गाँव में हुआ जब 
पहला खून,
पहली डकैती,
पहला बलात्कार

यद्यपि कुछ भी 
पहली बार नहीं हुआ था
उनकी याददाश्त की 
समय सीमा ही थी वह

सन्न थे सब
अवाक !
लगा था उन्हें आघात 
भय से पीले पड़ने की 
हद तक

धीरे-धीरे वे सहज हुए 
फिर बाद को 
उनकी संतानें
अभ्यस्त हो गईं 
ऐसी वारदातों की

0 Comments

Leave a Comment

लेखक की अन्य कृतियाँ

पुस्तक समीक्षा
कविता
साहित्यिक आलेख
कहानी
हास्य-व्यंग्य आलेख-कहानी
सामाजिक आलेख
स्मृति लेख
आप-बीती
विडियो
ऑडियो