ट्रिन.. ट्रिन... ट्रिन... ट्रिन... 

01-06-2020

ट्रिन.. ट्रिन... ट्रिन... ट्रिन... 

डॉ. अशोक गौतम

ट्रिन.. ट्रिन... ट्रिन... ट्रिन... 
(एक)

हैलो जी! नमस्कार! बधाई! आप इस वक़्त सीधे जुड़ चुके हैं ब्रह्मांड के इकलौते यूनिवर्स फ़ेम लॉकडाउन मर्दाना मेंटल परामर्श सेंटर से। हमारे मर्दाना परामर्श केंद्र में लॉकडाउन में सताए एक और मर्द का एकबार फिर हार्दिक स्वागत! हार्दिक अभिनंदन। कहिए हम आपका लॉकडाउन में ख़राब हुआ दिमाग़ कैसे आबाद कर सकते हैं? अपनी समस्या बेझिझक सडिटेल बताइए सर! 

 -जी सर! नमस्कार! मैं रमेश कुमार हेड क्लर्क माल महकमा दिल्ली से बोल रहा हूँ। इस कोरोना के चलते पिछले तीस सालों से बाज़ार में उड़ने वाला आज़ाद पंछी घर के पिंजड़े में बिल्कुल क़ैद होकर रह गया है। कहीं भी उड़ने को मन बहुत फड़फड़ा रहा है सर! घर के अंदर बाहर से भी टाइट कर्फ़्यू लगा है। मैं कर्फ़्यू तोड़ूँ या अपना सिर तोड़ूँ, सलाह दीजिए। पर ज़रा जल्दी कीजिए। 

-रमेश कुमार जी! कोरोना ने हवाई जहाज़ों तक की उड़ानें रोक दी हैं। ऐसे में आपकी उड़ान के कोई मायने नहीं रह जाते। लगता है, आप ऑफ़िस के मौज-मस्ती वाले जीव हैं। आपने इतने लंबे समय से मौज-मस्ती की है। हम आपकी पीड़ा को ख़ूब अच्छे से समझते हैं। पर कर कुछ नहीं सकते। हम ही क्या, ऐसे में कोई भी कुछ नहीं कर सकता। अपने मन की फड़फड़ाहट को लगाम दीजिए। मन बहलाने के लिए बीवी के साथ घर के कुछ काम कीजिए। ऐसा होने पर आपका मन भी लगा रहेगा और घर के कर्फ़्यू में ढील भी मिलेगी। तभी आप घर में ही थोड़ा बहुत फड़फड़ा सकेंगे। कुछ दिन और कर्फ़्यू में जीने की हिम्मत कीजिए। जल्दी ही आप ऑफ़िस जाने लगेंगे। ख़ुदा हाफ़िज़! 

ट्रिन.. ट्रिन... ट्रिन... ट्रिन... ट्रिन... 
(दो) 

हैलो जी! आप इस वक़्त जुड़े हैं ब्रह्मांड के इकलौते लॉकडाउन मर्दाना मेंटल परामर्श सेंटर से। हमारे मर्दाना परामर्श केंद्र में लॉकडाउन में सताए मर्दों का एकबार फिर हार्दिक स्वागत! आप हमारे साथ लॉकडाउन में उपजी समस्या बेझिझक कहिए। आपकी लॉकडाउन से उपजी हर समस्या का निदान हमारे पास है सर! आई एम सॉरी टू से दैट मैं आपकी आवाज़ सुन कन्फ्यूज़ सा हो रहा हूँ। आप मर्द ही हैं न? क्या है कि आपकी आवाज़ कुछ कुछ...कहिए, अभी हम लॉकडाउन में आपको अनलॉक करते हैं। सबसे पहले हमें अपनी डिटेल्स बताइए अपनी सर! 

- जी मैं हरी राम चौरसिया मुंबई से! घर के काम करते करते उँगलियों में लालिमा आने लगी है। दाएँ हाथ की उँगलियों में सूजन भी हो गई है। क्वॉरंटीन सेंटर में अधिक से अधिक कितने समय तक रह सकते हैं?

-डरिए मत! चिंता की कोई बात नहीं। वर्क फ़ॉर होम करते करते ही आपकी उँगलियों में लाल लाल निशान पड़े हैं। ये कोरोना के शुरूआती लक्षण नहीं। घर में काम न करने की आदत के लक्षण हैं। दाएँ हाथ की उँगलियों में जो सूजन है, लगता है, वह सूजन भी घर के बरतन धोकर ही आई है। वर्क फॉर होम करने वाले सैंकड़ों के साथ ऐसी ही कॉमन समस्याएँ हम तक आ रही हैं। धीरे-धीरे जैसे-जैसे आपको घर के काम करने की आदत पड़ जाएगी, आपकी उँगलियों की लालिमा, हाथों की सूजन ठीक हो जाएगी। बस, आप मन से हाथों की उँगलियों की सूजन, लालिमा पर अपना ध्यान केंद्रित करने के बदले बरतन धोने और घर के दूसरे कामों में पर सेंट्रलाइज़ कीजिए। लाभ ही लाभ होगा। जय कोरोना! जय लॉकडाउन!

ट्रिन.. ट्रिन... ट्रिन... ट्रिन... ट्रिन….
(तीन)

 -हैलो जी! ब्रह्मांड के इकलौते लॉकडाउन मर्दाना मेंटल परामर्श सेंटर में आपका तहेदिल स्वागत है। कहिए, हम लॉकडाउन में आपकी कौन सी समस्या का सैल्यूशन दे सकते हैं? सबसे पहले आप हमें अपना नाम पता बताइए सर! हम आपकी समस्या सुनने के लिए बहुत बेचैन हैं चाचू!

- जी नमस्कार! मैं बद्री प्रसाद नैनीताल से। कुछ दिनों से आई फ़ील कि ज्यों दाल सब्ज़ी में अपने दिए तड़के की बास नहीं आ रही। कुछ भी सूँघने की शक्ति दिन दिन कम होती जा रही है। ऐसे में मैं क्या करूँ? कहीं ये कोरोना के संक्रमण के लक्षण तो नहीं।

-जी नहीं! घबराइए मत बद्री जी! आप बिल्कुल स्वस्थ हैं। आप जैसों का कोरोना बाल भी बाँका नहीं कर सकता। भले ही आपके सिर पर एक भी बाल न हो। आपकी समस्या है कि बीवी के होते हुए अपने दिए दाल, सब्ज़ी में तड़के की बास आना बंद हो रही है। इसके बारे में हम आपको आईने की तरह साफ़ कर दें कि यह कोरोना के कारण नहीं, बल्कि वर्क फॉर होम के ही कारण हो रहा है। जब बार-बार अपने हाथ की बनाई दाल सब्ज़ी खाई जाए तो उसका स्वाद अपने को लगना बंद हो जाता है। ख़ुशबू बदबू में बदल जाती है। देशी घी का तड़का लगाने के बाद भी लगता है ज्यों सबसे घटिया तेल का तड़का लगाया हो। इसलिए जो आप अपना लगाया तड़का सूँघ नहीं पा रहे हैं तो डरने की क़तई ज़रूरत नहीं। इस संक्रमण का इलाज यही है कि बीवी को तड़का लगाने के लिए बीच-बीच में मनाते रहें तो आपकी सूँघने की शक्ति बनी रहेगी। हमारे साथ जुड़ने के लिए आपका बहुत बहुत आभार!

ट्रिन.. ट्रिन... ट्रिन... ट्रिन...
(चार)

जी हैलो सर! ब्रह्मांड के इकलौते हर लोक प्रसिद्ध लॉकडाउन मर्दाना मेंटल परामर्श सेंटर में आपका दिल की गहराइयों से स्वागत है। वाह! कितनी प्यार आवाज़ है आपकी। कोरोनाकाल में कोयल सी। महीनों बाद सुनी ऐसी आवाज़! कहिए, हम आपकी कौन सी कोरोनाकाल में जन्मी समस्या का चुटकियों में हल करें? पहले अपना परिचय दीजिए प्लीज़!

-जी नमस्कार! मैं गीताराम हैदराबाद से बोल रहा हूँ। पहले तो आपका बहुत बहुत धन्यवाद करना चाहूँगा कि आपने मर्दों के इस संकट के काल में ब्रह्मांड के समग्र वर्ग के मर्दों के समस्या समस्या में मनोरंजन के अवसर दिए हैं।

-जी.. जी! हमारी तारीफ़ के लिए आपका बहुत बहुत शुक्रिया। कोरोनाकाल में अपनी क्रोनिक समस्या हमें बताइए और....

- जी मेरी समस्या ये है कि मैं अपने पत्नीश्री से दूरी को लेकर असमंजस में हूँ। जब वह ऑफ़िस में होती थीं, तो दूरी का कोई सवाल ही नहीं था। अब घर में हैं तो... आप यह बताइए कि जो उनका घर के कामों में हाथ बँटाने को मन कर ही जाए तो उनसे कितनी दूरी रखना ज़रूरी है ताकि...

- जी! आपकी समस्या भी वही है जो हमारे नौकरी करने वाली हज़ारों पत्नियों के पतियों की है। तो देखिए! आप जब घर के काम कर रहे हों तो उनको घर के काम आपको करते देखकर क़तई भी भावुक न होने की सलाह दें। वैसे हमारे हिसाब से वे आपको घर के काम करते देख वे भावुक तो होती नहीं होंगी, पर इन दिनों उन्हें ऐसा न करने दें प्लीज़! घर के काम करते हुए इन दिनों भी उन्हें अपने से दूरी बनाए रखने का तकाज़ा कीजिए। यही आपके मेंटल स्वास्थ्य के लिए बेहतर रहेगा। चार दिन के लिए क्या किसीका अहसान लेना? जब ऑफ़िस खुल जाएँगे तो भी तो सब आपको ही तो सब करना है।

 -तो ऐसा करने से हमारे भावनात्मक संबंधों पर कोई फ़र्क तो नहीं पड़ेगा सर?

-आप अपने भावनात्मक संबंधों की लापरवाही के चलते सोशल डिस्टेंसिंग भूल गए तो?? देखिए! ये भावनात्मकता ही संक्रमण की सबसे बड़ी जड़ है। हमें इस जड़ को जड़ से काटना है। इसलिए आपकी सुरक्षा इसी में है कि आपकी पत्नीश्री जब आपके साथ घर के काम करने को हाथ बढ़ा ही दें तो ख़ुद ही सोशल डिस्टेंसिंग बनाए रहिए। हो सके तो उन्हें इन दिनों बिस्तर पर पूरा आराम करने की सलाह दें। इससे भावनात्मक संबंध बड़े मज़बूत होंगे। 

ट्रिन.. ट्रिन... ट्रिन... ट्रिन...
(पांच)

हैलो! लॉकडाउन मर्दाना मेंटल परामर्श सेंटर में आपका दिल की गहराइयों से स्वागत है। कहिए, हम आपका लॉक डाउन में ख़राब हुआ दिमाग़ कैसे पटरी पर ला सकते हैं? आई मीन! आपको रिलैक्स कर सकते हैं? 

 -गुड मार्निंग जी! पर पटरी पर हमारा दिमाग मत लाइए प्लीज! क्या पता वहाँ से कब कहाँ से ट्रेन आ जाए और…

 -वैरी वैरी गुड मार्निंग जी! चलो, आपका दिमाग़ हाइवे पर लाते हैं। अपनी डिटेल बताइए सर! 

-मैं धनपत बागपत यूपी से। पता नहीं इन दिनों क्यों मुझे अपनी बीवी में संक्रमण लग रहा है। उसे चाय बनाने को कहता हूँ तो चिढ़ती कहती है कि तुम्हारे क्या हाथ नहीं? उसे दाल पाने को कहता हूँ तो गुस्साती कहती है, खुद डाल लो। देखते नहीं मैं फेसबुक पर लाइव हूँ। अब सरजी! आप शादी-शुदा हों तो कहिए, आदमी शादी क्यों करता है? आराम से चारपाई पर ही बैठकर खाने को न? मुझे लगता है वह कोरोना संक्रमित हो रही हो जैसे? घर बैठे संक्रमण की पहचान करने का कोई तरीका है क्या? उसके कोरोना संक्रमण की पहचान कैसे हो सकती है?

-बड़ा वाजिब सवाल है आपका। स्वर्गलोक के मर्दों की भी इन दिनों यही समस्या है। आदमी औरत दोनों शादी ब्याह इसलिए ही करते हैं कि वे एक दूसरे से घर के कमा करवा सकें। ऐसे में जो जीता वहीं सिकंदर। लगता है..... आपकी नॉलिज में इज़ाफ़ा करते बता दें कि कोरोना संक्रमण की पहचान को कुत्तों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। जैसे ही वे इस संक्रमण को सूँघ कर पहचानने लगेंगे आपकी समस्या का हल हो जाएगा। क्योंकि आदमी के हर क़िस्म के दिमाग़ी संक्रमण तक की गंध को पहचानने की उनमें अद्भुत शक्ति होती है।

पर तब तक शांत होकर तेल देखते रहिए। तेल की धार देखते रहिए। अपने को जैसे कैसे एडजस्ट करते रहिए..…

हाँ तो सर! तो हम बोल रहे हैं आपके पसंदीदा ब्रह्मांड के इकलौते मर्दाना मेंटल परामर्श सेंटर से। और मर्दों को भी कहिए कि हमसे जुड़िए और कोरोनाकाल में अपने स्वस्थ बीमार जीवन की ओर मुड़िए। हमें कोरोनाकल में जन्मी अपनी हर समस्या बताइए और जादूगर से भी तेज़ी से उसका समाधान पाइए। जब कहीं न मिले आपकी समस्या का समाधान! तो बस एक ही जाना पहचाना नाम! कोरोना मर्दाना मेंटल परामर्श सेंटर! हमसे जुड़िए चौबीसों घंटे। हम सुलझाएँगे आपके हर क़िस्म के टंटे। हमसे संपर्क करने के लिए हामारा टोल फ़्री नंबर है- बीस चार सौ बीस बीस चार सौ बीस शून्य शून्य। हमसे परामर्श लेते रहिए। लॉकडाउन लॉकडाउन कहते रहिए। 

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