ज़िंदगी यही तो है

01-08-2019

ज़िंदगी यही तो है

सुनील गोयल

ज़िंदगी यही तो है
कुछ पूरी कुछ अधूरी
परिवार साथ है तो पूरी
और दूर, तो अधूरी
एक ऐसी प्यास जो ना बुझती कभी
ऐसी भूख जो ना लगती कभी
एक अहसास है
कुछ पाने का कुछ खोने का
यही तो है ज़िंदगी
कुछ पूरी कुछ अधूरी।

 

साँसें नहीं है ज़िंदगी
ज़िंदगी वो उमंग है, 
जो उम्मीदों के घर में रहती है
कुछ टूटे सपने, कुछ छूटे अपने
कुछ बनती बातें, कुछ बिगड़ी बातें 
कभी तन्हा, तो कभी शोर
ये ज़िंदगी ही तो है
कुछ पूरी कुछ अधूरी।

 

ठहरती नहीं बस
भागती ही है
तभी तो ख़ास है
ना परवाह किसी की, कौन साथ है
ना परवाह कौन जुदा है
बस चलती है अपनी ही धुन में
ना रुकती किसी के लिए
सोचो तो कुछ भी नहीं
और सोचो तो सब कुछ
कुछ पाने की उम्मीद है
कुछ खोने का डर
ज़िंदगी ही तो है
कुछ पूरी कुछ अधूरी।

 

बड़ी ख़्वाहिश भी है
छोटी मुस्कान भी है
कुछ प्यार है
कुछ दर्द भी
कुछ विश्वास है, कुछ धोखा भी है
कभी मर्ज़ी से चले हमारी कभी ख़ुद की
ज़िंदगी यही तो है
कुछ पूरी कुछ अधूरी।

 

कभी सब चाहिए
कभी कुछ भी नहीं
कभी रुकना ही नहीं
कभी चलना ही नहीं
कभी रास्ते खुलें
कभी सब बंद..
क्या क्या करवाती है
और करवाती कुछ भी नहीं
यही तो है ज़िंदगी
कुछ पूरी कुछ अधूरी।

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