के लेख भी पढ़ने चाहिएँ और यदि उस में से वह कोई भी तथ्य अपने लेख में उद्धृत करता है तो उस लेख  का संदर्भ अवश्य देना चाहिए। लेख की भाषा भी विषय के अनुसार होना आवश्यक है। साथ ही उन्होंने इस बात पर ध्यान दिलाया कि लेख या अन्य लेखन तभी सार्थक होता है जब उसका प्रकाशन स्तरीय पत्र-पत्रिकाओं में हो। लेख पर बातचीत के दौरान ही उन्होंने श्रोताओं के प्रश्नों का भी बड़ी कुशलता से समाधान किया। ललित निबन्धों का ज़िक्र करते हुए उन्होंने अपनी वेब पत्रिका ’साहित्य कुंज’ में प्रकाशित श्री सुरेन्द्रनाथ तिवारी और श्री जय प्रकाश मानस रथ के ललित निबन्धों से कुछ पंक्तियाँ पढ़ीं।

तदोपरांत श्री अजय गुप्ता जी ने सुमन कुमार घई एवं कृष्णा वर्मा को जन्मदिन की बधाई देते हुए पुष्पगुच्छ प्रदान किए। कार्यक्रम को आगे बढ़ाते हुए श्रीमती मानोशी चटर्जी ने अपना लेख पढ़ा। उनका लेख कोलकाता के चंदन नगर में दुर्गा पूजा के बाद आयोजित चंदन नगर की विशेष पूजा के विषय में था। चंदन नगर के इतिहास और भौगोलिक स्थिति को बताते हुए उन्होंने इस पूजा के धार्मिक और सामाजिक संदर्भों का बहुत सुंदर चित्र प्रस्तुत किया। इस लेख के माध्यम से श्रोताओं को एक नए स्थान  और पूजा की विस्तृत जानकारी रोचक रुप से मिल सकी। लेख की इस विचार गोष्ठी में यह लेख एक बहुत अच्छा उदाहरण रहा।

इसके साथ ही पहला सत्र समाप्त हुआ और सभी ने पुन: तरोताज़ा होने के लिए चाय-नाश्ते का आनन्द लिया।

डॉ. शैलजा ने रचनात्मक प्रस्तुतियों के दूसरे सत्र में सबसे पहले अखिल भंडारी जी को आमंत्रित किया। उन्होंने अपनी दो ख़ूबसूरत ग़ज़लें पेश की "अगर उनके इशारे इस क़दर मुबहम नहीं होंगे / हमारी गुफ़्तगू में भी ये पेचोख़म नहीं होंगे" इसके बाद श्रीमती मानोशी चटर्जी ने अपनी दो ग़ज़लों से श्रोताओं का मन मोह लिया।  उनकी ग़ज़ल की पंक्तियाँ थीं: यह जहाँ मेरा नहीं है/ या कोई मुझ से नहीं है। इसके बाद श्री निर्मल सिद्धू  ने अपनी दो ग़ज़लें प्रस्तुत कीं, उनकी कुछ पंक्तियाँ हैं “मैं तो एक दीवाना हूँ/अलबेला मस्ताना हूँ/यह सिक्का अब भी चलता है/चाहे दौर पुराना हूँ" और दूसरी ग़ज़ल “वो जो एक दीवाना है/दुनिया से बेगाना है/निर्मल के वो संग रहे/बरसों का याराना है"। श्री संदीप त्यागी की ग़ज़ल थी "वजूद ख़ुद का हक़ीक़त में दिखाना होगा"। डॉक्टर नरेन्द्र ग्रोवर की कविता थी "दौड़ का दौर है फ़ुर्सत न ढूँढिए"। श्री बालकृष्ण शर्मा ने "या तो मुझे अपने मन में बसा लो तुम" नामक अपनी कविता का पाठ किया। श्रीमती पूनम चन्द्रा ने अपनी दो सुंदर रचनाएँ साँझी कीं "पतझड़ के मौसम में बहारों को सजा रखा है" तथा “वो बिना राह के ही सफ़र में था"। श्रीमती भुवनेश्वरी पांडे जी ने डॉ. जगदीश व्योम जी की पुस्तक से कुछ हाइकु पढ़े। श्रीमती इंदिरा वर्मा ने सुमन घई तथा कृष्णा वर्मा के जन्मदिन पर कुछ सुंदर पंक्तियाँ पढ़ीं। श्री विजय विक्रांत ने अपनी डायरी से "कांस्टेबल की डायरी का पन्ना” पढ़ा। श्रीमती प्रमिला भार्गव की कविता थी "चुप कर चुपके से"।  श्रीमती सीमा बागला ने अपनी कविता "निर्भय श्वास ले रहा आज लाल चौक पे तिरंगा" का पाठ किया। श्रीमती कृष्णा वर्मा ने श्रोताओं से अपनी रचना "समय" साँझी की। श्री सुमन कुमार घई ने टोरोंटो के प्रतिष्ठित लेखक श्री पाराशर गौड़ की दो कविताओं का पाठ किया जिन्हें किसी कारण से जल्दी जाना पड़ गया था। अंत में डॉ. शैलजा सक्सेना ने कुछ स्वरचित हाइकु पढ़े।

सभी लोग आज के कार्यक्रम की सार्थकता से संतोष और हर्ष अनुभव कर रहे थे।

नोट: हिंदी राइटर्स गिल्ड की मासिक गोष्ठियाँ नि:शुल्क हैं और इसमें सभी साहित्य प्रेमियों का स्वागत है। यह गोष्ठी हर महीने के दूसरे शनिवार को दोपहर 1:30 बजे से 4:30 बजे तक स्प्रिंगडेल ब्रांच लाइब्रेरी, ब्रैम्पटन में होती हैं।

- प्रस्तुति: कृष्णा वर्मा, शैलजा सक्सेना, सुमन कुमार घई

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17 Sep 2019
’खूँटी पर आकाश’ का लोकार्पण

’खूँटी पर आकाश’ का लोकार्पण

बंगलौर, 3 सितंबर, 2019

यहाँ जयनगर स्थित मानंदी संस्कृति सदन में आयोजित भव्य समारोह में प्रसिद्ध कवि एवं लेखक ज्ञानचंद मर्मज्ञ के सद्यःप्रकाशित निबंध संग्रह "खूँटी पर आकाश" का लोकार्पण सम्पन्न हुआ। अखिल भारतीय साहित्य साधक मंच, बंगलौर के सौजन्य से आयोजित, इस समारोह में हैदराबाद से आये, दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा के पूर्व प्रोफ़ेसर एवं प्रख्यात साहित्यकार डॉ. ऋषभदेव शर्मा बतौर मुख्य अतिथि शामिल रहे। बतौर विशिष्ट अतिथि राजस्थान पत्रिका के प्रभारी संपादक राजेंद्र शेखर व्यास, बिशप कॉटन वुमंस क्रिश्चयंस कॉलेज के हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. विनय कुमार यादव, और हिंदी प्रचार परिषद पत्रिका के संपादक डॉ. मनोहर भारती उपस्थित थे। अध्यक्षता आकाशवाणी बंगलौर के पूर्व निदेशक एवं उर्दू साहित्यकार मिलनसार अहमद ने की।

समारोह के मुख्य अतिथि और लोकार्पणकर्ता ऋषभदेव शर्मा ने अपने लोकार्पण भाषण में आलोच्य पुस्तक के साथ ही लेखक की रचनाधर्मिता की विशेष चर्चा की। उन्होनें कहा कि मर्मज्ञ के साहित्य के मूल त्रिकोण में एक कोण पर "लोक" है, दूसरे कोण पर "समाज और संस्कृति" एवं तीसरे कोण पर "राष्ट्र"। ऋषभ देव शर्मा ने  आगे कहा कि ज्ञानचंद मर्मज्ञ के साहित्य में नारी मन की पीड़ा, समाज की लोक से बढ़ती दूरी, मानवीय मूल्यों का क्षरण, जंगलों के शहर होने एवं शहरों के जंगल होने की व्यथा मुखरित होती है। उन्होंने "खूँटी पर आकाश" में संकलित निबंधों में व्यक्त लेखक की चिंताओं का जिक्र करते हुए कहा कि लेखक विनाश से अधिक विनाशकारी प्रवृत्तियों को लेकर चिंतित है।

अध्यक्षीय टिप्पणी में मिलनसार अहमद ने मर्मज्ञ के साहित्य-सृजन को 'लोक-कल्याण' से प्रेरित बताया। उन्होंने निबंध की बारीक़ियों और समकालीन साहित्य में इसके महत्व को रेखांकित करते हुए 'खूँटी पर आकाश' में संकलित निबंधों की विशेषताओं की चर्चा की और कहा कि इनमें एक नया मेटाफर है, एक नयी फैंटसी है और स्वयं से संवाद है।

पुस्तक की समीक्षा करते हुए केशव कर्ण ने "खूँटी पर आकाश" को गद्यकाव्य की संज्ञा दी और इसे जीवन की क्षणभंगुरता एवं जिजीविषा के बीच सामंजस्य पर केंद्रित बहु-आयामी एवं विविधवर्णी निबंधों का संकलन बताया। राजेंद्र शेखर व्यास ने साहित्य एवं पत्रकारिता के संबंधों को  चिह्नित करते हुए इन दोनों विधाओं में 'टाइम और स्पेस' के महत्व पर बल दिया, तो डॉ. विनय यादव ने मर्मज्ञ के साहित्य की पठनीयता एवं उपादेयता पर चर्चा की। डॉ मनोहर भारती ने लेखक ज्ञानचंद मर्मज्ञ को जन-मन का रचनाकार बताया।लेखक ज्ञानचंद मर्मज्ञ ने अतिथियों एवं उपस्थित गणमान्य व्यक्तियों के प्रति आभार प्रकट करते हुए पुस्तक से जुडी अपनी भावनाओं को भी व्यक्त किया। लेखक ने कहा कि इन निबंधों में आकुल मन के प्रश्न हैं, कुछ चिंता है कुछ व्यथा है। 

आरंभ में अतिथियों ने दीप-प्रज्वलन किया। अर्जुनसिंह धर्मधारी ने  सरस्वती-वंदना की। डॉ. उषा रानी राव ने अतिथियो परिचय दिया। मुख्य अतिथि का परिचय डॉ संतोष मिश्रा ने दिया। मंच संचालन मंजु वेंकट ने किया तथा धन्यवाद डॉ. अरविंद गुप्ता ने दिया।

-प्रस्तुति केशव कर्ण, साहित्य साधक मंच, बंगलौर

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17 Sep 2019
राष्ट्रीय संगोष्ठी में रचना प्रतिभा सम्मान से सम्मानित हुए प्रमोद सोनवानी

राष्ट्रीय संगोष्ठी में रचना प्रतिभा सम्मान से सम्मानित हुए प्रमोद सोनवानी

रायगढ़ - अंतर्राष्ट्रीय साहित्य संस्था ’मंजिल ग्रुप साहित्य मंच’ - नई दिल्ली के बैनर तले तहसील घरघोड़ा के प्राचीन बैगिन डोकरी मन्दिर प्रांगण में गत् दिवस एक भव्य राष्ट्रीय साहित्य संगोष्ठी का आयोजन किया गया।

इस संगोष्ठी के प्रमुख अतिथि दिल्ली से पधारे मगसम के राष्ट्रीय संयोजक व ख्यातिलब्ध साहित्यकार डॉ. सुधीर सिंह 'सुधाकर' जी थे ।

आयोजित राष्ट्रीय साहित्य संगोष्ठी में तमनार, पड़िगाँव निवासी बाल साहित्यकार प्रमोद सोनवानी पुष्प को बाल साहित्य लेखन - सृजन हेतु "रचना प्रतिभा सम्मान - 2019" से सम्मानित किया गया। उक्त प्रद्दत सम्मान के तहत पुष्प को अलंकरण वस्त्र , अलंकरण पट्टी, साहित्य व सम्मान पत्र अतिथियों के करकमलों से प्रदान किया गया।

काव्यपाठ के क्रम में  प्रमोद सोनवानी ने माँ के ऊपर केन्द्रित व बालमन को समर्पित बाल-कविता ’बचपन खोने न दें’ शीर्षक से सस्वर पाठ करके ख़ूब वाहवाही व तालियाँ बटोरीं।

प्राप्त सम्मान हेतु बाल साहित्यकार प्रमोद को डॉ. सुधीर सिंह जी, वकील शंखदेव मिश्रा जी, डॉ. दिलीप गुप्ता ज , व्याख्याता संजय बहिदार ज , प्रधान अध्यापिका रूखमणी राजपूत जी, समाज के ज़िला अध्यक्ष बाबा गंगाधर दास जी, पत्रकार प्रताप नारायण बेहरा जी, श्रवण चौहान जी व कृषि विस्तार अधिकारी संतोष पैंकरा जी ने आशीर्वाद स्वरूप बधाई दी।
आदर्श व पृथक ढंग से आयोजित उक्त साहित्यिक कार्यक्रम क्षेत्र में चर्चित है। इस कार्यक्रम में गणमान्यों के साथ-साथ आमजनों की उपस्थिति सराहनीय रही। ज्ञातव्य हो कि उक्त आयोजन भारत के साथ-साथ विश्व के लगभग 27 देशों में संचालित हो रहा है।

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17 Sep 2019
राजकुमार जैन राजन की नेपाली में अनूदित पुस्तकों का लोकार्पण उज्जैन में

राजकुमार जैन राजन की नेपाली में अनूदित पुस्तकों का लोकार्पण उज्जैन में

उज्जैन- आकोला (राजस्थान) के सुपरिचित साहित्यकार, संपादक, प्रकाशक, समाजसेवी श्री राजकुमार जैन राजन की बाल-साहित्य कृतियों के नेपाल से प्रकाशित नेपाली अनूदित संस्करण का लोकार्पण उज्जैन में हुआ। उज्जैन की कालिदास अकादमी परिसर में 'शब्द प्रवाह सृजन मंच' उज्जैन व 'राष्ट्रीय पुस्तक न्यास', नई दिल्ली के भव्य आयोजन में राजन के बाल कहानी संग्रह 'मन के जीते जीत' एवम बाल कविता संग्रह 'रोबोट एक दिला दो राम' के नेपाली संस्करण 'मनले जिते जित' एवम 'एउटा रोबट दिलाइदेऊ राम' का लोकार्पण सम्पन्न हुआ। 

मंचस्थ अतिथि राष्ट्रीय पुस्तक न्यास के संपादक डॉ. लालित्य ललित, विक्रम विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति, मध्य प्रदेश हिंदी ग्रन्थ अकादमी के निदेशक व प्रसिद्ध साहित्यकार, चिंतक डॉ. राम राजेश मिश्र, कुलानुशासक हिंदी विभागाध्यक्ष विक्रम विश्वविद्यालय एवम प्रसिद्ध साहित्यकार डॉ. शैलेन्द्र कुमार शर्मा, सुप्रसिद्ध संपादक, साहित्यकार श्री संदीप सृजन, डॉ. राजेश रावल, श्री राजेश राज आदि के करकमलों द्वारा इन कृतियों का लोकार्पण सम्पादित हुआ। इस आयोजन में सर्व श्री गोविंद शर्मा (संगरिया), डॉ. जयप्रकाश पंड्या ज्योतिपुंज (उदयपुर), जयसिंग आशावत (नैनवा), डॉ. गरिमा दुबे (इंदौर), डॉ. महेंद्र अग्रवाल (शिवपुरी), श्री अशोक व्यास (भोपाल), श्रीमती शशि सक्सैना (जयपुर), श्री प्रदीप नवीन (इंदौर) सहित देश के कई ख्यातनाम साहित्यकार उपस्थित रहे।

ज्ञातव्य है कि राजकुमार जैन राजन बाल-साहित्य के उन्नयन एवम संवर्द्धन के लिए प्रतिबद्ध व बाल-साहित्य सर्जक के रूप में बाल-साहित्य जगत में सुपरिचित नाम है। इनकी अब तक 36 बाल सहित्य कृतियाँ प्रकाशित हो चुकी है। देश-विदेश में कई भाषाओं में इनकी कृतियों का अनुवाद हुआ है।

बाल कहानी संग्रह 'मन के जीते जीत' में सकारात्मक सोच प्रदान करने वाली 30 कहानियाँ प्रकाशित है। इस कहानी संग्रह का नेपाली अनूदित संस्करण 'मनले जिते जित' नाम से 'शब्द संयोजन प्रकाशन' काठमांडू , नेपाल से, नेपाल सरकार के आईएसबीएन नम्बर के साथ प्रकाशित हुआ है जिसका नेपाली भाषा मे अनुवाद नेपाली/हिंदी की प्रसिद्ध साहित्यकार सुमि लोहनी ने किया है।

बाल कविता संग्रह 'रोबोट एक दिला दो राम' में राजकुमार जैन राजन की 47 कविताएँ संगृहीत हैं जिसमें बच्चों को प्रकृति प्रेम, पर्यावरण संरक्षण की सीख देते हुये प्रकृति के विविध आयामों को सुंदर तरीक़े से प्रस्तुत करते हुए आधुनिक वैज्ञानिक युग से जोड़ने वाली कवितायें संगृहीत हैं। इस बाल कविता संग्रह का नेपाली भाषा मे अनूदित संस्करण 'एउटा रोबट दिलाईदेऊ राम' शीर्षक से दीपश्री क्रिएटिव मीडिया पब्लिसिंग हाउस, काठमांडू नेपाल से, नेपाल के आईएसबीएन के साथ प्रकाशित हुआ है। इस बाल कविता संग्रह का अनुवाद भी नेपाल की ख्यातनाम लेखिका , शिक्षाविद सुमि लोहनी ने किया है। 

भारतीय रचनाकार की नेपाल से प्रकाशित ये कृतियाँ भारत -नेपाल मैत्री व सांस्कृतिक संम्बंधों को सुदृढ़ करने का काम करेगी।

इससे पूर्व राजकुमार जैन राजन के कविता संग्रह 'खोजना होगा अमृत कलश' का भी नेपाली में अनूदित संस्करण प्रकाशित हो चुका है जिसका लोकार्पण नेपाल, प्रदेश 2 के मुख्यमंत्री द्वारा किया गया है।

●समाचार: पारुल व्यास

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16 Sep 2019
स्पंदन द्वारा 'जिन्हें जुर्म-ए-इश्क पर नाज़ था' पर चर्चा

स्पंदन द्वारा 'जिन्हें जुर्म-ए-इश्क पर नाज़ था' पर चर्चा

ललित कलाओं के प्रशिक्षण प्रदर्शन एवं शोध की अग्रणी संस्था स्पंदन द्वारा पंकज सुबीर के बहुचर्चित उपन्यास 'जिन्हें जुर्म-ए-इश्क पर नाज़ था' पर पुस्तक चर्चा का आयोजन स्वराज भवन में किया गया। इस अवसर पर उपन्यास के दूसरे संस्करण का भी विमोचन हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता मध्यप्रदेश के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक श्री सैयद मोहम्मद अफ़ज़ल ने की। पुस्तक पर वक्ता के रूप में भोपाल कलेक्टर श्री तरुण पिथोड़े, एबीपी न्यूज़ के संवाददाता श्री बृजेश राजपूत तथा दैनिक भास्कर के समाचार संपादक श्री सुदीप शुक्ला उपस्थित थे। 

सर्वप्रथम अतिथियों का स्वागत स्पंदन की संयोजक वरिष्ठ कथाकार डॉ उर्मिला शिरीष ने किया। इस अवसर पर बोलते हुए श्री सुदीप शुक्ला ने कहा कि यह उपन्यास एक ऐसे समय पर आया है, जब इस उपन्यास की सबसे अधिक आवश्यकता थी। यह इस समय की सबसे ज़रूरी किताब है। इस उपन्यास में प्रश्नोत्तर के माध्यम से आज के कुछ महत्वपूर्ण सवालों के जवाब तलाशे गए हैं। ऐतिहासिक पात्रों को उठाकर उनके साथ चर्चा करते हुए लेखक ने आज की समस्याओं के हल और उनकी जड़ तलाशने की कोशिश की है। उपन्यास पर चर्चा करते हुए श्री बृजेश राजपूत ने कहा कि पंकज सुबीर के पहले के दोनों उपन्यास भी मैंने पढ़े हैं तथा उन पर टिप्पणी की है, यह तीसरा उपन्यास उन दोनों से बिल्कुल अलग तरह का उपन्यास है। इस उपन्यास को पंकज सुबीर ने एक बिल्कुल नए शिल्प और एक नई भाषा के साथ लिखा है। यह ठहरकर पढ़े जाने वाला उपन्यास है जो आपको कई सारी नई जानकारियाँ प्रदान करता है, ऐसी जानकारियाँ जिनके बारे में आप जानना चाहते हैं। 

भोपाल कलेक्टर श्री तरुण पिथोड़े ने उपन्यास पर चर्चा करते हुए कहा कि यह उपन्यास प्रशासन से जुड़े हुए अधिकारियों के मानवीय पक्ष को सामने रखता है। साथ में उन चुनौतियों के बारे में भी बताता है जिन चुनौतियों का सामना हम सब को करना पड़ता है। यह मानवीय मूल्यों की पुनर्स्थापना का उपन्यास है। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे श्री सैयद मोहम्मद अफ़ज़ल ने कहा कि इस उपन्यास में बहुत सारी बातें ऐसी हैं जिनको पढ़ते हुए हमें ऐसा लगता है कि लेखक ने बहुत ख़तरा उठा कर इस उपन्यास को लिखा है। कई सारी बातें, कई सारे कोट्स इस तरह के हैं जैसे हमारे ही मन की बात लेखक ने लिख दी है। इस तरह के उपन्यासों का लिखा जाना बहुत ज़रूरी है क्योंकि यह उपन्यास और इस तरह की किताबें बहुत सारी ग़लतफ़हमियों के अँधेरे को दूर किया है। 

कार्यक्रम के अंत में सभी अतिथियों को स्पंदन तथा शिवना प्रकाशन की तरफ से स्मृति चिन्ह प्रदान किए गए। अंत में आभार स्पंदन की संयोजक डॉ. उर्मिला शिरीष ने व्यक्त किया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में साहित्यकार, पत्रकार उपस्थित थे।

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16 Sep 2019
साहित्यकार त्रिलोक सिंह ठकुरेला पाठ्यक्रम में 

साहित्यकार त्रिलोक सिंह ठकुरेला पाठ्यक्रम में 

सुपरिचित कुंडलियाकार एवं साहित्यकार त्रिलोक सिंह ठकुरेला की रचनाओं​ को XSEED Education की पाठ्य-पुस्तकों में सम्मिलित किया गया है । XSEED Education की कक्षा 6 की हिंदी पाठ्य-पुस्तक भाग 2 में त्रिलोक सिंह ठकुरेला की कुण्डलियाँ, कक्षा 7 की हिंदी पाठ्य-पुस्तक भाग 1 में बाल कविता एवं कक्षा 8 की  हिंदी पाठ्य-पुस्तक में गीत सम्मिलित किया गया है । ज्ञातव्य है कि XSEED Education का मुख्यालय सिंगापुर में स्थित है, जिसकी शिक्षण पद्धति से भारत सहित 8 देशों के हज़ारों स्कूल संचालित हैं ।

त्रिलोक सिंह ठकुरेला को उनके साहित्यिक अवदान के लिए अनेक साहित्यिक साहित्यिक​ संस्थाओं द्वारा सम्मानित किया जा चुका है । उल्लेखनीय है कि पूर्व में भी त्रिलोक सिंह ठकुरेला की रचनाओं​ को महाराष्ट्र राज्य की दसवीं कक्षा की पाठ्य-पुस्तक 'हिंदी कुमारभारती' सहित अनेक पाठ्य-पुस्तकों में सम्मिलित किया जा चुका है ।

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21 Jul 2019
कहानी-पाठ एवं चर्चा - उर्मिला जैन का संग्रह ’मोन्टाना’ और कमला दत्त का ’अच्छी औरतें’
बायें से दायें शैल अग्रवाल, दिव्या माथुर, डॉ. अचला शर्मा, अरुण सब्बरवाल, कादम्बरी मेहरा, शोभा माथुर, उषा राजे सक्सेना, डॉ. कमला दत्त, डॉ. उर्मिला जैन, मीरा कौशिक, डॉ. निखिल कौशिक। पीछे: डॉ. अनुज अग्रवाल, डॉ. पद्मेश गुप्त, कौंसिलर टॉम आदित्य, शन्नो अग्रवाल

कहानी-पाठ एवं चर्चा - उर्मिला जैन का संग्रह ’मोन्टाना’ और कमला दत्त का ’अच्छी औरतें’

लंदन, 17 जुलाई 2019 – वातायन पोएट्री ऑन साउथ बैंक द्वारा नेहरु सेंटर-लंदन में एक विशेष साहित्यिक समारोह का आयोजन किया गया जिसमें जानी-मानी लेखिका और अनुवादक उर्मिला जैन की पुस्तक ’ट्रेमोन्टाना’ जो कि स्पैनिश लेखक मार्क्वेज़ गेब्रियल की कहानियों का सुंदर अनुवाद है और एटलांटा-यू.एस.ए. से पधारी वरिष्ठ अनुसंधानकर्ता और कथाकार कमला दत्त के कहानी-संग्रह ’अच्छी औरतें’ पर लंदन में बसी साहित्यकारों, डॉ. अचला शार्मा एवं श्रीमती शैल अग्रवाल द्वारा चर्चा की गयी; लेखिकाओं ने अपनी एक छोटी कहानी का नाटकीय पाठ भी किया।

नेत्र-सर्जन, फ़िल्म-प्रोड्यूसर, डायरेक्टर और कवि, डॉ. निखिल कौशिक जो इस कार्यक्रम के कुशल संचालक भी थे, की सुरीली वंदना के उपरान्त वातायन की अध्यक्ष मीरा कौशिक, ओ.बी.ई. ने मंच से अतिथियों एवं श्रोताओं का स्वागत-अभिनंदन किया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि थे ब्रिस्टल के मेयर माननीय टॉम आदित्य जो अनुशासन-प्रबंधन के कार्य में रत रहते हुए बहु-भाषा के फ़ोरम एवं सामाजिक अभियानों का नेतृत्व भी करते हैं। उन्होंने लेखकों बधाई देते हुए विदेश में हिंदी की उन्नति और प्रचार-प्रसार के लिए वातायन की सराहना की और अपनी शुभकामनाएँ दीं। ऑक्सफ़ोर्ड बिजिनेस कॉलेज के डायरेक्टर और प्रसिद्ध लेखक डॉ. पद्मेश गुप्त ने अध्यक्षता का पद सँभाला।

डॉ. उर्मिला जैन की ’ट्रेमोन्टाना’ की समीक्षा जानी-मानी लेखिका, कवि और ’लेखनी’ की संपादिका श्रीमती शैल अग्रवाल ने की। प्रख्यात कोलंबियन नोबल-प्राईज़ विजेता लेखक व उपन्यासकार गेब्रियल मार्क्वेज़ की कहानियों का दुनिया भर में कई भाषाओं में अनुवाद किया जा चुका है। किसी अन्य भाषा से अपनी भाषा में कहानियों का अनुवाद करना कितना कठिन कार्य होता है, इसे हम सभी जानते हैं। किंतु उर्मिला जैन ने “ट्रेमोन्टाना” का अंग्रेज़ी अनुवाद से हिंदी में अनुवाद करके अपने उत्कृष्ट लेखन का प्रमाण दिया है। उर्मिला जी ने मार्क्वेज़ की एक लघु कथा, उस प्रतापी का भूत का रोचक पाठ भी किया, जो भूतों पर आधारित थी।

डॉ. कमला दत्त की पुस्तक ’अच्छी औरतें’ की समीक्षा लेखिका और बी.बी.सी. की विख्यात पूर्व-प्रसारक डॉ. अचला शर्मा ने उत्तम तरीक़े से की। डॉ. कमला दत्त, जिन्होंने स्टेम-सेल रिसर्च और टिश्यू-इंजीनियरिंग में महत्वपूर्ण योगदान दिया है, के कहानी संकल ’मछली सलीब पर टंगी है’, ’कमला दत्त की यादगार कहानियाँ’ और ’अच्छी औरतें’ प्रसिद्ध हैं। वह थिएटर से भी जुड़ी रही हैं, उनके पुरस्कारों में शामिल हैं: आल इंडिया गेटी थियेटर एक्टिंग अवार्ड, रीजनल यूथ फ़ेस्टिवल अवार्ड और द स्टेट अवार्ड फ़ॉर प्रेमचंद’स ’धनिया’ (यूनिवर्सिटी कलर अवार्डी फ़ॉर थियेटर)। उन्होंने अपनी कहानी ’तुम वहाँ नहीं थे’ की नाटकीय प्रस्तुति की।

समस्त प्रोग्राम इतना दिलचस्प था कि हॉल में उपस्थित श्रोतागण अंत तक मंत्रमुग्ध होकर बैठे रहे। श्रीमती अरुणा सब्बरवाल ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। अंत में वातायन की संस्थापक, दिव्या माथुर और विशिष्ट अतिथि कौंसलर टॉम आदित्य ने इस कार्यक्रम में प्रतिभागियों को उपहार देकर आदरपूर्वक विदा किया।
प्रस्तुति शन्नो अग्रवाल
vatayanpoetry@gmail.com

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20 Jul 2019
पंकज सुबीर के नए उपन्यास ‘जिन्हें जुर्म-ए-इश्क़ पे नाज़ था’ का विमोचन

पंकज सुबीर के नए उपन्यास ‘जिन्हें जुर्म-ए-इश्क़ पे नाज़ था’ का विमोचन

"एक रात की कहानी में सभ्यता समीक्षा है ये उपन्यास"- डॉ. प्रज्ञा

शिवना प्रकाशन द्वारा आयोजित एक गरिमामय साहित्य समारोह में सुप्रसिद्ध कथाकार पंकज सुबीर के तीसरे उपन्यास "जिन्हें जुर्म-ए-इश्क़ पे नाज़ था" का विमोचन किया गया। इस अवसर पर सुप्रसिद्ध कथाकार, उपन्यासकार तथा नाट्य आलोचक डॉ. प्रज्ञा विशेष रूप से उपस्थित थीं। कार्यक्रम का संचालन संजय पटेल ने किया।

श्री मध्य भारत हिंदी साहित्य समिति के सभागार में आयोजित इस समारोह में अतिथियों द्वारा पंकज सुबीर के नए उपन्यास का विमोचन किया गया। इस अवसर पर वामा साहित्य मंच इन्दौर की ओर से पंकज सुबीर को शॉल, श्रीफल तथा सम्मान पत्र देकर सम्मानित किया गया। मंच की अध्यक्ष पद्मा राजेन्द्र, सचिव ज्योति जैन, गरिमा संजय दुबे, किसलय पंचोली तथा सदस्याओं द्वारा पंकज सुबीर को सम्मानित किया गया। 

स्वागत भाषण देते हुए कहानीकार, उपन्यासकार ज्योति जैन ने कहा कि पंकज सुबीर द्वारा अपने नए उपन्यास के विमोचन के लिए इंदौर का चयन करना हम सबके लिए प्रसन्नता का विषय है; क्योंकि उनका इंदौर शहर से लगाव रहा है और यहाँ के साहित्यिक कार्यक्रमों में भी वे लगातार आते रहे हैं। इस उपन्यास का इंदौर में विमोचन होना असल में हमारे ही एक लेखक की पुस्तक का हमारे शहर में विमोचन होना है। 

इस अवसर पर बोलते हुए डॉ. प्रज्ञा ने कहा कि नई सदी में जो लेखक सामने आए हैं, उनमें पंकज सुबीर का नाम तथा स्थान विशिष्ट है। वह लगातार लेखन में सक्रिय हैं, उनकी कई कृतियाँ आ चुकी हैं और पाठकों द्वारा सराही भी जा चुकी हैं। पिछला उपन्यास ‘अकाल में उत्सव’ किसानों की आत्महत्या पर केंद्रित था, तो यह नया उपन्यास "जिन्हें जुर्म-ए-इश्क़ पे नाज़ था" सांप्रदायिकता की चुनौतियों से रू-ब-रू होता दिखाई देता है। इस उपन्यास के बहाने पंकज सुबीर ने उन सारे प्रश्नों की तलाश करने की कोशिश की है, जिनसे हमारा समय इन दिनों जूझ रहा है। सांप्रदायिकता की चुनौती कोई नया विषय नहीं है; बल्कि यह समूचे विश्व के लिए आज एक बड़ी परेशानी बन चुका है। पंकज सुबीर ने इस उपन्यास में वैश्विक परिदृश्य पर जाकर यह तलाशने की कोशिश की है कि मानव सभ्यता और सांप्रदायिकता, यह दोनों पिछले पाँच हज़ार सालों से एक दूसरे के साथ-साथ चल रहे हैं, इसमें कोई नई बात नहीं है। पंकज सुबीर ने यह उपन्यास बहुत साहस के साथ लिखा है। इस उपन्यास को लेकर किया गया उनका शोध कार्य, उनकी मेहनत इस उपन्यास के हर पन्ने पर दिखाई देती है। उपन्यास को पढ़ते हुए हमें एहसास होता है कि इस एक उपन्यास को लिखने के लिए लेखक ने कितनी किताबें पढ़ी होंगी और उनमें से इस उपन्यास के और सांप्रदायिकता के सूत्र तलाशे होंगे। मैं यह ज़रूर कहना चाहूँगी कि एक पंक्ति में "यह उपन्यास एक रात में की गई सभ्यता समीक्षा है"। एक रात इसलिए क्योंकि यह उपन्यास एक रात में घटित होता है। उस एक रात के बहाने लेखक ने मानव सभ्यता के पाँच हज़ार सालों के इतिहास की समीक्षा कर डाली है। यह एक ज़रूरी उपन्यास है, जिसे हम सब को ज़रूर पढ़ना चाहिए।

उपन्यास के लेखक पंकज सुबीर ने अपनी बात कहते हुए कहा कि इस उपन्यास को लिखते समय बहुत सारे प्रश्न मेरे दिमाग़ में थे। सांप्रदायिकता एक ऐसा विषय है जिस पर लिखते समय बहुत सावधानी और सजगता बरतनी होती है, ज़रा सी असावधानी से सब कुछ नष्ट हो जाने की संभावना बनी रहती है। इस उपन्यास को लिखते समय मेरे दिमाग़ में बहुत सारे पात्र थे, बहुत सारे चरित्र थे। इतिहास में ऐसी बहुत सारी घटनाएँ थीं, जिन घटनाओं के सूत्र विश्व की वर्तमान सांप्रदायिक स्थिति से जुड़ते हुए दिखाई देते हैं। मैं उन सब को इस उपन्यास में नहीं ले पाया। फिर भी मुझे लगता है कि मैंने अपनी तरह से थोड़ा प्रयास करने की कोशिश की है, बाक़ी अब पाठकों को देखना है कि मैं अपने प्रयास में कितना सफल रहा हूँ। 

अंत में आभार व्यक्त करते हुए शिवना प्रकाशन के महाप्रबंधक शहरयार अमजद खान में पधारे हुए सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का सुरुचिपूर्ण संचालन संजय पटेल ने किया। अंत में अतिथियों को स्मृति चिह्न श्रीमती रेखा पुरोहित तथा श्रीमती किरण पुरोहित ने प्रदान किए। 

इस अवसर पर सर्वश्री प्रभु जोशी, सरोज कुमार, सूर्यकांत नागर, सदाशिव कौतुक, कैलाश वानखेड़े, कविता वर्मा, किसलय पंचोली, डॉ. गरिमा संजय दुबे, समीर यादव, शशिकांत यादव, अर्चना अंजुम, सुदीप व्यास, आनंद पचौरी, प्रदीप कांत, प्रदीप नवीन, अनिल पालीवाल, कैलाश अग्रवाल, उमेश शर्मा, शरद जैन, भारती दीक्षित, पंकज दीक्षित, अनिल त्रिवेदी, आदित्य जोशी, राजेंद्र शर्मा सहित बड़ी संख्या में इंदौर, देवास, सीहोर तथा उज्जैन से पधारे हुए साहित्यकार उपस्थित थे।

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20 Jul 2019
गुरुपूर्णिमा पर्व के अवसर पर सम्मानित हुए क़लम-कला साधक 

गुरुपूर्णिमा पर्व के अवसर पर सम्मानित हुए क़लम-कला साधक 

आगरा- विश्वशांति मानव सेवा समिति के कार्यालय में बृजलोक साहित्य-कला-संस्कृति अकादमी के सौजन्य से देशभर के साहित्यकारों, कलाकारों, पत्रकारों को सम्मानित किया गया। उपर्युक्त कार्यक्रम गुरुपूर्णिमा पर्व के पावन अवसर पर आयोजित किया गया। उक्त कार्यक्रम में मुख्यरूप से जयकिशन सिंह एकलव्य को उनकी क़लम साधना के लिए साहित्य साधक सम्मान उपाधि से सम्मानित किया गया। इस अवसर पर जिन अन्य महानुभावों को सम्मानित किया गया वे हैं -

राहुल सिंह (मुंबई - महाराष्ट्र), रेशमा शेख (मुंबई - महाराष्ट्र), दिव्या कुमारी जैन (चित्तौड़गढ़ - राजस्थान), एस.डी. ओमी प्रताप (वाराणसी - उ. प्र.), डॉ. राजेन्द्र श्रीवास्तव (फैजाबाद - उ. प्र.), भेरूलाल जैन (कलकत्ता - पं. बंगाल), सनातन कुमार वाजपेयी सनातन (जबलपुर - म. प्र.), बादल प्रयागवासी (प्रयागराज - उ. प्र.), शिव बक्श सागर प्रजापति (फैजाबाद - उ. प्र.), चित्रकार खलीक अहमद खाँ (फैजाबाद - उ. प्र.), सुनील कुमार दिवाकर (लखनऊ - उ. प्र.), शाह आलम (जालौन - उ. प्र.), आचार्य शीलक राम (रोहतक - हरियाणा), सी. एल. दीवाना हिन्दुस्तानी (रीवा - म. प्र.), श्रीमती आभा गुप्ता इन्दौरी (रीवा - म. प्र.), शंकर लाल माहेश्वरी (भीलवाडा - राजस्थान), गौरीशंकर वैश्य विनम्र (लखनऊ - उ. प्र.), आफताब आलम (मुंबई - महाराष्ट्र) आदि।

गौरतलब है कि बृजलोक अकादमी अपनी सहयोगी संस्थाओं के संयुक्त बैनर तले साल-भर में चार बार इस तरह के कार्यक्रमों का आयोजन करती है। ये अवसर हैं मकर संक्रांति, होली, गुरूपूर्णिमा और दीपावली। अगला आयोजन दीपावली पर होगा। इस हेतु देशभर से साहित्यकार, कलाकार, पत्रकार अपनी प्रविष्टियाँ पूर्णतः निशुल्क भिजवा सकते हैं। 

सभी उपस्थित महानुभावों का आभार माना मुकेश कुमार ऋषि वर्मा ने और अपनी उपस्थिति दर्ज करायी मोहर सिंह निषाद, राकेश वर्मा, अवधेश कुमार, राजकुमार, प्रीतम, राहुल आदि ने।

रिपोर्ट - मुकेश कुमार ऋषि वर्मा

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29 Jun 2019
परमजीत दियोल के काव्य-संग्रह "हवा में लिखी इबारत" का लोकार्पण

परमजीत दियोल के काव्य-संग्रह "हवा में लिखी इबारत" का लोकार्पण

हिन्दी राइटर्स गिल्ड की जून गोष्ठी आठ जून को स्प्रिंगडेल लाइब्रेरी के कमरे में यथासमय १:३० बजे बहुत धूमधाम से प्रारंभ हुआ। इस गोष्ठी का मुख्य कार्यक्रम पंजाबी की चर्चित कवयित्री श्रीमती परमजीत दियोल की पंजाबी की चुनी हुई कविताओं के हिन्दी अनुवाद की पुस्तक "हवा में लिखी इबारत" का लोकार्पण था। हिन्दी राइटर्स गिल्ड के लिए यह नई बात नहीं कि वह दूसरी भाषाओं से हिन्दी में अनूदित पुस्तकों के लोकार्पण का आयोजन करे। इससे पहले भी उर्दू, अंग्रेज़ी और पंजाबी से हिन्दी में अनूदित पुस्तकों पर विशेष कार्यक्रम आयोजित करके इन पुस्तकों पर विशेष बातचीत की गई है। भाषाओं के आपसी सम्मिलन के इसी महोत्सव की एक कड़ी थी यह संग्रह! इस संग्रह पर बातचीत करने के लिए हिन्दी और पंजाबी के कई विद्वान इस अवसर पर उपस्थित थे। कुछ विद्वान भारत से भी आये हुए थे।

कार्यक्रम का प्रारंभ चाय और जलपान से हुआ जिसका आयोजन परमजीत जी ने किया था। इसके बाद कार्यभार सँभाला इस गोष्ठी की संचालिका श्रीमती कृष्णा वर्मा जी ने। उन्होंने सबसे पहले भारत से आये हुए कुलविंदर खैरा जी को इस संग्रह पर बोलने के लिए आमंत्रित किया। कुलविंदर जी ने कहा कि “कविताएँ कई तरह की होती हैं पर उनके मुख्यत: दो प्रकार होते हैं: फ़िक्र की कविता और संवेदना की कविता”! परमजीत जी की अनेक कविताओं के उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि “इन कविताओं में फ़िक्र और संवेदना दोनों ही हैं और औरत की त्रासदी से जुड़े गहरे अहसास हैं। फ़ेमनिज़्म यहाँ नारेबाज़ी नहीं बल्कि सहजता से गहरी बात करते हुए आता है, कई कवितायें अपनी छाप छोड़ती हैं जैसे चिडिया, लिहाफ, चूड़ियाँ, औलाद आदि!”

इसके बाद परमजीत जी को अपनी रचनाओं के पाठ के लिए आमंत्रित किया गया। उन्होंने अलग-अलग भाव की कुछ कविताएँ दर्शकों के समक्ष रखीं जिनमें "मछलियाँ", "पानी के बुलबुलों को बार-बार पकडूँगी" को श्रोताओं ने बहुत सराहा।

"दिशा" संस्था की अध्यक्षा डॉ. कुलविंदर ढिल्लों ने परमजीत जी की रचना यात्रा पर प्रकाश डालते हुए बताया कि "२०११ में सबसे पहले परमजीत ने कविता लिखना शुरू किया था जो अब तक चल रहा है।" मंचों की सार्थक भूमिका को बताते हुए उन्होंने कहा कि "मंच प्रस्तुतियों से लेखक का आत्मविश्वास बढ़ता है और यह परमजीत का सौभाग्य है कि उन्हें अपनी रचनाओं को प्रस्तुत करने के लिए पंजाबी और हिंदी के मंच कई बार मिले। औरत की संवेदना से जुड़े कई भावों को इन कविताओं में प्रस्तुत किया गया है, "घर" कविता की विशेष चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि इस विषय पर प्राय: सभी लेखिकाएँ लिखती हैं। इस काव्य-संग्रह के अनुवादक श्री सुभाष नीरव जी की प्रशंसा करते हुए उन्होंने कहा कि ये कविताएँ पंजाबी की नहीं बल्कि हिंदी की ही लगती हैं। उन्होंने "दिशा" की ओर से एक सर्व-भाषीय लिटरेचर फ़ेस्टिवल करने का आह्वान किया।

तत्पश्चात रिंटु भाटिया ने परमजीत जी के बारे में बताते हुए कहा कि वे बहुत उदार महिला हैं और स्नेहपूर्ण कविताएँ ऐसी रचती हैं जैसे मृग की नाभि से कस्तूरी लाना! वे कविताओं का अपने बच्चों की तरह लालन-पालन करती हैं। रिंटु जी ने परमजीत जी की "ज़रूरी" कविता पढ़ी और उनके लिखी ग़ज़ल के शेर गाए।

इसके बाद सुमन घई जी ने सुभाष नीरव जी के अनुवाद की प्रशंसा करते हुए कहा कि अनुवाद का कार्य  सरल नहीं पर सुभाष जी ने यह कार्य बहुत अच्छी तरह किया है। परमजीत की छोटी-छोटी कविताओं में भाषा की शक्ति को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि यहाँ पंक्तियों के बीच के मौन में भी कविता का भाव बोलता हुआ दिखाई देता है। परमजीत की रचना-प्रक्रिया को औलाद, तलाश और स्व-संवेदना के तीन हिस्सों में बाँट कर देखते हुए सुमन जी ने कई कविताओं के उदाहरण दिए और इस काव्य-संग्रह में संकलित कविताओं के व्यापक परिप्रेक्ष्य की चर्चा की।
आशा बर्मन जी ने इस संग्रह की कविताओं की बिहारी की कविताओं से तुलना करते हुए कहा कि "ये देखन में छोटे लगें, घाव करें गंभीर" की विशेषताएँ लिए हुए हैं। इस संग्रह में लिखी भूमिका में भावों की गहनता और भाषा के सौन्दर्य की भी उन्होंने चर्चा की।

श्री रामेश्वर हिमांशु "काम्बोज" जी किन्हीं अपरिहार्य कारणों से अनुपस्थित थे परन्तु उन्होंने अपनी समीक्षा लिख कर भेजी थी। उन्होंने परमजीत जी की कविताओं को मनोजगत के दरवाज़े खोलती हुई कविताएँ कहा जो मन के अंदर झाँकती हैं। इन रचनाओं में हर चीज़ और संबंध को गहराई से देखने की प्रवृति और उसी तरह की गहन अभिव्यक्ति को उन्होंने विशेषत: रेखांकित किया। सुभाष जी के अनुवाद की प्रशंसा भी उन्होंने की।
इसके बाद डॉ. शैलजा सक्सेना ने उपस्थित लोगों को आने के लिए धन्यवाद देते हुए परमजीत जी की रचनाओं में निजी संवेदना के विषयों के अतिरिक्त उपस्थित सामाजिक चिन्ता और बदलते हुए समाज के विषय पर लिखी कविताओं की ओर ध्यान आकर्षित किया कि किस तरह परमजीत जी की रचनाएँ मन और समाज दोनों से गहराई से जुड़ी हुई हैं। 

इन चर्चाओं के बाद कृष्णा वर्मा जी ने परमजीत जी को अपनी रचना-प्रक्रिया पर बात करने के लिए बुलाया। अपने भावनात्मक वक्तव्य में परमजीत जी ने कहा कि न जाने कितने ही दुख, विचार और दृश्य उनके मन में दबे हुए हैं और वही काग़ज़ पर समय-समय पर उतर आते हैं।
इसके बाद इस गोष्ठी के स्वरचित रचनाओं की प्रस्तुति के दूसरे सत्र को प्रारंभ करते हुए कृष्णा जी ने भारत से पधारी दिल्ली विश्वविद्यालय के हिन्दू कॉलेज की एसोसिएट प्रोफ़ेसर डॉ. विजया सती जी को आमंत्रित किया। उन्होंने गोष्ठी में अपनी उपस्थिति पर प्रसन्नता जताते हुए कहा कि उन्हें कनाडा में इतने समृद्ध साहित्य के होने का पता नहीं था, अब वे इस पर एक लेख लिखेंगी। उन्होंने अपनी एक कविता "बातचीत अपने आप से" भी इस अवसर पर सुनाई। तत्पश्चात दिल्ली विश्वविद्यालय के खालसा कॉलेज में पंजाबी भाषा और साहित्य की प्राध्यापिका डॉ. कुलदीप पाहवा ने अपनी रचना "समय" का पाठ किया, और साथ ही सुरिन्दरजीत कौर, निर्मल सिद्धू, वरिष्ठ सदस्या कैलाश महंत जी, हरविंदर जी, अखिल भंडारी, प्रमिला भार्गव, नरेन्द्र ग्रोवर और प्रीति अग्रवाल ने अपनी भाव और विचारपूर्ण रचनाओं की प्रस्तुति से दर्शकों का मन जीत लिया। 
कार्यक्रम सुन्दर कविताओं की चर्चा के रचनात्मक आनंद के वातावरण में संपन्न हुआ।  

प्रस्तुति - डॉ. शैलजा सक्सेना 

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06 Jun 2019
वियतनाम में आयोजित अंतरराष्ट्रीय हिन्दी उत्सव में डॉ. रवीन्द्र प्रभात के नेतृत्व में हिस्सा लिया 55 सदस्यीय भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने

वियतनाम में आयोजित अंतरराष्ट्रीय हिन्दी उत्सव में डॉ. रवीन्द्र प्रभात के नेतृत्व में हिस्सा लिया 55 सदस्यीय भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने

भारतीय महावाणिज्य दूतावास हो ची मिन्ह सिटी वियतनाम, भारतीय व्यापार कक्ष वियतनाम और प्रमुख भारतीय संस्था परिकल्पना के संयुक्त तत्वावधान में विगत 26 और 27 मई 2019 को हो ची मिन्ह सिटी वियतनाम के स्थानीय क्लब हाउस एवं एलीओस सभागार में आयोजित अंतरराष्ट्रीय हिन्दी उत्सव में लखनऊ के वरिष्ठ साहित्यकार और हिन्दी के मुख्य ब्लॉग विश्लेषक डॉ. रवीन्द्र प्रभात के नेतृत्व में 55 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम की अध्यक्षता वियतनाम में भारत के कार्यवाहक प्रधान कौन्सुल श्री जे. सी. कंदपाल ने की और संचालन किया पी पी एस टू कौन्सुल जनरल एवं कम्यूनिटी वेलफेयर ऑफिसर, भारत का प्रधान कौंसुलावास, हो ची मिन्ह सिटी, वियतनाम, श्री आर. एस. चौहान ने। साथ ही मंचासीन रहे भारतीय व्यापार कक्ष, हो ची मिन्ह सिटी वियतनाम के उपाध्यक्ष श्री मुनीश गुप्ता, राष्ट्रीय विश्वविद्यालय वियतनाम के हिन्दी विभागाध्यक्ष,श्रीमती साधना सक्सेना, ऑस्ट्रेलिया से आए चिकित्सक एवं समाजसेवी, डॉ. राहुल गुप्ता एवं लखनऊ से प्रकाशित हिन्दी मासिक परिकल्पना समय के प्रधान संपादक डॉ. रवीन्द्र प्रभात।


हिन्दी भाषा की विविधता, सौन्दर्य, डिजिटल और अंतराष्ट्रीय स्वरुप को विगत 10 वर्षों से वैश्विक मंच पर प्रतिष्ठापित करती आ रही लखनऊ की संस्था परिकल्पना के द्वारा नयी दिल्ली, लखनऊ, नेपाल, भूटान, श्रीलंका, थाईलैंड, न्यूजीलैंड, सिंगापुर, मलेशिया, इन्डोनेशिया और मॉरीशस के बाद इस वर्ष 11 वां अंतरराष्ट्रीय हिन्दी उत्सव 26 मई से 2 जून तक वियतनाम और कंबोडिया के विभिन्न शहरों क्रमश: हो ची मिन्ह सिटी, कैन थो, चाऊ डॉक, नोम फेनह और सिम रीप में किया गया। पहले दिन का उदघाटन सत्र भारतीय महावाणिज्य दूतावास (वियतनाम), परिकल्पना (भारत) और इंडियन बिजनेस चैंबर इन वियतनाम के संयुक्त तत्त्वावधान में दिनांक 26 मई को कलब हाउस हो ची मिन्ह सिटी में आयोजित किए गए। दूसरे दिन का कार्यक्रम एलीओस सभागार हो ची मिन्ह सिटी में आयोजित हुआ जिसके प्रयोजक थे परिकल्पना (भारत) और इंडियन बिजनेस चैंबर इन वियतनाम। इसी प्रकार लघुकथा और हाइकू पर केन्द्रित कार्यक्रम सैम सीएम रीप सभागार सीम रीप कंबोडिया में तथा समापन इकोटेल सभागार बैंकॉक में हुआ, जिसके प्रयोजक थे परिकल्पना (भारत) और माधवी फाउंडेशन। 

आठ दिनों तक चले इस उत्सव में कार्यवाहक प्रधान कौन्सुल द्वारा उदघाटन उद्बोधन, भारतीय अध्ययन विभाग, सामाजिक विज्ञान और मानविकी विश्वविद्यालय वियतनाम के छात्रों द्वारा नृत्य प्रदर्शन, लखनऊ से प्रकाशित परिकल्पना समय मासिक पत्रिका के प्रधान संपादक डॉ. रवीन्द्र प्रभात का उद्बोधन, 21 हिन्दी पुस्तकों का विमोचन, जिसमें प्रमुख थी हिन्दी समाचार पत्रों पर वैश्वीकरण का प्रभाव: डॉ. अलका चौधरी, जीवन गीत और माटी (काव्य संग्रह): डॉ. रमाकांत तिवारी  "रामिल", बूंद बूंद से घट भरे: डॉ. सुषमा सिंह, मुखर मौन: राम किशोर मेहता, शिवसागर दोहावली: शिव सागर शर्मा, नदी को बहने दो (काव्य संग्रह) एवं खोलो द्वार सफलता के (निबंध: डॉ. मीना गुप्ता, विन्यास: डॉ. चम्पा श्रीवास्तव, ड्रेस, ड्रिंक, फूड मेड हिस्ट्री: डॉ. अनीता श्रीवास्तव, ओढ़ी हुयी मुस्कान: डॉ. रेखा कक्कड़, इंद्रधनुष जीवन के और मरुस्थल का संगीत (काव्य संग्रह): डॉ. प्रभा गुप्ता, डॉ. ओंकारनाथ द्विवेदी द्वारा संपादित अभिदेशक पत्रिका का चौथे अंक, शीला पाण्डेय द्वारा संपादित साहित्यगंधा पत्रिका का महिला नवगीतकर विशेषांक,परों को तोल (नवगीत) एवं समय के घेरे (निबंध): शीला पाण्डेय, रवीन्द्र प्रभात द्वारा संपादित परिकल्पना समय (हिन्दी मासिक) का मई अंक, सत्या सिंह का काव्य संग्रह  "मेरी अग्निवीणा", डॉ. अमोल रॉय की पुस्तक  "लोकजीवन में संस्कार और संस्कार गीत" तथा डॉ. सतीश चन्द्र शर्मा  "सुधांशु" की पुस्तक  "मिथिलेश दीक्षित का काव्य चिंतन एवं विमर्श"। इसके अलावा भारतीय टेलीविजन की चर्चित कलाकार डॉ. प्रतिमा वर्मा (इलाहावाद), राजीवा प्रकाश एवं कुसुम वर्मा (लखनऊ) द्वारा मंचित नाटक की प्रस्तुति, श्रीमती साधना सक्सेना, भारतीय हिन्दी शिक्षक, भारतीय अध्ययन विभाग,सामाजिक विज्ञान और मानविकी विश्वविद्यालय के द्वारा वियतनाम में हिन्दी प्रचार-प्रसार गतिविधियों पर टिप्पणी, अवधी लोकगायिका श्रीमती कुसुम वर्मा के द्वारा लोकगायन व नृत्य की प्रस्तुति तथा वियतनाम में हिन्दी पढ़ रहे छात्रों से विशेष संवाद भी किया गया। 

इसके अलावा श्रीमती कुसुम वर्मा (लखनऊ) तथा डॉ. रेखा कक्कड़ (आगरा) की कला प्रदर्शनियों के साथ-साथ श्रीमती आभा प्रकाश (लखनऊ) की एम्ब्रायडरी कला और पुस्तक प्रदर्शनियों के लोकार्पण के साथ-साथ डॉ. राम बहादुर मिश्र और श्रीमती कुसुम वर्मा को परिकल्पना का अंतरराष्ट्रीय शीर्ष उत्सव सम्मान एवं भारतीय मूल की वियतनामी हिन्दी सेवी श्रीमती साधना सक्सेना एवं वियतनामी मूल के हिन्दी सेवी फेन दिन हयूयांग को परिकल्पना सम्मान प्रदान किए गए। वहीं भारत से पधारे 55 साहित्यकारों का  "परिकल्पना" द्वारा, चार साहित्यकारों का  "माधवी फाउंडेशन" के द्वारा,  "रेयान मंच" की ओर से चार साहित्यकारों का तथा साहित्यिक संस्था  "साहित्य धारा" द्वारा पाँच साहित्यकारों का सारस्वत सम्मान भी किया गया। इसके अतिरिक्त उत्तर प्रदेश की संस्था अवध भारती संस्थान की ओर से रजत जयंती वर्ष के उपलक्ष्य में चार साहित्यकारों का सम्मान किया गया। साथ ही कई शहरों में परिचर्चा सत्र और कवि सम्मेलन भी आयोजित हुये।

इस अवसर पर परिकल्पना समय के प्रधान संपादक डॉ. रवीन्द्र प्रभात ने कहा कि "हमारी आने वाली पीढ़ी इस सुगन्धित वातावरण से गुलज़ार रहेगी। विश्व के सभी देशों में चाहे वह अमेरिका हो या अफ्रीका, क्षेत्रीय लोकभाषाओं की मृत्यु के भयानक आँकड़े मिलते हैं। इन्हीं सब घटनाओं ने मुझे हिन्दी उत्सव के आयोजन को एक मूर्त रूप देने की सार्थक दिशा दी। यह ग्यारहवाँ हिन्दी उत्सव हिन्दी भाषा को और समृद्ध करने की रचनात्मक पहल है। हम चाहते हैं कि हिन्दी भाषी समाज के साथ-साथ ही आप भारतीय भाषाओं के साथ भी जुड़ें और भाषायी विकास को रोशन करें।"

वियतनाम में भारत के प्रधान कौंसुल श्री जे सी कंदपाल ने कहा, कि "यह हिन्दी उत्सव भाषा और साहित्य की तकनीकी प्रगति को समर्पित है। हिन्दी उत्सव वह स्थान है जहाँ हम हिन्दी के प्रति अपनी प्रतिबद्धताओं का प्रदर्शन करते हैं, बिना किसी प्रकार का संकोच किये। और यह स्थान वह भी है जहाँ से हम हिन्दी भाषा और साहित्य से गैर हिन्दी भाषियों को अवगत कराते है।"

वियतनाम में भारतीय व्यापार कक्ष के उपाध्यक्ष श्री मुनिश गुप्ता ने कहा कि "हिन्दी उत्सव के आयोजन के माध्यम से हम वियतनाम की सक्रिय संस्थाओं को एक मंचप्रदान करने जा रहे हैं। इस आयोजन से यहाँ के हिन्दी लेखकों, शिक्षकों और विद्यार्थियों को प्रेरणा और मनोबल मिलेगा। वियतनाम में हिन्दी उत्सव का आयोजन विभिन्न शहरों में हो रहा है जिससे हम अधिक से अधिक लोगों तक पहुँच सकें और हिन्दी का व्यापक प्रचार कर सकें।"

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05 Jun 2019
जल है तो कल है - हिन्दी राइटर्स गिल्ड की मई मासिक गोष्ठी

जल है तो कल है - हिन्दी राइटर्स गिल्ड की मई मासिक गोष्ठी

मई 11, 2019 को ब्रैम्पटन लाइब्रेरी की स्प्रिंगडेल शाखा में हिन्दी राइटर्स गिल्ड की मासिक गोष्ठी का आयोजन सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ। यह गोष्ठी विशेष थी क्योंकि पहले सत्र की विशेष अतिथि वक्ता डॉ. रोमिला वर्मा थीं जो यूनिवर्सिटी ऑफ़ टोरोंटो में प्राध्यापक एवं वैज्ञानिक (हाइड्रॉलोजिस्ट) हैं। वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ताज़े पानी के गिरते स्तर और अभाव के प्रति लोगों में जागरूकता लाने के लिए अनेक स्तरों पर प्रयत्नशील हैं।

कार्यक्रम का आरम्भ डॉ. शैलजा सक्सेना ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि माँ समान प्रकृति का देय अतुलनीय है और प्राकृतिक सम्पदा के दुरुपयोग के प्रति हमें सचेत रहा चाहिए। उन्होंने अगले दिन आने वाले मदर्स डे की अग्रिम बधाई भी सभी माताओं को दी। डॉ. शैलजा सक्सेना ने डॉ. रोमिला वर्मा का परिचय देते हुए उन्हें आमंत्रित किया कि वह विशेष प्रस्तुति उपस्थित जनों के समक्ष दें।

अपनी प्रस्तुति को आरम्भ करने से पहले रोमिला जी ने कैनेडावासियों को विशेषत: कैनेडा के मूलनिवासियों को धन्यवाद दिया कि आज हम उन्हीं के कारण यहाँ खड़े हैं। उन्होंने अपनी गत दिनों में की भारत यात्रा के अनुभवों को साझा करते हुए जहाँ एक और चौंकाने वाले वैज्ञानिक आंकड़े बताये कि किस तरह से ताज़े जल के अभाव के दुष्परिणाम दिखने आरम्भ हो चुके हैं, दूसरी ओर राजस्थान के एक छोटे से गाँव की भी बात की जहाँ सारी पंचायत महिलाओं की है और जिनके प्रशासन में किस तरह से छोटा सा गाँव पर्यावरण के प्रति दायित्वपूर्ण व्यवहार का उदाहरण बन रहा है।

डॉ. रोमिला की प्रस्तुति ऑडियो-वीडियो के माध्यम से बहुत प्रभावशाली रही। उन्होंने दिनकर जी कविता "जीवन की गति" को उद्धृत करते हुए कहा कि "जल चक्र सत्य है"। उन्होंने बताया कि विश्व में केवल एक प्रतिशत पेय जल है। विश्व के समक्ष छह मुख्य चुनौतियों को बताते हुए हुए उन्होंने गंगा के प्रदूषित हो जाने की समस्या की चर्चा की। डॉ. रोमिला वर्मा ने अपनी प्रस्तुति के अन्त में अपनी लघुकथा "गंगा का पुनर्जन्म" श्रव्य दृश्य माध्यम से प्रस्तुत की।

डॉ. शैलजा सक्सेना ने डॉ. रोमिला वर्मा का धन्यवाद करते हुए कहा कि लेखक विश्व की समस्याओं से जुड़ा होता है अत: अपने लेखन में उसे इन समस्याओं के समाधान के विकल्प और विचार भी प्रस्तुत करने की चेष्टा करनी चाहिए क्योंकि साहित्य समाज का दर्पण ही नहीं उसे सही दिशा में प्रेरित करने वाला भी होता है।

जलपान के लिए एक छोटे अंतराल के बाद गोष्ठी का दूसरा सत्र आरम्भ हुआ जिसमें स्वरचित रचनाएंँ सुनाई गईं।

इस सत्र के पहले कवि थे श्री अखिल भंडारी। उन्होंने पानी के विषय पर ही अपनी ग़ज़ल प्रस्तुत की - 'किस किस को ले डूबा पानी/पानी आख़िर निकला पानी'। अगले कवि डॉ. नरेन्द्र ग्रोवर थे, अपनी कविता में उन्होंने जीवन की अच्छी - बुरी सभी परिस्थितियों के लिए व्यक्ति को स्वयं ज़िम्मेदार ठहराते हुए पढ़ा; 'मेरे जीवन में हर निर्णय मेरा था'। श्रीमती प्रमिला भार्गव ने इंटरनेट से प्राप्त किसी अनजान कवि की कविता सुनाई, पंक्तियाँ थीं - मैं पानी हूँ आपकी आँखों का पानी। अगले कवि श्री बाल कृष्ण शर्मा थे उन्होंने जल के महत्व को दर्शाते आलेख का पाठ किया। श्री सतीश सेठी की कविता "झील कुछ कह रही है" थी। श्रीमती आशा मिश्रा जो अभी तक केवल श्रोता रही हैं, ने अपनी पहली कविता में पानी के विभिन्न रूपों का वर्णन करते हुए कहा "जीवन का आधार हूँ पर हूँ पानी"। श्रीमती पूनम चन्द्रा मनु की कविता विशेषरूप से भावपूर्ण रही। उनके प्रतीक और उनकी अभिव्यक्ति सदा की तरह अनूठी थी "बारिश को बाँध कर रोशनाई की जगह/ भर लिया था मैंने दवात में/ बस उसीसे लिखा..."। श्रीमती आशा बर्मन ने अपनी हास्य कविता "सावन" में भारत के सावन के महीने और कैनेडा की वर्षा ऋतु के समकक्ष रखते हुए प्रभु से पूछा "सावन तो प्रभु अब आया/ उससे पहले ही पानी इतना क्यों बरसाया"। श्री रामेश्वर काम्बोज ’हिमांशु’ जी की कविता थी "मैं पानी हूँ मैं जीवन हूँ"। सुमन कुमार घई ने पर्यावरण के प्रभाव को दर्शाती कविता "इस बरस वह पेड़ टूट गया" सुनाई। श्री विजय विक्रान्त जी ने अपनी हास्य आलेख शृंखला की डायरी का अगला पन्ना "रिमोट की कहानी" सुनाई। श्रीमती कृष्णा वर्मा ने अपनी कोई रचना सुनाने की बजाय श्री रामेश्वर काम्बोज ’हिमांशु’ जी की बाल कहानी पुस्तक "हरियाली और पानी" की कहानी का पाठ किया। अन्तिम कवयित्री कार्यक्रम की संचालिका स्वयं डॉ. शैलजा सक्सेना थीं जिनकी कविता थी "कविता क्या दे सकती है"।

पर्यावरण और विशेषत: पानी पर आधारित इस विशेष गोष्ठी के माध्यम से हिंदी राइटर्स गिल्ड ने अपने तरीके से इस सन्दर्भ में जागरूकता लाने के प्रयासों में अपनी यह एक चेष्टा जोड़ी।

जलपान का प्रबन्ध श्रीमती इंद्रा वर्मा और डॉ. रोमिला वर्मा ने किया था, संस्था ने उनका धन्यवाद किया।

पूरी फोटो गैलरी के लिए लिए - हिन्दी राइटर्स गिल्ड मई २०१९ फोटो गैलरी को क्लिक करें।

- प्रस्तुति सुमन कुमार घई एवं डॉ. शैलजा सक्सेना

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01 Jun 2019
साहित्यकार त्रिलोक सिंह ठकुरेला सम्मानित

साहित्यकार त्रिलोक सिंह ठकुरेला सम्मानित

ब्रजभाषा साहित्य समिति, कोटा (राजस्थान) के तत्वावधान में दिनांक 18 मई 2019 को आयोजित माताश्री शान्ति देवी उपाध्याय स्मृति सम्मान समारोह 2019 के  अंतर्गत  कुण्डलिया  छन्द के सशक्त हस्ताक्षर  व वरिष्ठ साहित्यकार श्री त्रिलोक सिंह ठकुरेला  को महाप्रभु मंदिर के अधिष्ठाता आचार्य विनय कुमार गोस्वामी जी के आशीर्वाद, समारोह के अध्यक्ष वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. रघुनाथ मिश्र ‘सहज’, मुख्य अतिथि श्री अमित भटनागर  (ज़ोनल सेक्रेटरी NFIR नई दिल्ली, अध्यक्ष/मीडिया प्रभारी WCRMS जबलपुर & CRMS मुंबई), विशिष्ट अतिथि विकल्प कोटा इकाई के महासचिव, वरिष्ठ शायर श्री शकूर अनवर, बाल साहित्य के जाने-माने रचनाकार, वरिष्ठ साहित्यकार श्री भगवती प्रसाद गौतम, संस्था के संरक्षक श्री प्रताप  भानु सिंह, अध्यक्ष श्री शून्य आकांक्षी, महासचिव श्री कमलेश कमल, वेस्ट सेंट्रल रेलवे मजदूर संघ के मंडल अध्यक्ष श्री  गिरिराज यादव, मंडल सचिव श्री अब्दुल खलीक आदि की गरिमामयी उपस्थिति में माताश्री शान्ति देवी उपाध्याय स्मृति सम्मान - 2019, समारोह आयोजक श्री गया प्रसाद उपाध्याय जी द्वारा, वेस्ट सेंट्रल रेलवे मजदूर संघ, कोटा के सभागार में प्रदान किया गया।

उल्लेखनीय है कि साहित्यकार  त्रिलोक सिंह ठकुरेला को उनके साहित्यिक अवदान के लिए  पूर्व में भी राजस्थान साहित्य अकादमी सहित  देश की अनेक साहित्यिक संस्थाओं द्वारा पुरस्कृत और सम्मानित किया जा चुका है।

श्रीमती साधना ठकुरेला

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27 May 2019
टोरंटो में लिट फेस्टिवल
चित्र में बाएँ से दाएँ भारत से पधारे डॉ. सुनील शर्मा (मुख्य संपादक, सेतु, अँग्रेज़ी) श्री अखिल भंडारी, श्री सुमन घई (संपादक, साहित्य कुंज) डॉ. हंसा दीप, श्रीमती कोकिला शाह, धर्मपाल महेंद्र जैन (सभी टोरंटो), श्री अनुराग शर्मा (मुख्य संपादक, सेतु हिंदी, अमेर

टोरंटो में लिट फेस्टिवल

पिट्सबर्ग (अमेरिका) से हिंदी व अंग्रेज़ी भाषा में प्रकाशित होने वाली साहित्य मासिक पत्रिका सेतु द्वारा टोरंटो में लिट फेस्टिवल का सफल आयोजन किया गया। इस अवसर पर डॉ. सुनील शर्मा के कविता संग्रह इंटरसेक्शंस, श्री अनुराग शर्मा द्वारा संपादित काव्य संकलन पतझड़ सावन बसंत बहार एवं डॉ. हंसा दीप के उपन्यास ‘कुबेर’ का लोकार्पण हिंदी एवं अँग्रेज़ी के रचनाकारों की उपस्थिति में किया गया।

अमेरिका में हिंदी के पाठन की चुनौतियों पर सुश्री सोनिया तनेजा के वक्तव्य के साथ सर्वश्री स्कॉट थॉमस आउटलर, हीथ ब्रोघर, नरेंद्र भांगू, डॉ. सुनील शर्मा, शेरान बर्ग एवं संगीता शर्मा ने अँग्रेज़ी में एवं सर्वश्री अखिल भंडारी, सुमन घई, सरन घई, अजय गुप्ता, अनुराग शर्मा व धर्मपाल महेंद्र जैन ने हिंदी में रचना पाठ किया। रचनाकारों ने हिंदी एवं अँग्रेज़ी में लिखी जा रही आधुनिक कविता की प्रासंगिकता और भविष्य पर सार्थक बातचीत करते हुए द्विभाषी कार्यक्रमों में रचनात्मक सहयोग पर बल दिया। सुश्री संगीता शर्मा ने धन्यवाद ज्ञापन किया।

चित्र में बाएँ से दाएँ भारत से पधारे डॉ. सुनील शर्मा (मुख्य संपादक, सेतु, अँग्रेज़ी) श्री अखिल भंडारी, श्री सुमन घई (संपादक, साहित्य कुंज) डॉ. हंसा दीप, श्रीमती कोकिला शाह, धर्मपाल महेंद्र जैन (सभी टोरंटो), श्री अनुराग शर्मा (मुख्य संपादक, सेतु हिंदी, अमेरिका) एवं सुश्री शेरोन बर्ग (कनाडा)

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23 May 2019
डॉ. सुरंगमा यादव के आलेख संग्रह ’विचार प्रवाह’ का विमोचन

डॉ. सुरंगमा यादव के आलेख संग्रह ’विचार प्रवाह’ का विमोचन

महामाया राजकीय महाविद्यालय, महोना, लखनऊ में दिनांक 9 व 10 फरवरी 2019 को आयोजित राष्ट्रीय सेमिनार में डॉ. सुरंगमा यादव, असि प्रो. हिन्दी की पुस्तक ’विचार प्रवाह’ का लोकार्पण मुख्य अतिथि डॉ. राजीव कुमार पाण्डेय, क्षे़त्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी, लखनऊ(उ.प्र.) के कर कमलों द्वारा किया गया। इस पुस्तक में संकलित उच्च स्तरीय लेखों की विद्वत समाज द्वारा भूरि-भूरि प्रशंसा की गयी।

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23 May 2019
अमेरिका की फ़ोलसम नगरी ने मनाया हिंदी कवि का जन्मोत्सव

अमेरिका की फ़ोलसम नगरी ने मनाया हिंदी कवि का जन्मोत्सव

बायें - काव्य पाठ करते अभिनव शुक्ल दायें - सरस्वती वंदना करती दीप्ति शरण 

 

मई १८, २०१९, फ़ोलसम, कैलिफोर्निया, संयुक्त राज्य अमेरिका। कैलिफोर्निया की राजधानी साक्रामेंटो क्षेत्र की फॉल्सम नगरी के मेसॉनिक सेंटर सभागार में, लोकप्रिय हिंदी कवि अभिनव शुक्ल के चालीसवें जन्मदिवस के उपलक्ष्य में एक हिंदी कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में अभिनव शुक्ल को सैक्रामेंटो के साहित्यिक समाज की ओर से सम्मानित किया गया तथा कवियों ने चार घंटों तक श्रोताओं को अपनी कविताओं के रस से सराबोर किया।

मंच पर अभिनव की विभिन्न भाव भंगिमाएँ प्रदर्शित करता एक बैनर लगाया गया था, अभिनव के जीवन के विविध पड़ावों को दर्शाते चित्र एक प्रोजेक्टर पर प्रदर्शित करने हेतु फिल्म तैयार की गयी थी तथा पूरा सभागार सुरुचिपूर्ण तरीके से सजाया गया था। कवि सम्मेलन के प्रारम्भ में जय श्रीवास्तव ने अभिनव को जन्मदिन की बधाइयाँ देते हुए इस कार्यक्रम के विषय में बताया, उन्होंने यह भी बताया कि अभिनव को कवि सम्मेलन के उनके जन्मदिन के उपलक्ष्य में होने की जानकारी नहीं थी तथा यह सभी की ओर से अपने कवि को एक सर-प्राइज़ है। उन्होंने श्रोताओं का स्वागत किया तथा मंच की बागडोर संचालन हेतु कवि अभिनव शुक्ल के  हाथों में सौंप दी। अभिनव ने प्रथम सत्र के कवियों, मनीष श्रीवास्तव, चिंतन राज्यगुरु, जय श्रीवास्तव, अनिरुद्ध पांडेय तथा अतुल श्रीवास्तव को अपनी काव्य पंक्तियाँ समर्पित करते हुए मंच पर आमंत्रित किया। तदुपरांत दीप्ति शरण ने अपने सुमधुर स्वरों से सरस्वती वंदना प्रस्तुत कर कवि सम्मलेन को गरिमा प्रदान करी। प्रथम सत्र के अंत में मनीष श्रीवास्तव ने कवि अभिनव शुक्ल का विस्तृत परिचय दिया। उन्होंने अभिनव की पुस्तकों, एलबमों आदि के बारे में बताते हुए कहा कि संसार की सौ से अधिक संस्थाएं अभिनव का सम्मान कर चुकी हैं तथा अभिनव अनेक पत्रिकाओं के संपादन में सहयोग कर चुके हैं। अभिनव की सुमधुर घनाक्षरियों के संग उनके चुटीले व्यंग्यों पर बोलते हुए मनीष ने अभिनव के नियमित स्तम्भकार होने की बात भी श्रोताओं को बताई। अभिनव के वायरल हुए वीडियोज़ की चर्चा करते हुए उन्होंने अभिनव को जन्मदिन की शुभकामनाएं दीं तथा मुख्य काव्य पाठ के लिए आमंत्रित किया। भावविभोर होते हुए अभिनव ने कहा कि हमारी संस्कृति में सृजन के प्रति सम्मान का भाव होने के चलते ही इस कार्यक्रम की उत्पत्ति हुई लगती है क्योंकि वे स्वयं को इस सम्मान हेतु योग्य पात्र नहीं समझते हैं। अभिनव ने इस आयोजन के लिए सभी आयोजकों को धन्यवाद देते हुए अपनी हास्य कविताओं का पाठ किया। कार्यक्रम के दूसरे सत्र में अर्चना पांडा, शोनाली श्रीवास्तव तथा शिवेश सिन्हा ने अपनी रचनाओं का पाठ किया।

अधिकांश कवियों ने सामाजिक विसंगतियों पर चुटीले प्रहार किए। चिंतन ने भारत में ट्रैफिक की स्थिति को भ्रष्टाचार से जोड़ती हुई कविता पढ़ी तो शिवेश ने अस्सी के दशक में टीवी एंटीने को सही दिशा में रखने वाले छोटे भाई का दायित्व निभाने पर एक कविता सुनाई। अर्चना पांडा ने बच्चियों पर होने वाले अत्याचारों पर कविता सुनाई तथा अनिरुद्ध पांडेय ने भारतीय वायुसेना के कैप्टन अभिमन्यु पर कविता सुनाई जिन्हें बहुत पसंद किया गया। जय श्रीवास्तव ने सोशल मीडिया पर चुटकियां लीं तथा अतुल श्रीवास्तव ने संसार के पार को संसार से जोड़ती रचना सुनाई। मनीष और शोनाली ने होली के गीत पर एक मन-मोहक जुगलबंदी प्रस्तुत करी तथा अभिनव ने कार्यक्रम के सभी प्रायोजकों को धन्यवाद दिया तथा अपनी प्रसिद्ध रचना "पत्नी चालीसा" का पाठ किया जिसे श्रोताओं का भरपूर प्यार मिला।

कार्यक्रम से होने वाला सारा लाभ उड़ीसा में आए फ़ानी तूफ़ान से प्रभावित लोगों की रहतार्थ सेवा यूएसए द्वारा भेजा जा रहा है। जय श्रीवास्तव, शिवेश सिन्हा, ब्रह्म प्रकाश मोहंती, दिव्या, नम्रता, दीप्ति, स्मिता, परेश सिन्हा, प्रदीप मिश्रा, संतोष मिश्रा, सुनील कुमार, आशुतोष, प्रेम समेत अनेक साहित्य प्रेमियों ने इस कार्यक्रम के सफल आयोजन में सहयोग किया। कार्यक्रम के अंत में केक काटा गया तथा रात्रिभोज हुआ। अनेक भाषाओं में जन्मदिवस गीत गाते हुए, एक अमेरिकी नगरी ने अपने हिंदी कवि को जन्मदिन का अनमोल उपहार प्रदान किया।

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10 May 2019
ओमप्रकाश क्षत्रिय शब्द-निष्ठा सम्मान हेतु चयनित
रोचक विज्ञान बालकहानियों के संग्रह पर मिलेगा सम्मान

ओमप्रकाश क्षत्रिय शब्द-निष्ठा सम्मान हेतु चयनित

 

रतनगढ़ - आचार्य रत्नलाल विज्ञानुग की स्मृति में शब्दनिष्ठा सम्मान देशभर की प्रसिद्ध साहित्यिक प्रतिभा और उन की कृति के आधार पर चयनित रचनाकारों को पुरस्कार प्रदान किया जाता है। यह पुरस्कार दो वर्ग में विभाजित किया जाता है। एक वर्ग में पुस्तक की श्रेष्ठता के आधार पर और दूसरे वर्ग का पुरस्कार कहानी की श्रेष्ठता के आधार पर दिया जाता है। जिस में प्रथम वर्ग में 5500 रुपए, दूसरे वर्ग में 5100 रुपए और तृतीय वर्ग में 3100 रुपए की राशि के साथ शाल, श्रीफल, प्रमाणपत्र व प्रकाशित पुस्तक दे कर सम्मान पुरस्कृत किया जाता है। प्रत्येक वर्ग में दो-दो रचनाकारों का सम्मान किया जाता है।

संयोजक डॉ. अखिलेश पालरिया ने अपनी प्रेस विज्ञप्ति में 2019 के सम्मान की घोषणा की है। जिस में नीमच ज़िले के प्रसिद्ध बालसाहित्कार ओमप्रकाश क्षत्रिय 'प्रकाश' की कृति 'रोचक विज्ञान बालकहानियां' को तृतीय स्थान प्राप्त हुआ है। इस चयन फलस्वरूप आप को शब्द निष्ठा सम्मान कार्यक्रम में 3100 रुपए की नगद राशि, शाल, श्रीफल व प्रमाणपत्र आदि दे कर सम्मानित किया जाएगा। इस पुरस्कार हेतु चयनित होने पर साहित्यकार साथियों और इष्टमित्रों ने आप को हार्दिक बधाई दी। इन का कहना है कि यह नीमच क्षेत्र के लिए गौरव का विषय है। स्मरणीय है कि आप को गत वर्ष नेपाल प्रदेश 2 के मुख्यमंत्री लालबाबू राऊतजी द्वारा नेपाल- भारत साहित्य सेतु सम्मान-2018 से नेपाल के बीरगंज में सम्मानित किया गया था।

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08 May 2019
डॉ. गरिमा संजय दुबे के प्रथम कहानी संग्रह 'दो ध्रुवों के बीच की आस' का लोकार्पण

डॉ. गरिमा संजय दुबे के प्रथम कहानी संग्रह 'दो ध्रुवों के बीच की आस' का लोकार्पण

डॉ. गरिमा संजय दुबे के प्रथम कहानी संग्रह 'दो ध्रुवों के बीच की आस' का लोकार्पण

वामा साहित्य मंच की सुपरिचित, लोकप्रिय, युवा लेखिका डॉ. गरिमा संजय दुबे के प्रथम कहानी संग्रह "दो ध्रुवों के बीच की आस" का लोकार्पण एवं चर्चा संगोष्ठी दिनांक 28 अप्रैल 2019 प्रीतम लाल दुआ सभाग्रह, इंदौर में हुआ। समारोह में लेखक व प्रकाशक पंकज सुबीर, वरिष्ठ साहित्यकार मनोहर मंजुल व लेखिका ज्योति जैन ने पुस्तक पर चर्चा की। स्वागत भाषण संस्था की अध्यक्ष पद्मा राजेंद्र ने दिया। आत्मकथ्य में लेखिका ने अपनी रचना प्रक्रिया की जानकारी देते हुए अपनी कहानी में आधुनिक युग की समस्याओं को चित्रित करने की बात की। उन्होंने कहा, "युग बदला है तो समस्याएँ भी बदली हैं, इसलिए हल भी नए होने चाहिए। जीवन में संतुलन का समर्थन करती हूँ लेकिन अतिवाद से बचने का प्रयास रहता है, इसीलिए पुस्तक और एक कहानी का शीर्षक दो ध्रुवों के बीच की आस सूझा।"

ज्योति जैन ने पुस्तक पर अपने विचार रखते हुए कहा, "गरिमा के प्रथम कहानी संग्रह दो ध्रुवों के बीच की आस के प्रथम प्रयास में उनकी कहानियों की परिपक्वता अचंभित करती है।" 

वरिष्ठ पत्र लेखक व साहित्यकार मनोहर मंजुल ने अपने वक्तव्य में कहानियों पर चर्चा करते हुए कहा, "गरिमा की कहानियाँ समाज के विभिन्न दृष्टिकोणों को प्रस्तुत करती हैं। उसकी लेखनी समाज के प्रति उसके दायित्व का बोध कराती है।"

प्रकाशक व लेखक पंकज सुबीर ने लेखिका के कहानीकार स्वरूप पर प्रकाश डालते हुए कहा, "गरिमा का पहला क़दम सधा हुआ और संतुलित है। इनकी कहानियों में विषयों का विस्तृत संसार है। कहानी संग्रह वही सफल होता है, जिसकी कहानियों के पात्रों की छटपटाहट औऱ बैचैनी पाठक अपने में महसूस करें । वही इनकी कहानियों में देखने को मिला है। कहानियों के विषय की विविधता चकित करती है, और गरिमा ने अपने पहले ही कहानी संग्रह से अपने लिए एक बड़ी रेखा खींची है जिसके आगे बहुत और बहुत सी श्रेष्ठ कृतियों की अपेक्षा बढ़ गई है।" सुबीरजी ने कहा, "इंदौर के साहित्यिक कार्यक्रमों में समय की प्रतिबद्धता, कार्यक्रम के प्रति उत्साह, साहित्य की समय के साथ क़दमताल सीखने लायक़ है।

परिवार के प्रतिनिधि के रूप में डॉ. दीपा मनीष व्यास नेअपने वक्तव्य में गरिमाजी के लिखने से छपने के सफ़र की रोचक और गंभीर चर्चा की।

पंकज सुबीर ने "अब मैं सो जाऊँ", "पन्ना बा" व "जीवन राग" कहानियों के बारे में बात करते हुए कहा कि अब मैं सो जाऊँ आपको बेचैन कर देती है। पन्ना बा में किन्नर जीवन की व्यथा का वर्णन है, और जीवन राग में जीवन की छोटी-छोटी ख़ुशियों व साकार रागात्मकता की बात है। ज्योति जैन ने कहा कि, लिव इन, किन्नर, डूब विषयों पर लेखिका की कहानियाँ गहरे से प्रभावित करती हैं और कहानियों की परिपक्वता व विषयों की विविधता चकित करती है।

इस अवसर पर पारिवारिक मित्रों और संबंधियों के अलावा वरिष्ठ साहित्यकार सरोज कुमार, संजय पटेल, जवाहर चौधरी, सूर्यकांत नागर, डॉ. पद्मा सिंह, सतीश राठी, पुरुषोत्तम दुबे, अश्विनी दुबे,  हरेराम वाजपेयी, प्रदीप नवीन, अशोक शर्मा, सुषमा दुबे समेत नगर के सभी साहित्यकार मौजूद थे। 

अतिथियों का स्वागत मदनलाल दुबे, शांता पारिख, सुभाष चंद्र दुबे, मीनाक्षी रावल, मनीष व्यास तथा भावना दामले ने किया।

सरस्वती वंदना संगीता परमार ने प्रस्तुत की। 

कार्यक्रम का संचालन अंतरा करवड़े ने किया व आभार वसुधा गाडगिल ने माना।

सतीश राठी
आर 451, महालक्ष्मी नगर,
इंदौर452010

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08 May 2019
आचार्य निरंजननाथ पुरस्कारों की घोषणा
पंकज सुबीर सीहोर (म.प्र.), ओम नागर मुम्बई, तथा डॉ. गोपाल सहर कपड़वंज (गुजरात) को

आचार्य निरंजननाथ पुरस्कारों की घोषणा

राजसमन्द 6 मई 2019 -

आचार्य निरंजननाथ स्मृति संस्थान द्वारा रविवार को इस वर्ष के पुरस्कारों की घोषणा कर दी गई। इस बार पुरस्कार उपन्यास, कविता तथा कहानी विधा पर केंद्रित थे। पुरस्कार समिति के संयोजक क़मर मेवाड़ी के अनुसार इस वर्ष यह पुरस्कार सुप्रसिद्ध कथाकार, उपन्यासकार और सम्पादक पंकज सुबीर को उनके उपन्यास 'अकाल में उत्सव' पर, सुप्रसिद्ध कवि ओम नागर को उनके कविता संग्रह 'विज्ञप्ति भर बारिश' पर तथा ख्यातनाम कथाकार डॉ. गोपाल सहर को उनके कथा संग्रह 'हवा में ठहरा सवाल' पर प्रदान किए जाएँगे। तीनों पुरस्कारों की राशि इक्कीस-इक्कीस हज़ार रुपये के साथ शाल, प्रशस्ति पत्र एवं स्मृति चिन्ह भेंट किया जायगा। समारोह 9 जून 2019 रविवार को प्रातः दस बजे गाँधी सेवा सदन राजसमन्द में आयोजित होगा। निर्णायक मण्डल के अध्यक्ष कर्नल देशबन्धु आचार्य की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में कथाकार माधव नागदा तथा डॉ. नरेन्द्र निर्मल की महत्त्वपूर्ण भागीदारी रही।

प्रेषक
क़मर मेवाड़ी
संयोजक
आचार्य निरंजननाथ सम्मान समिति 
कांकरोली, राजसमन्द (राजस्थान)

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19 Apr 2019
मानवता की प्रबल वकालत की है प्रदीप श्रीवास्तव ने : शिवमूर्ति 

मानवता की प्रबल वकालत की है प्रदीप श्रीवास्तव ने : शिवमूर्ति 

प्रदीप श्रीवास्तव की कहानियाँ नव उदारवाद, उदारवाद और भूमंडलीकरण की कहानियाँ हैं : हरिचरण प्रकाश 

यूपी प्रेस क्लब, लखनऊ में 7 अप्रैल 2019 को प्रदीप श्रीवास्तव के कहानी संग्रह 'मेरी जनहित याचिका एवं अन्य कहानियां' पर एक परिचर्चा का आयोजन भारतीय जर्नलिस्ट परिषद, अनुभूति संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ कथाकार श्री शिवमूर्ति ने कहा कि, "सारे नियम क़ानून से ऊपर है मानवता और इस मानवता की प्रबल वकालत की है प्रदीप श्रीवास्तव ने लेकिन अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर वह देश की वसुधैव कुटुंबकम की भावना को पीछे छोड़ देते हैं।" श्री शिवमूर्ति ने संग्रह की कहानियों की पठनीयता की बात करते हुए कहा कि, "लम्बी कहानियों के बावजूद प्रभावशाली भाषा, रोचकता इतनी है कि आप एक बार कहानी पढ़ना शुरू करेंगे तो बीच में छोड़ नहीं पायेंगे, आख़िर तक पढ़ते चले जायेंगे।" संग्रह की "बिल्लो की भीष्म प्रतिज्ञा" कहानी का विशेष रूप से उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि "महिलाओं को यह कहानी अवश्य ही पढ़नी चाहिए।" उन्होंने "घुसपैठिये से आखिरी मुलाकात के बाद" कहानी का भी ख़ासतौर से उल्लेख किया। 

वरिष्ठ साहित्यकार श्री हरि चरण प्रकाश ने संग्रह पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि, "भूमंडलीकरण ने पूँजीवाद के व्यभिचार को और बढ़ाया है। प्रदीप श्रीवास्तव की कहानियाँ नव उदारवाद, उदारवाद और भूमंडलीकरण की कहानियाँ हैं। मैं प्रदीप की कहानिओं को आत्म स्वीकारोक्ति शैली की कहानी कहना चाहूँगा।"

 

 प्रदीप श्रीवास्तव ने अपनी कहानियों के बारे में बताया कि यह कहानियाँ शहरी निम्न मध्यवर्गीय ज़िंदगी की मुख्यतः नकारात्मक स्थितियों का बयान हैं। दरअसल भूमंडलीकरण ने हिंदुस्तानी समाज को अपनी गिरफ़्त में ले लिया है। विकास और बौद्धिकता की आँधी में मानव मूल्य तिरोहित होते जा रहे हैं। लेकिन हमें सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ते रहना है। तेज़ी से विकसित हो रही टेक्नोलॉजी मानव को निकट भविष्य में कई ग्रहों तक ले जाने में सक्षम होगी, इस आधार पर मैं वसुधैव कुटुंबकम के विचार को और आगे ले जाते हुए ब्रह्मांड कुटुंबकम के विचार को प्रस्तुत करता हूँ। सारी दुनिया से इस पर चिंतन मनन का आग्रह करता हूँ। मेरी जनहित याचिका कहानी का पात्र इस बिंदु पर पूरी गंभीरता से बात करता है। प्राणी मात्र के सुंदर खुशहाल जीवन के लिए हमें इस बिंदु पर गंभीरता से सोचना ही होगा। कार्यक्रम की संचालिका वरिष्ठ लेखिका डॉ. अमिता दुबे का मानना था कि, "प्रदीप की कहानियों में मानवीय मूल्यों की पुनर्स्थापना पर विशेष बल है। कहानी के पात्र समाज में परिवर्तन लाने के लिए प्रयासरत रहते हैं।" 

श्री प्रतुल जोशी का कहना था कि, "प्रदीप की कहानियों में चित्रात्मकता है।" वहीं श्री पवन सिंह ने कहा कि, "यह समय जनहित याचिकाओं के सहालग का है।" समापन भाषण देते हुए श्री प्रवीण चोपड़ा ने कहा, "साहित्य वही है जो समग्र समाज का हित सोचे। उसका उद्देश्य समाज की भलाई हो। कार्यक्रम में विख्यात साहित्यिक पत्रिका 'लमही' के संपादक श्री विजय राय, अनुभूति संस्थान के श्री धीरेन्द्र धीर एवं अन्य विशिष्ठजन उपस्थित थे।

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17 Apr 2019
राम तुम्हारा वृत्त स्वयं ही काव्य है…

राम तुम्हारा वृत्त स्वयं ही काव्य है…

हिन्दी राइटर्स गिल्ड की अप्रैल, 2019 मासिक गोष्ठी

 

’हिन्दी साहित्य में राम के विभिन्न रूप’ विषय पर इस शनिवार, 13 अप्रैल 2019 को हिन्दी राइटर्स गिल्ड ने अपनी मासिक गोष्ठी में एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया। रामनवमी के पावन अवसर पर हुई इस चर्चा में भाग लेने के लिए लगभग 40 लोग इस कार्यक्रम में उपस्थित थे। (हिन्दी राइटर्स गिल्ड की मासिक गोष्ठियाँ महीने के दूसरे शनिवार को 1:30 से 4:30 बजे तक स्प्रिंगडेल शाखा, ब्रैम्पटन में आयोजित होती हैं)

 कार्यक्रम का संचालन डॉ. शैलजा सक्सेना ने सँभाला और सभी उपस्थित लेखकों तथा श्रोताओं का स्वागत किया। उन्होंने रामनवमी तथा वैसाखी के पावन पर्वों की शुभकामनाएँ देते हुए भारत से पधारे वरिष्ठ साहित्यकार श्री रामेश्वर काम्बोज ’हिमांशु’ जी तथा गिल्ड से जुड़े नए हिन्दी प्रेमियों के प्रति विशेष आभार प्रकट किया। कार्यक्रम की रूपरेखा स्पष्ट करते हुए उन्होंने बताया कि आज दो सत्र होंगे। पहले सत्र में ’हिन्दी साहित्य में राम के विभिन्न रूप’ पर चर्चा होगी तथा दूसरे सत्र में रचनाएँ, गीत, ग़ज़लें आदि होंगी।

विषय की प्रस्तावना करते हुए डॉ. शैलजा ने मध्यकाल में तुलसी के सगुण राम और कबीर के निर्गुण राम के आकार-प्रकार में अंतर की अपेक्षा दोनों भक्त कवियों के प्रेम और समर्पण भाव की समानता को अधिक महत्त्वपूर्ण ठहराया। उन्होंने कबीर की राम यानी परमशक्ति राम के प्रति समर्पण की पराकाष्ठा को इस दोहे से रेखांकित किया: 

 “मैं तो कूता राम का, मुतिया मेरा नाँव। 
गले राम की जेवड़ी, जित खींचे तित जाँव”

मध्यकाल के बाद मैथिलीशरण गुप्त जी की ’साकेत’ और फिर निराला की ’राम की शक्तिपूजा’ की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि राम के भीतर आधुनिक मनुष्य की उद्भावना निराला ने की और राम से कहलवाया; ’धिक जीवन जो पाता ही आया विरोध/ धिक साधन जिसके लिए सदा ही किया शोध’! उन्होंने कहा कि राम द्वारा अपने जीवन को धिक्कार कर, अपने को साधनहीन कहने में एक आम आदमी की पीड़ा दिखाई देती है, सर्वशक्तिशाली भगवान की नहीं। राम के भीतर इसी मानवीयता को प्रश्न और संशय के रूप में श्री नरेश मेहता ने अपने काव्य ’संशय की एक रात’ में दिखाया है जहाँ राम, अपनी व्यक्तिगत समस्या, सीता-हरण पर एक पूरी सेना को मृत्यु की संभावना पर ले जाकर नहीं खड़ा करना चाहते । डॉ. शैलजा ने श्री नरेश मेहता द्वारा गढ़ी राम की मानवीय छवि की बात करते हुए डॉ. नरेन्द्र कोहली के रामकथा पर आधारित उपन्यास की भी चर्चा की जिसमें राम अद्भुत प्रबंधनकर्ता (मैनेजर) दिखाई देते हैं। सर्व-साधन संपन्न लंकेश्वर रावण से साधनहीन आदिवासी जनता को लड़ने के लिए की गई तैयारी को जिस बारीक़ी और गहराई से कोहली जी के राम सँभालते हैं, वह आज के ’मैनेजमेंट’ विद्यार्थियों के लिए भी उपयोगी है।     

आगे चर्चा को विस्तार देने के लिए उन्होंने सर्वप्रथम प्रसिद्ध साहित्यकार श्री रामेश्वर काम्बोज ’हिमांशु’ जी को आमंत्रित किया जिन्होंने श्री नरेश मेहता द्वारा लिखित ’प्रवाद पर्व’ को अपने वक्तव्य का केंद्र बनाते हुए कहा कि इस खंड काव्य में राम राज-नियमों की सत्ता के बीच राजा के बंधन और उससे उत्पन्न पीड़ा को प्रकट करते हुए एक आधुनिक मनुष्य के रूप में दिखाई देते हैं। वे पति रूप में सीता पर संदेह नहीं करते परन्तु राजा के आदर्श को स्थापित करने को भी अपना धर्म समझते हैं। राम जनमानस से उठी हर आवाज़ को ’अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता’ देना चाहते हैं, हर साधारण जन को भाषा का वह अधिकार देना चाहते हैं जो उन्हें कभी नहीं मिला चाहे इसके लिए उन्हें अपनी प्राण प्रिया को भी छोड़ना पड़े। राम राजा का यह दायित्त्व मानते हैं कि राजा व्यक्तिगत स्वार्थों और सुविधाओं से ऊपर उठा हुआ होना चाहिए। राम का कहना है:

 ’राजभवनों और राजपुरुषों से ऊपर/
राज्य और न्याय/
प्रतिष्ठापित होने दो भरत’

’हिमांशु’ जी के वक्तव्य ने दर्शकों को ’प्रवाद पर्व’ के ’पुराण पुरुष’ राम के लोकनायक रूप से जोड़ा और चर्चा को बहुमुखी बनाया।

 इसके बाद डॉ. इन्दु रायज़ादा जी ने राम पर अपने विचारों से अवगत कराया। साथ ही राम के पति रूप पर संशय जताते हुए मन में उठे कुछ प्रश्नों का ख़ुलासा भी किया। प्रश्न आज के विषय के अनुकूल न होने के कारण चर्चा से अछूते रह गए।

 अगली वक्ता श्रीमती आशा बर्मन जी ने अपने वक्तव्य का आधार ’श्रीरामचरित मानस’ को बनाया। उन्होंने तुलसी द्वारा भाव और भाषा, दोनों को तत्कालीन शास्त्रीय परिभाषाओं से निकाल कर जन-सामान्य से जोड़ने की प्रशंसा की। आशा जी ने कहा कि तुलसी के राम को पूजने के लिए किसी विधि-विधान की आवश्यकता नहीं, उनके राम जन-मन के राम हैं, जिनके लिए तुलसी कहते हैं:  

 ’तुलसी मेरे राम को, रीझ भजो या खीज।
भौम पड़ा जामे सभी, उल्टा सीधा बीज।’

 उनके बाद के वक्ताओं ने राम और उनके गुणों पर लिखित अपनी रचनाएँ तथा वक्तव्य प्रस्तुत किए। श्री सतीश सेठी ने रामराज्य पर रचना पढ़ी तो श्री विद्याभूषण ने अपनी रचना में धरती से आकाश, पौधों से जीव, राम को प्रत्येक वस्तु में विद्यमान बताया। श्री बाल कृष्ण ने राम नाम का महत्व बताते हुए राम धुन या ओम का सही उच्चारण पर बल दिया। श्रीमती प्रमिला भार्गव ने सीता-त्याग से असहमति व्यक्त करते हुए अपनी बात रखी। गिल्ड की सभा में पहली बार उपस्थित हुई श्रीमती अमरजीत कौर ’पंछी’ जी ने गुरुवाणी में राम नाम और भक्ति के महत्व बताते हुए एक सुंदर रचना का पाठ भी किया। श्री अनिल कुन्द्रा जी ने राम नाम के जाप की शक्ति का प्रमाण देते हुए परिवार में घटित सच्ची घटना से अवगत करवाया। श्रीमती कृष्णा वर्मा ने राम के प्रति अपने भाव प्रकट करते हुए कहा कि राम सत्य सनातन है, जीवन का मूल मंत्र हैं, प्रत्येक भोर का स्वर हैं, चरित्र, मर्यादा, शील, संयम और नैतिकता हैं। राम का अनुसरण ही जीवन का सच्चा अर्थ है।

इस कार्यक्रम में पुलिट्ज़र पुरस्कार से सम्मानित श्री बैरी ब्राउन भी, अपनी लोक-संपर्क अधिकारी श्रीमती रेनु मेहता के साथ उपस्थित थे। श्री बैरी ब्राउन ने एक किताब ’द वर्ल्ड बिफ़ोर रिलीजन, वार एंड इनैक्यैलिटी’ लिखी है जिसमें महाभारत के युद्ध को विश्व का पहला बड़ा युद्ध बताया है। उन्होंने अपने संक्षिप्त वक्तव्य में अपनी लंबी रिसर्च और उससे निकले तथ्यों के आधार पर कृष्ण वंशज यादवों से ही ज्यूज़ के होने और ब्राह्मण धर्म से ज्यूडिज़्म के होने को बताया। समय कम होने से वे अगली गोष्ठी में फिर आएँगे और दर्शकों के प्रश्नों के उत्तर भी देंगे।  

 कार्यक्रम के दूसरे सत्र में उन लोगों ने कविता पढ़ी जिन्होंने पहले सत्र में भाग नहीं लिया था। इस का प्रारंभ अखिल भंडारी जी की ग़ज़ल से हुआ जिसे बहुत पसंद किया गया:

’ये माना ज़िन्दगी तो एक सफ़र है
सफ़र में हैं मगर, जाना किधर है’

दूसरी वक्ता थीं, श्रीमती भुवनेश्वरी पांडे, जिन्होंने ’श्री रामचन्द्र कृपालु भज मन हरन भव भय दारुनम’ श्री राम की स्तुति का मधुर गायन किया। तत्पश्चात मन के विभिन्न पहलुओं की पर्तें खोलती सुरजीत कौर जी की कविता ’तपोवन’ ने मन को छू लिया। डॉ. नरेन्द्र ग्रोवर जी ने आज ही के दिन सौ वर्ष पहले घटी जलियाँ वाला बाग की घटना को याद करते हुए सुभद्रा कुमारी चौहान की कविता ’जलियाँवाला बाग में बसंत’ का पाठ किया। जिसकी पंक्तियाँ थीं:-

’कोमल बालक मरे यहाँ गोली खा कर
कलियाँ उनके लिए गिराना थोड़ी लाकर” 

श्रीमती पूनम चन्द्रा ’मनु’ ने अपनी कविता में रिश्तों के बदलते रूप की बात की:

"जाने ये रिश्ते क्यों चेहरा अपना बदल लेते हैं
भूल जाते हैं जिन्हें पल में ग़ैरों की तरह
वे ही नाम पत्थरों पर साथ लिखे मिलते हैं’

श्रीमती रिंकु भाटिया जी ने अपने मधुर स्वर में एक लोक गीत ’माँए मेरिए नी/ शिमले दी राहे/ चम्बा कितनी दूर’ का गायन कर सबको विभोर किया।

अंत में डॉ. शैलजा ने अपना एक हाइकु – ’लिख वक़्त के/ सीने पे विश्वास की/ नई लिखाई’ कहते हुए सबका धन्यवाद देकर कार्यक्रम का समापन किया।

बदलते मौसम का ख़ूबसूरत सुहाना दिन था। कार्यक्रम आत्मीय-संवाद पूर्ण होने से उपजे आनंद पूर्ण रहा, साथ ही इस पावन पर्व पर गर्मा-गरम चाय, समोसे, बर्फी, लड्डू तथा जलेबियों का सबने भरपूर आनंद उठाया। इस जलपान का प्रायोजन श्रीमती कैलाश महंत, मीनाक्षी सेठी तथा कृष्णा वर्मा ने किया था।  

- प्रस्तुति कृष्णा वर्मा एवं डॉ. शैलजा सक्सेना

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14 Apr 2019
‘प्रवासी हिंदी साहित्य : संवेदना के विविध संदर्भ’ विषयक द्विदिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी संपन्न

‘प्रवासी हिंदी साहित्य : संवेदना के विविध संदर्भ’ विषयक द्विदिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी संपन्न

मैसूर, 8 मार्च, 2019 -  प्रवासी हिंदी साहित्य का परिदृश्य वैश्विक बनता जा रहा है। हिंदी में रचे जा रहे प्रवासी साहित्य का अपना वैशिष्ट्य है जो उसकी संवेदना, परिवेश, जीवन दृष्टि तथा सरोकारों में दिखाई देता है। इसी कड़ी में कर्नाटक की पारंपरिक नगरी मैसूर के हिंदी अध्ययन विभाग, मैसूर विश्वविद्यालय, मानसगंगोत्री, मैसूर तथा केंद्रीय हिंदी संस्थान, आगरा के संयुक्त तत्वावधान में ‘प्रवासी हिंदी साहित्य : संवेदना के विविध संदर्भ’ विषयक द्विदिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी, मैसूर विश्वविद्यालय के बहादुर इंस्टीट्यूट ऑफ मेनेजमेंट के सभागार में आयोजित की गई। 

इस अवसर पर ब्रिटेन की प्रख्यात हिंदी लेखिका उषा राजे सक्सेना प्रमुख अतिथि रही। उद्घाटन भाषण में उन्होंने विदेशों में हिंदी साहित्य सृजन के परिवेश, स्वरूप, विषय-वस्तु, महत्वाकांक्षाओं और चुनौतियों पर प्रकाश डालते हुए कहा - “प्रवासी भारतीय रचनाकारों की लेखन-शैली, शब्द-संस्कृति, संवेदना, सरोकार और स्तर मुख्यधारा के लेखन से भिन्न रही है। इसी भिन्नता के कारण प्रवासी हिंदी लेखन ने हिंदी साहित्य के मुख्यधारा के पाठकों को एक नई दृष्टि, एक नई चेतना, एक नई संवेदना और एक नई उत्तेजना भी दी है।” विदेशों में लिखे जा रहे सृजनात्मक हिंदी साहित्य पर अपने विचार प्रकट करते हुए उषा राजे सक्सेना का यह मानना है कि प्रवासी रचनाकारों को अपने साहित्य को बरकरार रखने के लिए अपने कैनवस को और अधिक विशाल करना होगा।

उद्घाटन सत्र में प्रो.आर.शशिधरन, कुलपति, विज्ञान तथा तकनीकी विश्विविद्यालय, कोचिन ने बीज भाषण में प्रवासी साहित्यकारों की अहम भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि रचनाकारों ने अपने वतन से दूर रहकर अपनी रचनाओं के ज़रिये हिंदी भाषा और हिंदी साहित्य को गौरवान्वित करने का सराहनीय कार्य किया है तथा प्रवासी जीवन की संवेदना की अभिव्यक्ति ही प्रवासी साहित्य में मुखर हुई है।

प्रो. प्रतिभा मुदलियार की अध्यक्षता और मार्गदर्शन में इस द्विदिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का सफल आयोजन हुआ। संगोष्ठी में मॉरीशस, फीजी, चीन और ब्रिटन से प्रतिभागी आए थे। अध्यक्षीय भाषण में प्रो. प्रतिभा मुदलियार ने संगोष्ठी के मूल उद्देश्य को प्रतिपादित करते हुए कहा कि विदेशों में बसे भारतीय मूल के लेखकों के साहित्य को समझने के लिए उनका जीवन संघर्ष, मानवीय जीवन तथा सामाजिक परिवेश आदि को जानना जुरूरी है। इस अवसर पर उनके द्वारा संपादित पुस्तक ‘प्रवासी हिंदी साहित्य : संवेदना के विविध संदर्भ’ का लोकार्पण भी संपन्न हुआ। 
मुख्य अतिथि के रूप में मंचासीन केंद्रीय हिंदी संस्थान, आगरा के प्रो. रामवीर सिंह ने कहा कि प्रवासी साहित्य नोस्टेलिजिया का साहित्य होते हुए भी विभिन्न संवेदनाओं को लेकर चलता है। 

उद्घाटन सत्र के अध्यक्ष्य प्रो. लिंगराज गांधी, कुलसचिव, मैसूर विश्वविद्यालय, मैसूर ने हिंदी विभाग को इस प्रकार के आयोजन के लिए बधाई दी और साहित्य में प्रवासी लेखकों के योगदान को रेखांकित किया।

समापन सत्र के प्रमुख अतिथि के रूप में प्रो.ऋषभदेव शर्मा ने द्विदिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का मूल्यांकन करते हुए कहा कि प्रवासी साहित्य हिंदी सहित कई और भारतीय भाषाओं में भी लिखा जा रहा है और उसका महत्व आज के युग में बहुत अधिक है। उनका यह कहना था कि इस साहित्य की ओर आलोचकों को व्याख्याकार के दृष्टिकोण से देखना आवश्यक है। इस संगोष्ठी के दौरान प्रो.ऋषभदेव शर्मा की पुस्तक ‘संपादकीयम्’ का लोकार्पण भी हुआ। समापन सत्र में प्रो. टी. आर भट्ट, मुखय अतिथि और प्रो. शशिधर एल. गुडिगेनवर अध्यक्ष के रूप में उपस्थित थे।

संगोष्ठी के अंतर्गत आठ अकादमिक और समांतर सत्रों में सत्तर शोध पत्र प्रस्तुत किए गए। इन सत्रों की अध्यक्षता डॉ. ऋषभदेव शर्मा, डॉ. रामनिवास साहु, डॉ. रामप्रकाश, डॉ. शशिधर एल. जी., डॉ. शुभदा वांजपे, डॉ. सतीश पांडेय, डॉ. नामदेव गौड़ा और उषा राजे सक्सेना ने की।   

पहले दिन रंगारंग सांस्कृतिक संध्या का आयोजन मुख्य रूप से आकर्षण का केंद्र रहा जिसमें कर्नाटक की लोक संस्कृति को व्यक्त करने वाली संगीतमय प्रस्तुतियों के अलावा ‘अंधेर नागरी’ और ‘वापसी’ के नाट्य रूपांतरण ने समां बाँध दिया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. रेखा अग्रवाल एवं अन्य प्राध्यापकों ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन डॉ. एम. वासंति ने किया।

प्रेषक – डॉ. प्रतिभा मुदलियार 
विभागाध्यक्ष 
हिंदी अध्ययन विभाग 
मैसूर विश्वविद्यालय
मानसगंगोत्री 
मैसूर – 570006 

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14 Apr 2019
ऋषभदेव शर्मा की पुस्तक 'संपादकीयम्' लोकार्पित

ऋषभदेव शर्मा की पुस्तक 'संपादकीयम्' लोकार्पित

मैसूर, 7 मार्च, 2019 - मैसूर विश्वविद्यालय और केंद्रीय हिंदी संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित द्विदिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी के अंतर्गत उच्च शिक्षा और शोध संस्थान के पूर्व आचार्य डॉ. ऋषभदेव शर्मा की सद्यःप्रकाशित पुस्तक 'संपादकीयम्' का लोकार्पण ब्रिटेन से पधारी प्रख्यात प्रवासी हिंदी साहित्यकार उषा राजे सक्सेना के हाथों संपन्न हुआ। पुस्तक की प्रथम प्रति छत्तीसगढ़ी कथाकार डॉ. रामनिवास साहु ने ग्रहण की। कार्यक्रम संयोजक प्रो. प्रतिभा मुदलियार ने कहा कि यह पुस्तक समसामयिक विषयों पर निष्पक्ष संपादकीय टिप्पणियों का ऐसा संग्रह है जिसमें वर्तमान समय के सभी विमर्श विद्यमान हैं। अवसर पर फिजी से पधारे खेमेंद्र कमल कुमार तथा सुभाषिणी शिरीन लता, चीन से पधारे प्रो. बलविंदर सिंह राणा और मॉरीशस से पधारी लेखिका दिया लक्ष्मी बंधन ने लेखक को शुभकामनाएँ दी। 

केंद्रीय हिंदी संस्थान, आगरा के प्रो. रामवीर सिंह ने पुस्तक पर बातचीत में कहा कि संपादकीय टिप्पणियों का प्रकाशन एक अच्छी शुरूआत है क्योंकि इनसे समकालीन इतिहास लेखन के लिए पर्याप्त आधार सामग्री मिल सकती है।

    • डॉ. गुर्रमकोंडा नीरजा 
सह संपादक ‘स्रवंति’ 
असिस्टेंट प्रोफ़ेसर 
उच्च शिक्षा और शोध संस्थान 
दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा 
खैरताबाद 
हैदराबाद – 500004 

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14 Apr 2019
ढींगरा फ़ैमिली फ़ाउण्डेशन, अमेरिका तथा शिवना प्रकाशन का साहित्य समागमसंपन्न

ढींगरा फ़ैमिली फ़ाउण्डेशन, अमेरिका तथा शिवना प्रकाशन का साहित्य समागमसंपन्न

 

ढींगरा फ़ैमिली फ़ाउण्डेशन अमेरिका तथा शिवना प्रकाशन का संयुक्त आयोजन ‘साहित्य समागम’ राज्य संग्रहालय, भोपाल के सभागार में आयोजित किया गया। इस समारोह में देश भर के साहित्यकारों ने भाग लिया। समारोह में ढींगरा फ़ैमिली फ़ाउण्डेशन अमेरिका के प्रतिष्ठित अंतर्राष्ट्रीय कथा सम्मान तथा शिवना प्रकाशन के कथा-कविता सम्मान प्रदान किए गए। दिन भर चले इस समारोह में बड़ी संख्या में साहित्यकार उपस्थित थे।

कार्यक्रम का शुभारंभ ढींगरा फ़ैमिली फ़ाउण्डेशन की अध्यक्ष डॉ. ओम ढींगरा तथा उपाध्यक्ष डॉ. सुधा ओम ढींगरा ने दीप प्रज्ज्वलित करके किया। तीन सत्रों में आयोजित हुए इस समागम में शिवना प्रकाशन की पुस्तकों का विमोचन तथा रचना पाठ भी शामिल रहा, जिसमें हिन्दी के महत्त्वपूर्ण साहित्यकारों ने भाग लिया। प्रथम सत्र ‘सम्मानित रचनाकारों का पाठ’ की अध्यक्षता डॉ. उर्मिला शिरीष ने की तथा मुख्य अतिथि श्री महेश कटारे थे। इस सत्र में सम्मानित रचनाकारों ने अपनी सम्मानित रचनाओं का पाठ किया। सम्मानित रचनाकारों की कृतियों पर श्री बलराम गुमाश्ता, श्री विनय उपाध्याय, श्री समीर यादव तथा डॉ. गरिमा संजय दुबे ने   टिप्पणी  की। 

दूसरे सत्र ‘अलंकरण समारोह’ में अध्यक्षता श्री संतोष चौबे ने की जबकि मुख्य अतिथि श्री पलाश सुरजन थे। सभी सम्मानों के तहत सम्मान राशि, शॉल, श्रीफल तथा सम्मान पट्टिका प्रदान की गई। सम्मान समारोह में प्रदान किए गए सम्मानों में ‘ढींगरा फ़ैमिली फ़ाउण्डेशन लाइफ़ टाइम सम्मान’ डॉ. कमल किशोर गोयनका को, ‘ढींगरा फ़ैमिली फ़ाउण्डेशन अंतर्राष्ट्रीय कथा सम्मान’ उपन्यास विधा में मनीषा कुलश्रेष्ठ को उपन्यास ‘मल्लिका’ हेतु तथा कहानी विधा में मुकेश वर्मा को कहानी संग्रह ‘सत्कथा कही नहीं जाती’ हेतु प्रदान किया गया। शिवना प्रकाशन का ‘शिवना कथा सम्मान’ गीताश्री को उपन्यास ‘हसीनाबाद’ के लिए, ‘शिवना कविता सम्मान’ वसंत सकरगाए को कविता संग्रह ‘पखेरू जानते हैं’ तथा ‘शिवना कृति सम्मान’ उपन्यास ‘पार्थ तुम्हें जीना होगा’ के लिए कथाकार, कवयित्री ज्योति जैन को प्रदान किया गया। 

तीसरे सत्र ‘विमोचन समारोह’ में शिवना प्रकाशन द्वारा प्रकाशित बीस पुस्तकों का विमोचन किया गया। इस सत्र की अध्यक्षता डॉ. प्रेम जनमेजय ने की जबकि मुख्य अतिथि के रूप में श्री शशिकांत यादव उपस्थित थे। इस अवसर पर बोलते हुए श्री संतोष चौबे ने कहा कि बड़ी प्रसन्नता की बात है कि भोपाल में अंतर्राष्ट्रीय सम्मान समारोह का आयोजन किया जा रहा है, इससे भोपाल की साहित्यिक गतिविधियों को और बल मिलेगा। श्री पलाश सुरजन ने साहित्य की विधाओं के बीच पारस्परिक अंर्तसंबंधों पर काम किए जाने की बात कही, तथा देश के बाहर काम कर रहे हिन्दी सेवियों की सराहना की। डॉ. उर्मिला शिरीष ने कहा कि भोपाल में एक नई शुरूआत आज होने जा रही है, जो कार्यक्रम पूर्व में अमेरिका और कैनेडा में आयोजित हुआ अब वह भोपाल में आयोजित हो रहा है। श्री महेश कटारे ने कैनेडा यात्रा के अपने संस्मरण सुनाते हुए फ़ाउण्डेशन को साधुवाद दिया। डॉ. प्रेम जनमेजय ने शिवना प्रकाशन और ढींगरा फ़ाउण्डेशन द्वारा किए जा रहे कार्यों की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह संस्थाएँ बड़ा काम कर रही हैं। श्री शशिकांत यादव ने कहा कि भविष्य में यह दोनो संस्थाएँ हिन्दी साहित्य की प्रमुख संस्थाएँ होंगी। डॉ. कमल किशोर गोयनका ने ढींगरा फ़ाउण्डेशन द्वारा किए जा रहे साहित्यिक और सामाजिक कार्यों का ज़िक्र करते हुए फ़ाउण्डेशन की मुक्त कंठ से सराहना की। अंत में आभार ढींगरा फ़ैमिली फाउण्डेशन की उपाध्यक्ष डॉ. सुधा ओम ढींगरा ने व्यक्त किया। कार्यक्रम का संचालन पंकज सुबीर ने किया


श्रवण मावई 
मीडिया प्रभारी

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30 Mar 2019
’केसरिया फागुन’: हिन्दी राइटर्स गिल्ड की पुलवामा शहीदों को रचनात्मक श्रद्धांजलि

’केसरिया फागुन’: हिन्दी राइटर्स गिल्ड की पुलवामा शहीदों को रचनात्मक श्रद्धांजलि

हिन्दी राइटर्स गिल्ड ने ९ मार्च २०१९ को ब्रैमप्टन की स्प्रिंगडेल शाखा लाइब्रेरी में दोपहर १.३० से ४.३० बजे एक विशिष्ट कार्यक्रम ’केसरिया फागुन’ आयोजित करके पुलवामा के शहीदों को रचनात्मक श्रद्धांजलि दी। 

भीषण शीत और हवा के बाद भी लगभग चालीस लोगों के बीच यह विशिष्ट कार्यक्रम समय पर आरंभ हुआ। इस कार्यक्रम का संचालन डॉ. श्रीमती शैलजा सक्सेना ने किया। उन्होंने शहीदों को श्रद्धांजलि देते हुए सभी श्रीताओं से १ मिनट का मौन रखने का आग्रह किया। भारत में उत्पन्न कठिन स्थिति पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि यहाँ प्रश्न युद्ध का नहीं बल्कि आतंक को समाप्त करने का है क्योंकि हमारे वीर लड़ते हुए शहीद नहीं हुए अपितु षड़यंत्र का शिकार होकर शहीद हुए हैं। ऐसे वातावरण में बात युद्ध और शांति की नहीं, आतंक समाप्त करने की होनी चाहिये और इस कार्य में लेखक अपने सामाजिक दायित्त्व को समझते हुए महती भूमिका निभा सकता है। शैलजा जी ने सर्वप्रथम श्रीमती आशा बर्मन को मंच पर आमंत्रित किय। आशा जी ने प्रदीप जी के एक सुप्रसिद्ध गीत "ऐ मेरे वतन के लोगों” गाकर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की और यह भी कहा कि कई दशक प्रवास में रहने पर भी एक भारतीय सदा स्वदेश से जुड़ा रहता है। उनकी इस भावपूर्ण प्रस्तुति ने सभी की आँखें नम कर 

इसके पश्चात् डॉ. जगमोहन सिंह सांगाजी को  मंच पर आमंत्रित किया गया। उन्होंने कहा कि इतने समय से हम इतने युद्धों के परिणाम देखने के बावजूद भी युद्ध कर रहे हैं। शायद हम अभी तक अच्छे इंसान नहीं बन सके। उन्होंने अपनी कविता में एक अच्छा इंसान बनने का सन्देश देते हुए कहा कि सभी अच्छा बनने की कोशिश करें तो ही संसार बेहतर हो सकता है।

निर्मल सिद्धू जी ने एक अत्यंत मर्मस्पर्शी रचना सुनाई, "हम शहीदों की शहादत को न भुला पायेंगे”। इसके बाद श्री इकबाल बरार जी ने अपने मधुर स्वर में देशभक्ति का गीत ’ऐ मेरे प्यारे वतन, ऐ मेरे बिछड़े चमन’ को गाकर सुनाया।

इसके पश्चात श्री बालकृष्ण जी ने कविता पाठ के साथ साथ युद्ध का एक अत्यंत रोचक समाधान प्रस्तुत किया। उनके अनुसार यदि वैज्ञानिक परमाणु बम के स्थान पर एक ऐसा ‘शांति बम’ निर्मित कर सकें जिसके डालने से सबके मन में शांति हो जाए तो संभवत: विश्व में शांति की स्थापना की जा सकती है। तदुपरांत श्री सतीश सेठी जी ने शहीदों को श्रद्धांजलि देते हुए युद्ध बँदी वीरों की स्थिति पर अपनी मार्मिक कविता सुनाई। उनकी कविता ने यह सोचने पर बाध्य किया कि शहीदों को तो हम सम्मानित करते हैं पर जो वीर शारीरिक और मानसिक प्रताड़नाएँ, आघात और अंग-भंग की कठोर स्थिति को झेलते हुए दुश्मनों के कब्ज़े में आ जाते हैं, उनके और उनके परिवार को हम भूल जाते हैं।

दीपक राज़दान जी ने सभा में युद्ध को स्थिति के अनुसार आवश्यक बताते हुए कहा कि युद्ध चाहें जितना भी विध्वंसात्मक हो पर कभी-कभी आत्मरक्षा के लिए आवश्यक भी हो जाता है इसीलिए श्रीकृष्णजी ने अर्जुन को युद्ध करने के लिए प्रेरित किया था।

श्रीमती सीमा बागला प्रथम बार मासिक गोष्ठी में आयीं थीं, अपनी सुन्दर कविता में आवश्यकतानुसार युद्ध की भेरी बजाने का आह्वान करते हुए उन्होंने सन्देश दिया कि समय आ गया है कि एकबार फिर से अर्जुन गांडीव उठायें। इसके बाद श्रीमती आशा मिश्रा ने प्रसादजी का उद्बोधन गीत ’हिमाद्री तुंग श्रृँग से’ गाकर प्रस्तुत किया। 

इसके पश्चात श्री राज माहेश्वरी ने भारतीय राजनीति के ऐतिहासिक गुजराल सिद्धांतों की चर्चा कर भारत और उसके पड़ोसी देशों के संबंधों की चर्चा की।

श्री नरेन्द्र ग्रोवर ने एक अत्यंत मार्मिक रचना पढ़ी जिसका भाव था कि शहीदों के जीवन के कष्टों को शब्दों में कैसे बाँधू? उन्होंने सही ही कहा कि हर शब्द और श्रद्धाँजलि शहीदों की वीरता और त्याग के सामने अपूर्ण है।

तदुपरांत पूनम चन्द्र ‘मनु’ ने शहीदों के जीवन की आहुति को व्यर्थ न जाने देने की बात करते हुए वीर रस की एक अत्यंत प्रभावशाली रचना सुनाईं; “चिंघाड़ो कि तुम भारत हो, जब तक शत्रु न मिट जाए ।
भूल जाओ तुम बुद्ध के वंशज हो, भूल जाओ तुम बुद्ध के वंशज हो
शिव बन कर ताण्डव करो…रणचण्डी बन रक्तपात करो ...”

श्रीमती कृष्णा जी अपनी क्षणिकाएँ सुनाकर सबको मुग्ध कर दिया।

अंत में सुश्री अरूज राजपूत जी ने शहीदों को नमन करते हुए इन कठिन परिस्थितियों में शांति का आह्वान किया। वे यू. एन. ओ. में भी ’पीस डेलिगेशन’ के सदस्य के रूप में जा चुकी हैं। उन्होंने अपनी कविता में "किनारे-किनारे अमन के पौधे लगाने" की बात की। अरूज जी इस गोष्ठी की अंतिम वक्ता थीं। 

कार्यक्रम का आरम्भ सभी अतिथियों का स्वागत श्री अरुण कुमार बर्मन तथा श्रीमती आशा बर्मन द्वारा लाए गए स्वादिष्ट जलपान और दीपक राज़दान द्वारा लाए गए गर्म कशमीरी कहवा द्वारा किया गया था। भावनाओं और विचारों की संतुलित रचनात्मक धारा के बीच डॉ. शैलजा सक्सेना ने सफल संचालन करते समय बीच-बीच में युद्ध और शांति के विभिन्न पहलुओं पर हिंदी के वरिष्ठ कवियों की रचनाओं के उदाहरण भी दिये जैसे दिनकर, नरेश मेहता इत्यादि जिससे उनके संचालन ने श्रोताओं को मुग्ध कर दिया। इस प्रकार  हिन्दी राइटर्स गिल्ड द्वारा शहीदों को एक अत्यंत भावभीनी श्रद्धांजलि दी गयी।

-आशा बर्मन

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30 Mar 2019
विज्ञान लोकप्रियकरण के लिए डॉ. ज़ाकिर अली 'रजनीश' को राष्ट्रीय विज्ञान संचार पुरस्कार

विज्ञान लोकप्रियकरण के लिए डॉ. ज़ाकिर अली 'रजनीश' को राष्ट्रीय विज्ञान संचार पुरस्कार

विज्ञान इसलिए महत्वपूर्ण नहीं है कि वह हमें सुख और सुविधा के साधन मुहैया कराता है, वह इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि हमें तर्कपूर्ण और विचारशील बनाने के लिए भी प्रेरित करता है। और इस नज़रिए से समाज को परिचित कराने में विज्ञान संचारकों की महत्वपूर्ण भूमिका है, जिसके लिए उनकी जितनी सराहना की जाए कम है।

उक्त बातें विज्ञान दिवस के अवसर पर जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय विज्ञान संचार पुरस्कार वितरण समारोह में सचिव, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, भारत सरकार, प्रोफेसर आशुतोष शर्मा ने कहीं। इस पर लखनऊ के लोकप्रिय लेखक और 'साइंटिफिक वर्ल्ड' के सम्पादक डॉ. ज़ाकिर अली 'रजनीश' को बच्चों के मध्य विज्ञान को लोकप्रिय बनाने के लिए राष्ट्रीय विज्ञान संचार पुरस्कार से सम्मानित किया गया। सम्मान स्वरूप उन्हें दो लाख रूपये, स्मृति चिन्ह एवं प्रशस्ति पत्र प्रदान किये गये।

इस अवसर पर पर प्रिंट मीडिया के लिए हुद्रम बीरकुमार सिंह, मणिपुर, मनींद्र कुमार मजूमदार, असम, प्रोफेसर मानसी गोस्वामी, उड़ीसा को, बच्चों के मध्य विज्ञान लोकप्रियकरण के लिए रूरल एग्रीकल्चरल डेवलेपमेंट सोसायटी, आंध्र प्रदेश, डॉ. राजकुमार उत्तर प्रदेश को अनुवाद के लिए प्रोफे. मनीष रत्नाकर जोशी, परम्परागत माध्यम के लिए डॉ. बृजमोहन शर्मा, उत्तराखण्ड, डॉ. सुनीता झाला राजस्थान, व इलेक्ट्रानिक मीडिया के लिए डॉ. अंकुरन दत्ता, असम को भी पुरस्कृत किया गया।

बच्चों के मध्य विज्ञान विज्ञान लोकप्रियकरण के लिए राष्ट्रीय विज्ञान पुरस्कार से सम्मानित होने वाले डॉ. ज़ाकिर अली 'रजनीश' देश के जाने-माने रचनाकार हैं, जो अपनी विज्ञान कथाओं के लिए विशेष रूप से जाने जाते हैं। डॉ. रजनीश गत दो दशकों से बच्चों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण को विकसित करने वाले साहित्य का सृजन कर रहे हैं। उनकी 60 से अधिक पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। वे हिंदी की लोकप्रिय ब्लॉग पत्रिका 'साइंटिफिक वर्ल्ड' के सम्पादक हैं, जो देश की आई.एस.एस.एन. नम्बर प्राप्त इकलौती हिन्दी ब्लॉग पत्रिका है। इसके अलावा वे 'साइंस ब्लॉगर्स असोसिएशन', 'सर्प संसार' और 'टेकगेप' नामक ब्लॉग पत्रिकाओं के द्वारा भी विज्ञान संचार की अलख जला रहे हैं।

बताते चलें कि डॉ. रजनीश 'तस्लीम' (टीम फॉर साइंटिफिक अवेयरनेस आन लोकल इश्यूज़ इन इंडियन मॉसेस) नामक संस्था के महासचिव भी हैं और इसके माध्यम से विज्ञान संचार सम्बंधी सम्मेलन, गोष्ठी और कार्यशालाओं का आयोजन करते रहते हैं , जिनसे अबतक हजारों बच्चे लाभान्वित हो चुके हैं। डॉ. ज़ाकिर अली 'रजनीश' की इन उपलब्धियों के लिए उन्हें अब तक बॉब्स अवार्ड, जर्मनी, कथा महोत्सव पुरस्कार, शारजाह, यू.ए.ई. सहित तीन दर्जन से अधिक पुरस्कार/सम्मान प्राप्त हो चुके हैं।

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29 Mar 2019
पुस्तक विमोचन कार्यक्रम : अगले जनम मोहे कुत्ता कीजो व्यंग्य संग्रह

पुस्तक विमोचन कार्यक्रम : अगले जनम मोहे कुत्ता कीजो व्यंग्य संग्रह


 दिनांक 20 मार्च 2019: स्वामी विवेकानंद लाइब्रेरी भोपाल - 


श्री सुदर्शन कुमार सोनी की पुस्तक ’अगले जनम मोहे कुत्ता कीजो’ का विमोचन दिनांक 20 मार्च 2019 को स्वामी विवेकानंद लाइब्रेरी भोपाल में लब्ध प्रतिष्ठित व्यंग्यकार ’पदमश्री’ डॉक्टर ज्ञान चतुर्वेदी के मुख्य आतिथ्य में आयोजित एक कार्यक्रम में किया गया। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में श्री मकरंद देऊस्कर आईजी इंटेलीजेंस तथा वरिष्ठ व्यंग्यकार श्री शांतिलाल जैन उपस्थित थे। 

व्यंग्य पुरोधा डॉक्टर ज्ञान चर्तुवेदी जी ने इस अवसर पर कहा कि सुदर्शन की वर्तमान पुस्तक व्यंग्य में एक नया प्रयोग कह सकते हैं। पूरे चौंतीस व्यंग्य कुत्तों पर हैं। व्यंग्य अपने आप में मज़ेदार हैं। इस संग्रह में उनका भोगा हुआ यथार्थ भी दिखता है। कुत्तों पर आप असीमित लिख सकते हो। किसी ने कहा कि ये देश का पहला ऐसा संग्रह है। एक कुत्ता अपने मालिक से निस्वार्थ प्रेम प्यार करता है। नया विषय तो है इसके कई व्यंग्य में तो वे गहराई पर गये हैं लेकिन कई अन्य में विकसित होने की और संभावनायें हैं। मेरी ज़्यादा सहानुभूति गली-कूचे के कुत्तों से है। उनका कोई ठिकाना नहीं है कि सुबह रोटी मिली तो शाम को कुछ मिलेगा कि नहीं? कहाँ कब कौन लतिया दे पत्थर मार दे! मेरे प्रत्येक उपन्यास में कुत्ते की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है जबकि मैंने स्वयं कभी कुत्तापालन नहीं किया।


श्री मकरंद देऊस्कर आईजी (इंटेलीजेंस) ने कहा कि सुदर्शन सोनी की किताबों की ताज़ी प्रति मुझे मिल जाती है। आज का जो व्यंग्य संग्रह है यह लाजबाब है पूरा कुत्तामय होकर लिखा है उन्होंने। मैंने भी कुत्तापालन किया है लेकिन मात्र एक रात के लिये और उसी में मैंने कुत्ते के पूरे रूप जो इस पुस्तक के अलग-अलग व्यंग्यों  में अलग-अलग तरह से वर्णिंत हैं, देख लिये। 

भोजपाल साहित्य संस्थान के अध्यक्ष प्रियदर्शी खैरा ने कहा कि सुदर्शन का रचनाकर्म मैं लगातार कई सालों से देख रहा हूँ। ख़ास बात तो यह है कि वे शासकीय सेवा के विभिन्न दायित्वों को पूर्ण कुशलता से निभाते हुये भी लगातार सृजनशीलता बनाये रखे हुये हैं। ख़ुशी की बात है कि भोजपाल साहित्य संस्थान के कार्यकारी अध्यक्ष का एक और संकलन आया है। श्री खैरा ने कहा कि केवल कुत्तों पर ही केन्द्रित व्यंग्य संग्रह पूरे देश क्या पूरे ब्रह्मांड में पहले कभी नहीं आया है! इनका यह तीसरा व्यंग्य संग्रह है उन्होंने इस संग्रह के माध्यम से कुछ नये शब्दों को भी गढ़ डाला है। कुत्तों की दिनचर्या, उनकी आदतों, अच्छाइयों, बुराइयों का इन्होंने माइक्रोस्कोपिक विश्लेषण अपने व्यंग्यों में किया है। उन्होंने लेखक की धर्मपत्नी डॉक्टर सीमा सोनी व सुपुत्री सुभुति का भी व्यंग्य पाठ हेतु आभार माना।

सुदर्शन सोनी ने कहा कि इंसान को कुत्तों के प्रति अपने नज़रिये को बदलने की ज़रूरत है; वह वैसा नहीं है जैसा कि अधिकांश लोग समझते हैं। संग्रह के व्यंग्य पिछले दस सालों में लिखे गये हैं। उन्होंने इस संग्रह को अपने प्रिय कुत्ते राॅकी जिसका दो साल पहले आकस्मिक अवसान बीमारी से हो गया था को श्रंद्वाजलि देने का एक तरीक़ा बताया। लेखक ने पुस्तक के कार्टून रचियता श्री हरिओेम तिवारी का विशेष आभार माना। जिन्होंने अत्यंत कम समय में पुस्तक के लिये बेहतरीन कार्टून बना उसे और आकर्षक बनाया। भोजपाल साहित्य संस्थान व धर्मपत्नी डॉक्टर सीमा पुत्र अभ्युदय व पुत्री सुभुति का भी विशेष आभार माना। लेखक ने पुस्तक से ही एक व्यंग्य ’जेनरेशन गैप इन कुत्तापालन’ का वाचन किया। सुभुति सोनी ने ’अगले  जनम मोहे कुत्ता कीजो’ रचना का वाचन किया जिसे उपस्थित साहित्य प्रेमियों द्वारा सराहा गया। स्वामी विवेकानंद लायब्रेरी के प्रबंधक रनवीर सिंह सहायक प्रबंधक श्री यतीश भटेले का भी आभार लेखक ने किया। 

वरिष्ठ व्यंग्यकार श्री शांतिलाल जैन ने पुस्तक के व्यंग्यों पर एक आलोचनात्मक वक्तव्य दिया। उन्होने कहा कि आज जब शब्दों की हत्या का समय चल रहा है तब लेखक ने इस संग्रह में कुछ नये शब्दों जैसे ’जेबकुतरा’ को गढ़ा है। कुत्तों के प्रतीक के माध्यम से उन्होने सर्वहारा वर्ग की तकलीफ़ों को सामने लाने का कार्य किया है। उन्होंने कुत्तों को न जाने कितने कोणों से परखा है। जब विषय एक हो तो ज़्यादा लिखने की गुंजाइश नहीं रहती लेकिन सुदर्शन सोनी जी ने यह साहस किया है। सारे व्यंग्यों के केन्द्र पर कुत्ता ही है। हाँ, ऐसा संग्रह हिंदी व्यंग्य में पहले कभी नहीं आया है। वे एक सजग व्यंग्यकार हैं।

कार्यक्रम का सफल व प्रभावी संचालन साहित्यकार श्री चन्द्रभान राही ने किया। कार्टूनिस्ट श्री हरिओम तिवारी द्वारा पुस्तक के व्यंग्यों को बहुचर्चित जर्जर भोपाली के किरदार के माध्यम से कॉमेडी के रूप में प्रस्तुत करके उपस्थित साहित्यकारों व साहित्य पे्रमियों की वाहवाही लूटी। 

आभार प्रदर्शन भोजपाल साहित्य संस्थान के सक्रिय पदाधिकारी श्री जगदीश किंजल्क ने किया। उन्होंने कुत्तों के संबंध मे हरिशंकर जी परसाई के एक प्रसंग का भी उल्लेख किया कि कैसे परसाई जी जो कभी आकाशवाड़ी जबलपुर नहीं आये थे वे कुत्तों के शोर के कारण रिकार्डिंग हेतु आकाशवाणी आये। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में साहित्यकार साहित्य प्रेमी व अधिकारीगण उपस्थित थे। 

प्रियदर्शी खैरा 
अध्यक्ष भोजपाल साहित्य संस्थान 
90-91 यशोदा विहार चूना भट्टी भोपाल 

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29 Mar 2019
छत्तीसगढ़ी उपन्यास ‘मोर दुलरुआ’ और बड़का दाई’ लोकार्पित

छत्तीसगढ़ी उपन्यास ‘मोर दुलरुआ’ और बड़का दाई’ लोकार्पित

मैसूर, 3 मार्च, 2019  - 

केंद्रीय हिंदी संस्थान के व्याख्यान कक्ष में संपन्न क्षेत्रीय निदेशक डॉ. राम निवास साहू के सेवा निवृत्ति समारोह के अवसर पर उनकी दो छत्तीसगढ़ी पुस्तकों 'मोर दुलरुआ' (जीवनीपरक उपन्यास) और 'बड़का दाई' (अनुवाद : डॉ. गीता शर्मा) का लोकार्पण किया गया। अध्यक्षता मैसूर विश्वविद्यालय की प्रो. प्रतिभा मुदलियार ने की। बतौर मुख्य अतिथि लोकार्पण प्रो. ऋषभदेव शर्मा ने किया। एनसीईआरटी के डॉ. सर्वेश मौर्य और केंद्रीय हिंदी संस्थान के डॉ. परमान सिंह ने लोकार्पित पुस्तकों की समीक्षा प्रस्तुत की। वल्लभविद्यानगर से पधारे डॉ. योगेन्द्रनाथ मिश्र तथा हैदराबाद से पधारे चंद्रप्रताप सिंह ने शुभाशंसा व्यक्त की। इस अवसर पर आशा रानी साहू, शशिकांत साहू, श्रीकांत साहू और श्रीदेवी साहू ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। नराकास-मैसूर के प्रतिनिधियों के अलावा डॉ. साहू के गृहनगर कोरबी-छत्तीसगढ़ से आए समूह के सदस्यों ने भी उत्साहपूर्वक भागीदारी निबाही।

• डॉ. गुर्रमकोंडा नीरजा 
सह संपादक ‘स्रवंति’ 
असिस्टेंट प्रोफेसर 
उच्च शिक्षा और शोध संस्थान 
दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा 
खैरताबाद, हैदराबाद – 500004   

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26 Feb 2019
स्पंदन संस्था भोपाल के सम्मानों की घोषणा
'स्पंदन कथा शिखर सम्मान 2018' श्री असगर वजाहत को दिया जाएगा

स्पंदन संस्था भोपाल के सम्मानों की घोषणा

श्री उदयन बाजपेई, श्री पंकज सुबीर, श्री आलोक चटर्जी, श्री महेश दर्पण तथा श्री प्रेम जनमेजय को स्पंदन सम्मान प्रदान किया जाएगा, युवा स्पंदन पुरस्कार श्री थवई थियाम को।

ललित कलाओं के लिए समर्पित स्पंदन संस्था भोपाल की ओर से स्थापित सामानों की घोषणा कर दी गई है। वर्ष 2018 का 'स्पंदन कथा शिखर सम्मान' हिंदी के वरिष्ठ साहित्यकार श्री असगर वजाहत को प्रदान किया जाएगा। 'स्पंदन कृति सम्मान' कविता संग्रह 'केवल कुछ वाक्य' के लिए कवि श्री उदयन वाजपेई को, 'स्पंदन कृति सम्मान' उपन्यास 'अकाल में उत्सव' के लिए श्री पंकज सुबीर को, 'स्पंदन आलोचना सम्मान' श्री महेश दर्पण को, 'स्पंदन ललित कला सम्मान' रंग कर्म के लिए श्री आलोक चटर्जी को, 'स्पंदन साहित्यिक पत्रिका सम्मान' व्यंग्य यात्रा के लिए श्री प्रेम जनमेजय को तथा 'स्पंदन युवा पुरस्कार' थिवई थियाम को देने का निर्णय सर्वानुमति से किया गया है। 

स्पंदन सम्मान समारोह की संयोजक उर्मिला शिरीष ने बताया कि सम्मान समारोह दिनांक 29 तथा 30 मार्च 2019 को भोपाल में आयोजित किया जाएगा।

उर्मिला शिरीष 
संयोजक

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26 Feb 2019
ढींगरा फ़ैमिली फ़ाउण्डेशन, अमेरिका द्वारा अंतर्राष्ट्रीय कथा सम्मान तथा शिवना प्रकाशन द्वारा कथा-कविता सम्मान घोषित

ढींगरा फ़ैमिली फ़ाउण्डेशन, अमेरिका द्वारा अंतर्राष्ट्रीय कथा सम्मान तथा शिवना प्रकाशन द्वारा कथा-कविता सम्मान घोषित

ढींगरा फ़ैमिली फ़ाउण्डेशन अमेरिका ने अपने प्रतिष्ठित अंतर्राष्ट्रीय कथा सम्मान तथा शिवना प्रकाशन ने अपने कथा-कविता सम्मान घोषित कर दिए हैं। ढींगरा फ़ैमिली फ़ाउण्डेशन सम्मानों की चयन समिति के संयोजक पंकज सुबीर ने बताया कि "ढींगरा फ़ैमिली फ़ाउण्डेशन लाइफ़ टाइम एचीवमेंट सम्मा" हिन्दी के वरिष्ठ साहित्यकार तथा केंद्रीय हिन्दी संस्थान के उपाध्यक्ष डॉ. कमल किशोर गोयनका को, "ढींगरा फ़ैमिली फ़ाउण्डेशन अंतर्राष्ट्रीय कथा सम्मान" उपन्यास विधा में हिन्दी की चर्चित लेखिका मनीषा कुलश्रेष्ठ को उपन्यास 'मल्लिका' हेतु तथा कहानी विधा में हिन्दी के वरिष्ठ कथाकार और समावर्तन के संपादक मुकेश वर्मा को कहानी संग्रह 'सत्कथा कही नहीं जाती' हेतु प्रदान किए जाएँगे। शिवना प्रकाशन के सम्मानों की चयन समिति के संयोजक श्री नीरज गोस्वामी ने बताया कि 'शिवना कथा सम्मान' हिन्दी की चर्चित लेखिका गीताश्री को उपन्यास 'हसीनाबाद' के लिए, 'शिवना कविता सम्मान' महत्त्वपूर्ण कवि वसंत सकरगाए को कविता संग्रह 'पखेरू जानते हैं' तथा 'शिवना कृति सम्मान' शिवना प्रकाशन से प्रकाशित उपन्यास 'पार्थ तुम्हें जीना होगा' के लिए कथाकार, कवयित्री ज्योति जैन को प्रदान किए जाएँगे। शिवना प्रकाशन तथा ढींगरा फ़ैमिली द्वारा संयुक्त रूप से 17 मार्च 2019 रविवार को भोपाल के राज्य संग्रहालय के सभागार में आयोजित 'ढींगरा फ़ैमिली फ़ाउण्डेशन- शिवना साहित्य समागम' में यह सम्मान प्रदान प्रदान किये जाएँगे। चार सत्रों में आयोजित होने वाले इस समागम में शिवना प्रकाशन की पुस्तकों का विमोचन, रचना पाठ, सम्मान समारोह तथा विमर्श का समावेश रहेगा, जिसमें हिन्दी के महत्त्वपूर्ण साहित्यकार भाग लेंगे।

ढींगरा फ़ैमिली फ़ाउण्डेशन अमेरिका का यह तीसरा सम्मान समारोह है। हिन्दी की वरिष्ठ कथाकार, कवयित्री, संपादक डॉ. सुधा ओम ढींगरा तथा उनके पति डॉ. ओम ढींगरा द्वारा स्थापित इस फ़ाउण्डेशन के यह सम्मान इससे पूर्व श्रीमती उषा प्रियंवदा, श्रीमती चित्रा मुद्गल, श्री महेश कटारे, डॉ. ज्ञान चतुर्वेदी, श्रीमती सुदर्शन प्रियदर्शिनी, तथा श्री हरिशंकर आदेश को प्रदान किया जा चुका है। सभी सम्मानों के तहत सम्मान राशि, शॉल, श्रीफल तथा सम्मान पट्टिका प्रदान की जाएगी।
शहरयार अमजद ख़ान
शिवना प्रकाशन

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22 Feb 2019
हिम की चादर पे खेले बसंत राज
हिन्दी राइटर्स गिल्ड की फरवरी, २०१९ मासिक गोष्ठी

हिम की चादर पे खेले बसंत राज

फरवरी 09, 2019 - कैनेडा की जानी-मानी और बहुआयामी संस्था हिंदी राइटर्स गिल्ड की मासिक गोष्ठी ०९ फ़रवरी २०१९ को स्प्रिंगडेल लायब्ररी, ब्रैम्पटन में दोपहर १.३० बजे प्रारंभ हुई। “हिम की चादर पे खेले बसंत राज” को चरितार्थ करता बर्फ़ीला मौसम था फिर भी कवियों और श्रोताओं ने बड़ी संख्या में आकर हिंदी के प्रति प्रेम का परिचय दिया। बसंत पंचमी के शुभ अवसर पर सभी ने एक दूसरे को बसंत ऋतु के आगमन पर बधाई दी। हिंदी राइटर्स गिल्ड द्वारा आयोजित समोसे, बर्फ़ी, गर्म चाय और श्रीमती सविता अग्रवाल द्वारा परोसे गए, बसन्ती मीठे चावलों का सभी ने भरपूर आनंद उठाया।

कार्यक्रम की संचालिका श्रीमती आशा बर्मन ने अपना कार्यभार संभालते हुए सभी का स्वागत किया और हिंदी साहित्य जगत के चारों काल वीर गाथा काल, भक्ति काल, रीति काल और आधुनिक काल के बारे में संक्षिप्त परिचय देते हुए, भक्ति काल में सूर, तुलसी, रहीम और कबीर के बारे में चर्चा करते हुए हिंदी के नौ रसों में श्रृंगार रस को सभी रसों का राजा बताया क्योंकि यह माह प्रेम के रूप में भी मनाया जाता है इसलिए इस गोष्ठी का विषय भी प्रेम ही था। प्रेम का स्वरुप इतना व्यापक है कि उसे किसी सीमा में बांधा नहीं जा सकता है इसीलिये सभी ने अपने-अपने ढंग से अपने प्रेम की अनुभूतियों को प्रस्तुत किया। सर्वप्रथम श्रीमती सविता अग्रवाल ने बसंत पंचमी क्यों मनाई जाती है और उसके महत्व के बारे में अपनी बात रखी तथा हिंदी के एक लेखक श्री उदय भानु हंस की कविता “मैं तुमसे प्रीत लगा बैठा” की प्रस्तुति की। दूसरे कवि श्री नरेन्द्र ग्रोवर ने अपनी कविता “रेल यात्रा” प्रस्तुत की, इस कविता में ग्रोवर जी ने रेल यात्री के सुन्दर अनुभवों जैसे मूंगफली खाकर छिलके फेंकने का आनंद और एक मुसाफ़िर के बार बार छींक रोकने की बात को बड़े अनोखे ढंग से हास्य का पुट देकर यात्रा का किस्सा सुनाया। तत्पश्चात श्रीमती कृष्णा वर्मा ने अपनी कविता में “प्रेम की स्याही से नज़रें सीने पर पैगाम लिख जाती हैं, प्रेम में सोच रेशमी हो जाती है” जैसी पंक्तियों से प्रेम रस की अनुभूति को दर्शाया। दूसरी कविता “क्यूँ बाबा” में एक पुत्री के अपने बाबा से कई सवाल और लड़के लड़की के अन्तर को मिटाने की गुहार को बड़े सुन्दर ढंग से प्रस्तुत किया। अगले कवि श्री अखिल भंडारी ने अपनी गज़ल “हुई मुद्दत कोई आया नहीं था” में ऐसे दोस्त की बात की, जो बुरे वक़्त में भी काम नहीं आया। श्रीमती आशा बर्मन ने डॉ. इंदु रायज़ादा को आमंत्रित करने से पूर्व ख़ूबसूरत अंदाज़ में फैज़ की कुछ पंक्तियां पढ़ीं। डॉ. इंदु रायज़ादा ने सर्व प्रथम गायत्री मंत्र की स्तुति की और इसके अर्थ को भी बताया। सभी ने मिलकर तीन बार इस मंत्र का उच्चारण किया। प्रेम की चर्चा करते हुए प्रेम में वात्सल्य रस के अपने कुछ अनुभवों की चर्चा की, प्रेम में संबंधों का टूटना फिर जुड़ जाना, बंधन टूटने पर मानव का बिखर जाना, पर फिर भी जीवन को जीते रहना इत्यादि अनेक उदाहरण देकर अपने विचार रखे। इंदु जी ने श्री हरिवंशराय बच्चन की लिखी कुछ पंक्तियों को भी उद्दृत किया। अगले कवि श्री बाल शर्मा ने “मेरा गीत” नामक अपनी रचना की प्रस्तुति की जिसमें दुनिया की भीड़ में ’मन का मीत मिला दो’ और बादलों से बरस जाने जैसी इच्छाओं को प्रस्तुत किया गया था। अपनी दूसरी कविता में ‘एक प्रेमी तस्वीरों को ना देख कर भी उसमें अपने प्रिय को देख लेता है’ कहकर प्रेम के असीम विश्वास का वर्णन बख़ूबी किया। एक और कविता “हम सो रहे थे” की भी प्रस्तुति की। श्री इकबाल बरार, जो टोरंटो के जाने माने गायक हैं, ने हस्तीमल हस्ती (गज़लकार) की एक ग़ज़ल “वक़्त तो लगता है” को गाकर कर्ण आनंद से विभोर किया। उन्होंने बॉलीवुड की एक फिल्म का मशहूर गाना “तेरे बिन सूने नयन हमारे... को बहुत ख़ूबसूरती के साथ पेश किया। तत्पश्चात श्री सतीश सेठी ने अपनी रचना “मैं तेरी माँ हूँ” प्रस्तुत की, जिसमें माँ को सर्वोच्च मानते हुए मातृप्रेम को अनोखा और अलग माना है जिसका दुनिया में कोई सानी नहीं है। माँ के पास ना होते हुए भी माँ को सदैव अपने चारों ओर महसूस करते हैं। अगले लेखक और कवि श्री विजय विक्रांत को, जो हिंदी राइटर्स गिल्ड के संस्थापक निदेशक भी हैं, को मंच पर आमंत्रित किया गया। विक्रांत जी ने अमीर खुसरों और बसंत से जुड़ी एक घटना को कहानी के रूप में प्रस्तुत किया, उन्होंने बताया कि खुसरों के समय में हिन्दू मुस्लिम दोनों ही आपस के बैर भाव को त्याग कर बसंत पंचमी का त्यौहार मनाते थे और दरगाहों पर बसंत पंचमी के दिन फूल चढ़ाए जाते थे। अमीर खुसरो की दो रचनाओं जैसे “आज बसंत मना ले सुहागिन” और “सघन वन फूल रही सरसों” का भी वर्णन किया | हिंदी राइटर्स गिल्ड की गोष्ठी में पहली बार पधारे श्री विनोद महेन्द्रू ने श्री हरिवंशराय बच्चन की एक कविता “मकान चाहे कच्चे थे” की प्रस्तुति की जिसमें आधुनिक वस्तुओं के आ जाने से रिश्तों में दूरियां बढ़ गयीं हैं जैसे कई उदाहरण निहित हैं।

अंत में गोष्ठी की संचालिका श्रीमती आशा बर्मन को श्रीमती सविता अग्रवाल ने कविता पाठ के लिए मंच पर आमंत्रित किया। आशा जी ने “प्यार का प्रतिदान” नामक रचना को गाकर प्रस्तुत किया, दूसरी रचना  प्रसिद्ध कवि श्री सोम ठाकुर की, “ये प्याला प्रेम का प्याला है” को अपने मधुर कंठ से गाकर कविता में चार चाँद लगा दिए। एक नए सज्जन श्री राम सिंह इस गोष्ठी का हिस्सा बने, उन्हें भी मंच पर आमंत्रित किया किया गया। पंजाबी भाषी होते हुए भी उनका शुद्ध हिंदी उच्चारण सुनकर ह्रदय गद-गद  हो गया। उन्होंने बसंत पंचमी और रंगों पर अपने विचार रखे जिसमें भाषा के माध्यम से सभी रंगों को अपने अन्दर समेटा जा सकता है। सृजन की जिज्ञासा दुनिया के हर कोने में रहने वाले व्यक्ति में होती है, भाषा कोई भी छोटी या बड़ी नहीं होती | भाषा तो अपनी बात दूसरे तक पहुंचाने का एक माध्यम है कहते हुए अपनी बात समाप्त की। अंत में संचालिका आशा बर्मन ने सभी का धन्यवाद किया। श्री संजीव अग्रवाल ने अपने कैमरे से सबके चित्र लिए और अंत में एक सामूहिक चित्र भी लिया। ज़ी टी वी से पधारे श्री अरहान निज्जर ने कार्यक्रम के कुछ अंश वीडिओ कैमरे में उतार कर लेखकों का मनोबल बढ़ाया। इस प्रकार गोष्ठी का सफ़लतापूर्वक समापन हुआ।

--सविता अग्रवाल 'सवि'

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