01-03-2019

सोशल मीडिया का राजकुमार

संजीव जायसवाल 'संजय'

रात के बारह बज रहे थे। चारों ओर सन्नाटा छाया हुआ था। पढ़ाई पूरी करने के बाद देवांग गहरी नींद में सो रहा था। उसका स्मार्ट फोन मेज़ पर रखा हुआ था।

अचानक स्मार्ट फोन से ‘एस.एम.एस.’ बाहर निकला और हाथ नचाते हुये बोला, “मैं हूँ सोशल मीडिया का राजकुमार। पहले लोगों का संदेश पहुँचाने में हफ़्तों लगते थे लेकिन मैं पलक झपकते ही संदेश पहुँचा देता हूँ। इसलिये मैं हुआ सोशल मीडिया का राजकुमार।”

“राजकुमार नहीं तुम सोशल मीडिया के बंदर हो बंदर,” तभी फ़ेसबुक ने स्मार्टफोन से बाहर निकलते हुये कहा।

“तुमने मुझे बंदर क्यूँ कहा?” एस.एम.एस ने मुँह बनाया।

“तुम्हारा न कोई रूप न कोई रंग। बस तुम दुनिया में थोड़ा पहले आ गये थे इसलिये तुम्हारी तुलना इन्सानों के पूर्वज बंदरों से की जा सकती है,” फ़ेसबुक हँसा फिर बोला, “सोशल मीडिया का असली राजकुमार तो मैं हूँ। पूरी दुनिया में अरबों लोग मेरे दीवाने हैं। मैं न केवल उनके संदेश पहुँचाता हूँ बल्कि उनकी फोटो, वीडियो, ऑडियो सब कुछ पहुँचाता हूँ।”

“लेकिन फटाफट संदेश लाना ले जाना हो तो मैं ही सबके काम आता हूँ,” एस.एम.एस. ने धीमे स्वर में कहा। फ़ेसबुक की उपयोगिता सुन उसका मन बुझ सा गया था।

“तुम किस ज़माने की बात कर रहे हो? आज कल लोग संदेश भेज कर उसके उत्तर का इंतज़ार नहीं करते बल्कि मेरी मदद से डायरेक्ट चैटिंग करते हैं,” फ़ेसबुक ने अकड़ते हुये उसकी बात काटी।

“ऐ, ज़्यादा गप्प मत हाँक,” तभी व्हाटसऐप, स्मार्टफोन से बाहर निकला और हाथ नचाते हुये बोला, “आज कल किसके पास इतनी फ़ुर्सत है कि चैटिंग के लिये तुम्हारे दरवाज़े खोले और बंद करे।”

"दरवाज़े? कैसे दरवाज़े?" फ़ेसबुक ने पूछा।

“अरे, तुम्हें चलाने से पहले ‘लॉग-इन’ और बाद में ‘लॉग-आउट’ करना किसी दरवाज़े को खोलने और बंद करने से कम झंझटी है क्या?” व्हाटसऐप ने मुँह बनाया फिर अकड़ते हुये बोला, “आज कल तो लोग संदेश भेजने के साथ-साथ चैटिंग करने के लिये भी मुझे ही पंसद करते हैं। क्योंकि मैं चौबीसों घंटे सेवा में मौजूद रहता हूँ। मेरे साथ ताला और दरवाज़ा खोलने का भी कोई झंझट नहीं। इसलिये सोशल मीडिया का असली राजकुमार मैं हुआ।”

“ज़्यादा शेखी मात झाड़। पूरी दुनिया जानती है कि तेरी कंपनी को मेरे मालिक ने ख़रीद लिया है। अब तुम राजकुमार नहीं मेरे गुलाम हो,” फ़ेसबुक ने आँखें तरेरीं।

यह व्हाट्सऐप की कमज़ोर नस थी। फ़ेसबुक की बात सुन वह तिलमिला उठा। वह कोई तीखा उत्तर देने जा रहा था कि तभी ट्वीटर उछलता हुआ बाहर आया और आँखें नचाते हुए बोला, “तुम सब बेकार की बहस मत करो। आज कल एस.एम.एस, फ़ेसबुक और वहाट्सऐप का इस्तेमाल तो राह चलता आदमी भी करता है। लेकिन बड़ी-बड़ी सेलीब्रेटीज़ की आँखों का तारा तो मैं ही हूँ। उनकी एक-एक ट्वीट को लाखों-करोड़ो लोग फ़ॉलो करते हैं, री-ट्वीट करते हैं। इसलिये सोशल मीडिया का असली राजकुमार मैं हुआ।”

ट्वीटर की बात ख़त्म भी नहीं हुई थी कि नया-नवेला इंस्टाग्राम बीच में कूद पड़ा। फिर तो होड़ सी लग गयी। स्काईप, मैसेंजर, वाईबर, हैंगआउट जैसे महारथी मैदान में आ गये और अपने-अपने को सोशल-मीडिया का राजकुमार साबित करने लगे।

देवांग गहरी नींद में सो रहा था लेकिन उसकी मेज़ पर एक लिफाफा रखा हुआ था। वह काफ़ी देर से सभी की बातें सुन रहा था। उससे रहा नहीं गया। उसने अपना हाथ उठाते हुये कहा, “शांत हो जाओ भाइयो। शांत। मेरे पास एक तरीक़ा है जिससे साबित हो जायेगा कि तुम सब में असली राजकुमार कौन है।”

“कैसा तरीक़ा? जल्दी बताईये,” सारे दावेदार एक साथ बोल पड़े।

“तुम सभी संदेश पहुँचाने के महारथी हो?” लिफाफे ने पूछा।

“हाँ,” सभी ने सिर हिलाया।

“देवांग भैया को इंजीनियरिंग में एडमीशन लेनी है। उनका फ़ॉर्म और बैंक-ड्राफ़्ट मेरे पास है। तुम में जो सबसे पहले इन्हें पहुँचा आयेगा वही सोशल मीडिया का असली राजकुमार होगा,” लिफाफे ने कहा।

‘‘यह तो बहुत आसान है। आप दोनों का स्कैन करवा दीजये। मैं फटाफट पहुँचा आता हूँ,” फ़ेसबुक और इंस्टाग्राम एक साथ बोले।

“स्कैनिंग की ज़रूरत नहीं। आप दोनों की फोटो खींच दीजिये। मैं पलक झपकते पहुँचा दूँगा,” व्हाट्सऐप ने अकड़ते हुये कहा।

यह सुन लिफाफा हल्का सा हँसा फिर बोला, “क्या आप लोगों को लगता है कि कॉलेज वाले बिना ओरिजनल फ़ॉर्म और बैंक वाले बिना ओरिजनल ड्राफ़्ट के मान जायेगे?”

यह सुन सन्नाटा छा गया। तब लिफाफे ने टोका, "तुम सब लोग बहुत तेज़ और शक्तिशाली हो। देवांग भैया तुम सबके दोस्त हैं। क्या तुम लोग उनका इतना छोटा सा काम नहीं करोगे?”

“माफ करना। यह काम मैं नहीं कर सकता,” फ़ेसबुक ने अपनी आँखें झुका लीं।

“तुम दोनों तो बिल्कुल लेटेस्ट टेक्नालोजी से लैस हो। क्या तुम लोग भी इतना छोटा सा काम नहीं कर सकते?” लिफाफे ने ट्वीटर और इंस्टाग्राम से पूछा।

उन दोनों ने भी अपनी आँखें झुका लीं। लिफाफे ने एक-एक करके स्काईप, मैसेंजर, एस.एम.एस., एम.एम.एस, वाईबर, ब्लूटुथ और हैंगआउट सहित सोशल मीडिया के सभी महारथियों से पूछा लेकिन यह काम कर पाना किसी के भी बस में न था।

“जानते हो यह काम कौन कर सकता है?” लिफाफे ने पूछा।

“कौन कर सकता है?” सभी एक साथ बोले।

“पाँच रुपये का यह लिफाफा जिसे तुम लोग गुज़रे ज़माने की बेकार चीज समझते हो,” लिफाफे ने सभी पर एक दृष्टि दौड़ायी फिर बोला, “मैं पहुँचाऊँगा देवांग भैया का फ़ॉर्म और ड्राफ़्ट ताकि उनका अच्छे से कॉलेज में एडमीशन हो सके।”

“तब तो सोशल-मीडिया के असली राजकुमार आप हुए,” ट्वीटर तपाक से बोला।

“नहीं, हम में से कोई भी राजकुमार नहीं हैं। हम सब मनुष्य की सुविधा के लिये बने हैं। जैसे फ़्रिज, ए.सी., कूलर, पंखा सब बिजली परिवार के हैं लेकिन सबकी अपनी-अपनी उपयोगिता है। वैसे ही हम सब भी एक ही परिवार के हैं। हम में कोई भी छोटा-बड़ा नहीं है। हम सबका काम मनुष्य के जीवन को आसान बनाना है,” लिफाफे ने शांत स्वर में समझाया।

लिफाफे की बात सबकी समझ में आ गयी। सभी ने प्रण किया कि वे अब कभी आपस में बहस नहीं करेगें और देवांग भैया के लिये जी-जान से काम करेगें।

0 Comments

Leave a Comment