तुम नज़र भर ये

14-10-2014

तुम नज़र भर ये

सुशील यादव

२१२२    २१२२    २१२

 
तुम नज़र भर ये, अजीयत देखना
हो सके, मैली-सियासत देखना

ये भरोसे की, राजनीति ख़ाक सी
लूट शामिल की, हिमाक़त देखना

दौर है कमा लो, ज़माना आप का
बमुश्किल हो फिर, जहानत देखना

लोग कायर थे, डरे रहते थे ख़ुद
जानते ना थे , अदालत देखना

तोहफ़े में 'लाख', तुमको बाँट दे
क़ौम की तुम ही, तबीयत देखना

अजीयत =यातना, जहानत = समझदारी

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