तेरी बातों में

उत्तम टेकड़ीवाल

आँसू भी बरसते हैं कभी,
जब भीगता हूँ बरसातों में।
मन बहल जाता है यूँ ही,
दुनियादारी की तेरी बातों में।

मतलब से भरा दिल का घड़ा,
दर्द है भार से दिल के हाथों में।
मतलब नहीं समझ सका अब तक,
समझदारी की तेरी बातों में।

वफ़ा की वो मोटी चादर
फटी पड़ी थी बर्फ़ीली रातों में।
अपने ईमान को चुग रहा हूँ,
ईमानदारी की तेरी बातों में।

तोल-मोल कर बिक रहा प्यार,
हिसाब बराबर रखा खातों में।
बिक गए सारे ख़ुशी के पल वो,
दुकानदारी की तेरी बातों में।

दौड़ता, गिरता, फिर रहा हूँ,
ढ़ूँढ़ू तुझे इन आघातों में।
उलझा रहा जाल में शब्दों के,
इधर-उधर की तेरी बातों में।

ख़ुशी के फूल खिलते हर पल,
महके यादों की बारातों में।
ओम की ध्वनि गूँज रही है,
प्यारी प्यारी तेरी बातों में।

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