मंच पर जैसे ही निर्णायकों ने इशारा किया, छः वर्षीय सरगम घबराती हुई सी प्रकट हुई। उसके साथ माइक पकड़े संचालक महोदय थे। स्टेज के एक तरफ तीन सदस्य निर्णायक की भूमिका में विराजमान थे। दूसरी तरफ बहुत से एक्सपर्ट हाथ में रिपोर्ट जैसी चीज़ लिए हुए बैठे थे। सामने एक बड़ा सा स्क्रीन बोर्ड था। एक जज ने पूछा आपका नाम क्या है?" 

"…"

"आप यहाँ क्या करने आई हैं?"

"…"

बच्ची को चुप देखकर एक जज ने इशारा किया "म्यूज़िक।" संगीत बजते ही सरगम के पाँव थिरकने लगे। सामने स्क्रीन पर नृत्य के लिए मिले अंकों की संख्या फिसलने लगी। ...सत्तर...सत्तासी...सत्तानवें...सौ। निर्णायकों ने संगीत रुकवा दिया तो सरगम के थिरकते पाँव भी रुक गए। निर्णायक अचंम्भित…! दर्शक मंत्रमुग्ध इतनी सी उम्र और इतना उत्कृष्ट प्रदर्शन...!

एक निर्णायक ने प्यार से अंग्रेज़ी में पूछा, "मेरी नन्हीं डांसर, आपका नाम क्या है?"

"सरगम, नर्सरी बी"

"वेरी गुड, बड़ा प्यारा नाम है। सरगम, बेटा ये डांस आपको किसने सिखाया?"

"मेरी डांस मैम ने।"

उत्तर सुनकर दर्शक दीर्घा में बैठी इशिता को खीझ हुई। "कितना सिखाया था कि कहना, मैंने ख़ुद सीखा है, टी.वी. में आपका डांस देखकर; उसे मालूम था कि ऐसे उत्तर सुनकर जज बहुत ख़ुश होंगे। मगर नहीं, अपने बाप की तरह ज़िद्दी है।"

तभी दूसरे जज ने पूछा, "बेटा आपको यहाँ कौन लेकर आया?"

"जी, मम्मा।" वह रोने-रोने को हो आई। उसे मुँह बिसूरता देखकर एक जज कुर्सी छोड़कर उसके पास आई, "अरे अरे मेरी प्यारी सरगम। रोते नहीं बेटा....।"

दूसरी जज ने उसे पास बुलाने की कोशिश की, "आओ, सरगम मेरे पास आओ। देखो, मेरे पास क्या है?"

तब तक तीसरे निर्णायक ने कहा. "अपनी इस नन्हीं सी डांसर को सफलता की टोपी तो मैं ही पहनाऊँगा।" इतने में ही कार्यक्रम संचालक इशिता को लेकर स्टेज पर आया।

"ओह, तो आप हैं, सुपर डांसर की सुपर माॅम।" जज ने कहा तो वह मुस्कुराकर रह गई।

"आपने कैसे जाना कि आपकी बेटी डांसर है?"

"मैडम, जब सरू... हम लोग सरगम को प्यार से सरू कहकर बुलाते हैं।"

"जी...!" जज ने कहा।

"जब सरू सात महीने की थी, तब यह संगीत की धुन पर हाथ पैर मारने लगती थी। मैंने उसी समय तय किया था कि डांस सिखाऊँगी, मगर यह यहाँ तक पहुँचेगी, मैंने नहीं सोचा था," कहते-कहते इशिता का गला भर आया, "उसकी व्यावहारिक बुद्धि बहुत प्रबल है।"

"आपकी बेटी, डांस के बेस्ट शो बूम बूम के लिए सेलेक्ट हो गई है। कैसा लग रहा है?"

"मैडम, मैं बहुत ख़ुश हूँ। मैं बता नहीं सकती कि यहाँ तक पहुँचने के लिए मैंने क्या परेशानियाँ उठाईं। यहाँ तक कि मेरे पास मुम्बई आने के लिए किराया भी नहीं था। इसके लिए मैंने वो रिंग बेच दी जो इसके पापा ने मुझे इंगेजमेण्ट में दी थी।" इशिता रुआँसी हो गई। 

"ओह, आई एम सारी। मगर अब आप क्यों रो रही हैं? अब तो आपकी बेटी सेलेक्ट हो गई है न,” जज ने गोद से सरगम को उतारते हुए कहा, "जाओ बेटा, अपनी मम्मा के पास जाओ।" 

वह भागकर इशिता से लिपट गई। इशिता कुछ कहती, उससे पहले ही जज ने इशारा कर दिया "नेक्स्ट।" संचालक ने इशिता व सरगम को स्टेज से बाहर लाकर छोड़ दिया।

इशिता बहुत ख़ुश थी। उसने एक नज़र होटल के सुसज्जित कमरे पर डाली। अब इस कमरे में उसे तब तक रहना है जब तक सरगम डांस शो में अपनी जगह बनाए रखेगी। उत्साहित इशिता ने प्यार से सरगम को देखा। वह गहरी नींद में सो चुकी थी, परन्तु इशिता। ......इशिता अपने सपनों के साथ जागना चाहती थी। वे सपने, जो उसने बचपन से देखे थे और अब उसकी बेटी के माध्यम से पूरे होने जा रहे थे।

    अभी कल तक इशिता एक ऐसी घुटन भरी ज़िन्दगी जी रही थी, जहाँ न रहने के लिए ढंग की जगह थी और न अच्छा खाना। यद्यपि वह शुरू से ही अति महत्वाकांक्षी थी उसने कॉलेज के दिनों में ही नमन से यह सोचकर प्रेम विवाह किया था कि पढ़ने-लिखने में ज़हीन नमन की काॅलेज छोड़तेे ही अच्छी नौकरी लग जाएगी, मगर ऐसा नहीं हुआ। अन्ततः नमन ने एक प्राइवेट फ़र्म में नौकरी कर ली। वेतन इतना कम था कि दैनिक जीवन की आवश्यकताएँ भी बड़ी मुश्किल से पूरी होती हैं। क़िस्मत की लकीरें बड़ी अजीब होती हैं, जो रहती तो इंसान की अपनी मुट्ठी में, मगर उसके क़ाबू में नहीं होती। इशिता की क़िस्मत की लकीरें भी उसके क़ाबू में कहाँ थीं? अपने अरमानों का यूँ ख़ून होते वह दिन पर दिन चिड़चिड़ी होती जा रही थी। इशिता बात बात पर नमन से झगड़ा करती, उसे ताने मारती, परन्तु नमन ने मौन साध लिया। इसी बीच सरगम का जन्म हुआ तो नमन ने फिर से अपनी ज़िन्दगी में नए रंग भरने शुरू कर दिए। ‘तू मेरी मुहब्बत की गुलिस्तां का ख़ूबसूरत फूल है, तेरी ख़ुशबू से ज़िन्दगी का चमन महक उठेगा।’ पर ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। उसकी बेरंग ज़िन्दगी धुआँ-धुआँ ही रही। उनके परस्पर झगड़े बढ़ते ही जा रहे थे। विचारों की दिशा सही होने पर भावनाएँ नियंत्रित की जा सकती हैं, पर यहाँ तो वैचारिक मतभेद इतने बढ़ चुके थे कि उन दोनों के बीच सुख की कल्पना भी व्यर्थ हो चुकी थी। उनके आपसी सम्बन्धों का असर सरगम पर पड़ रहा था। वह सहमी-सहमी सी रहने लगी। उसका बचपन प्रेम के अभाव में कुंठित हो रहा था। नमन इस बात को समझ रहा था, वह इशिता को समझाने की कोशिश करता तो परिणाम उल्टा होता। कलह, असन्तोष के बाद एक लम्बी संवादहीनता उन दोनों के बीच पसर जाती। इन सबके बीच जो नहीं रुका, वह था वक़्त। वह अपनी रफ़्तार से गुज़र रहा था। सरगम स्कूल जाने लगी। साथ ही इशिता ने शाम के समय उसे डांस स्कूल में भेजना शुरू कर दिया। नमन ने इसका विरोध किया, पर इशिता के आगे उसकी एक न चली।.…

    एक दिन इशिता ने टी.वी. में बूम बूम लिटिल डांस शो का विज्ञापन देखा, जिसका आॅडिशन उसके ही शहर में हो रहा था। बस, फिर क्या उसने सरू को आॅडिशन दिलाने का निश्चय किया। इस विषय में उसने नमन से कोई बात न की, क्योंकि उसे अच्छी तरह मालूम था कि वह राज़ी नहीं होगा। ‘चाइल्ड साइकोलाॅजी का विशेषज्ञ जो बनता है। इशिता जब आॅडिशन स्थल पर पहुँची, तो पहले से ही बहुत भीड़ थी। उसके आगे कम से कम सौ लोग लाइन में लगे हुए थे। धक्का-मुक्की, चिल्ल-पों, झगड़ा झंझट के बीच शाम पाँच बजे उसका नम्बर आया। सरगम तो थककर सोने लगी थी। बड़ी मुश्किल से आॅडिशन देने के लिए तैयार हुई, पर सन्तोष की बात थी कि उसका चुनाव हो गया। बाद में पता चला कि वह फ़र्स्ट राउण्ड था, अगले दिन फिर आना होगा। दूसरे दिन फिर वही क़वायद। उस दिन सरगम को चार बार परफ़ॉर्म करना पड़ा, तब जाकर सेलेक्शन हुआ।

किसी प्रकार सरगम ने पहला पड़ाव तो पार कर लिया, पर टी.वी. शो में जाने के लिए अगला आॅडिशन मुम्बई में देना था। अब नमन से बात करना ज़रूरी था। इसीलिए रात में खाने के साथ उसने बात शुरू की।

"हमारी सरू बूम बूम डांस शो के लिए सेलेक्ट हुई है। अब हमें मुम्बई जाना है।"

"इशी, अभी सरू बहुत छोटी है, केवल छः साल की। उस पर अपनी महत्वाकांक्षाओं का बोझ न डालो। उसका बचपन उसे जी लेने दो," नमन ने प्यार से इशिता को समझाने की कोशिश की।

"अच्छा, टी.वी. में इतने छोटे छोटे बच्चे आते हैं और परफ़ॉर्म करते हैं तो क्या वे अपना बचपन नहीं जी रहें हैं? तुम्हारी दक़ियानूसी सोच न…,” उसने वाक्य अधूरा ही रहने दिया।

"देखो इशी, तुमने नहीं बताया तो क्या। मैं देख रहा हूँ, सरू दो दिन में ही कितनी बुझी-बुझी रहने लगी है। थकी तो इतनी होती है कि ठीक से खा भी नहीं पाती।"

"तुम भी तो थक जाते हो, खाना क्यों नहीं छोड़ देते। तब तो रोज़ आते ही....… अरे उसका खाने का मन नहीं होगा।"

"क्या तुमने यह जानने की कोशिश की कि उसका मन क्यों नहीं है? हर काम करने की एक उम्र होती है। वक़्त से पहले उस पर बोझ डालना उचित नहीं है।"

"उफ़ तुम्हारी इसी सोच ने तुम्हें आगे नहीं बढ़ने दिया। उद्यमेन सिध्यन्ति कार्याणि तुम्हारी तरह नहीं कि अजगर करै न चाकरी।" इशिता के हेय आरोपणों से बचने के लिए उसने पलायन का सहारा लिया और रोती हुई सरगम को लेकर कमरे से बाहर चला गया। वह इशिता की तेज़ आवाज़ से जाग कर रोने लगी थी।

न चाहते हुए भी नमन ने दो टिकटों का इंतज़ाम कर दिया था। ज़रूरत के हिसाब से थोड़े रुपये भी दे दिए थे, पर मुम्बई जैसे शहर में कोई परेशानी न हो, इसलिए इशिता ने अपनी अँगूठी बेच दी। हालांकि वह उस अँगूठी को बहुत दिनों से बेचने की सोच रही थी, क्योंकि उसे उसका डिज़ाइन पसन्द नहीं था। परन्तु इशिता ने जिस नाटकीय ढंग से निर्णायकों के सामने अँगूठी बेचने की बात का ज़िक्र किया, उससे वह अपने लिए सहानुभूति का माहौल बनाने में सफल हुई थी। वह आत्ममुग्ध हो उठी। वार्तालाप की कला से सफलता की गति बढ़ जाती है। वह तो माहिर है इस कला में। उसे अपने काॅलेज के दिन याद आए। जब वह नाटकों में भाग लेती थी। अपने अभिनय से वह पात्र को जीवन्त बना देती थी। नमन तो उसका बहुत प्रशंसक था। उसके परस्पर प्रेम का एक कारण दोनों का नाटक प्रेम भी था। मगर वक़्त के साथ...। उसने एक गहरी साँस ली सोचा, क्या पता आज नमन ने भी शो देखा हो। काफ़ी समय बाद उसके मन में नमन के प्रति प्रेम जाग्रत हुआ। पता नहीं इस वक़्त वह क्या कर रहा होगा? क्यों न फोन पर उससे बात कर लूँ? मगर अगले ही पल विचार आया। नमन भी तो एक फोन कर सकता था। पर नहीं, उसे हम दोनों की फ़िक्र है ही नहीं। तभी सोती हुई सरगम ने करवट ली तो इशिता ने उसे अपने पास चिपटा लिया।

सरगम के नृत्य प्रदर्शन ने शो में तहलका मचा दिया था। जो भी उसका नृत्य देखता, मुँह में उँगली दबा लेता। बूम बूम के प्रत्येक शो में कोई न कोई सेलेब्रिटी आता उस छोटी सी बच्ची के प्रदर्शन की प्रशंसा करता, उसे प्यार करता। कभी ‘परफ़ॉर्मेन्स आॅफ़ द डे,’ तो कभी ‘मोस्ट प्रिटी डांसर’ जैसे ख़िताब उसे मिलते। उससे दर्शकों से वोट डालने की अपील करवाई जाती। सरगम पूरा वाक्य बोल भी न पाती थी, पर वह बोलने की कोशिश करती। वह सब कुछ करती, जो संयोजक उसे करने को कहते। अगर न कर पाती तो इशिता को ग़ुस्सा आने लगता। आखिर इतनी मेहनत के बाद यहाँ तक पहुँची थी। सरगम के साथ इशिता को भी स्टेज पर आने का मौक़ा मिल जाता। उसके मन में वर्षों की दमित इच्छाएँ अपना सिर उठाने लगीं थीं। उसे अब इसका ध्यान नहीं था कि ‘सरगम क्या चाहती है? उसके सोने जागने, बोलने पहनने यहाँ तक कि चलने तक का स्टाइल नियंत्रित हो रहा था। वह ऊबने लगी थी, पर इशिता को डर लगता कि कहीं कुछ गड़बड़ हो गई तो वह शो से बाहर हो जाएगी, इसीलिए अलग से भी उसे प्रैक्टिस करने को कहती। एक छोटी सी बच्ची पर क्या मनोवैज्ञानिक प्रभाव पड़ रहा है, इसकी ओर इशिता का ध्यान न था। सरगम हँसना भूल गई थी पर उसे जनता वोट ख़ूब मिल रहे थे, जज प्रसन्न थे और इशिता की ख़ुशी का तो ठिकाना ही न था, क्योंकि अपने नृत्य कौशल से सरगम फ़ाइनल शो तक पहुँच गई थी। इस दौरान कभी उसके शहर की तस्वीरें दिखाई जाती। कभी उसके स्कूल टीचर की बातें सुनाई जाती। कभी उसके क्लास के मित्रों से उसके बारे में पूछा जाता। सब के सब उसकी ख़ूब प्रशंसा करते। सरू को ताज्जुब होता कि ‘इन शो वालों को ये सब कैसे पता चल जाता है?’

एक दिन एंकर ने कहा, ‘सरगम, आज हम आपके लिए सरप्राइज़ लेकर आए हैं, पर पहले अपनी आँखें बंद कर लो।’ तभी नमन स्टेज पर प्रकट हुआ। आँखें खोलने पर पापा को देखकर वह खिल उठी। बहुत दिन बाद वह इतनी ख़ुश दिखाई दी थी। रात में उसने पापा से कहा कि वह उसके साथ घर जाना चाहती है। तब नमन ने इशिता से कहा था, ’मुझे लगता है कि सरू यहाँ ख़ुश नहीं है।’

"क्यों ख़ुश नहीं है। अभी उसे समझ ही कितनी है? हम ही उसे सही ग़लत बताएँगे।"

"ठीक है, मगर यहाँ वह जितनी मेहनत कर रही है, वह उसकी उम्र के लिहाज़ से बहुत है।"

"अरे, आज थोड़ी मेहनत कर लेगी तो कल का भविष्य उज्जवल हो जाएगा। नहीं तो तुम्हारी तरह ज़िन्दगी भर सड़ती रहेगी किसी गटर में," सुनकर नमन ने हथियार डाल दिये। अगले दिन वह चला गया।

शो के फ़ाइनल वाले दिन सरगम ने कत्थक पर आधारित अपनी विशेष प्रस्तुति दी। उसने संगीत की ध्वनि पर शिव स्तुति के बोल पर नृत्य किया था-

जटाटवी गलज्जल प्रवाह पावित स्थले, गलेऽवलम्ब्य लम्बिता भुजंगतुंगमालिकाम्।
डमड्डमड्डमड्ड मन्निनादवंगमर्वय चकार चण्ड्ताण्डवं तनोतु नः शिवः शिवम्।

    जैसे ही सरगम की प्रस्तुति समाप्त हुई। चारों तरफ़ तालियों की गड़गडा़हट, वाह-वाह का शोर। वह घबरा उठी। स्क्रीन पर चमकते शत प्रतिशत अंक। निर्णायकों ने उसकी भूरि-भूरि प्रशंसा की। संचालक ने कहा- स्क्रीन के अंकों के साथ दर्शकों से मिले वोट भी हमारे पास आ चुके हैं। परन्तु रिज़ल्ट हम बताएँगे आपको एक छोटे से ब्रेक के बाद। हम जल्द लौटेंगें, तब तक आप कहीं मत जाइएगा, क्योंकि हम बताएँगे कौन है बूम बूम डांस के रियलिटी शो का विनर।

    अन्तराल के बाद एंकर फिर से हाज़िर हुआ तो आइए जानते है आज के विनर का नाम...। सबकी साँस रुकी हुई, तभी तेज़ संगीत ध्वनि गूँजी और एक झूला धीरे-धीरे ऊपर से नीचे आया। झूले से फिल्म जगत की मशहूर एक्ट्रेस श्रीजया नीचे आई। तालियों के शोर से वातावरण गुंजायमान हो उठा। निर्णायक सहित वहाँ उपस्थित तमाम दर्शक खड़े हो गए। कार्यक्रम संचालक ने सबको बैठने का अनुरोध करते हुए कहा, "फ़िल्मी दुनिया की मशहूर हस्ती श्रीजया जी हमारे बीच है। आप बताएँगी इस शो के विनर का नाम।"

इशिता के दिल की धड़कन तेज़ हो गई। उसने अपनी आँखें बंद कर लीं, "हे ईश्वर, इस किनारे पर लाकर नइया न डुबो देना। कितने सारे सब्ज़बाग़ दिखाए गए थे- पिक्चर में काम करने का मौक़ा, दस लाख नक़द एक कार। एंकर बार-बार इन वादों को दुहराता जाता। बस, एक सेकेण्ड में क़िस्मत का ताला खुल और बंद हो सकता था। सरगम उस समय अन्य प्रतिभागी बच्चों के साथ निश्चिंत भाव से बैठी हुई थी।

एक... दो... तीन और सरगम के नाम की घोषणा हो गई। इशिता भावुकता में रो पड़ी। दौड़कर मंच पर आई और श्रीजया के चरणों को छू लिया। एंकर ने सरगम को गोद में उठाया और स्टेज के बीचों-बीच ले आया। मुख्य अतिथि श्रीजया ने उसे विजय का ताज पहनाया। कार की चाबी तथा पाँच लाख के चेक की डमी दी गई। इशिता की ख़ुशी का पारावार न था। कुछ देर हंगामा बरपा और फिर सब यथास्थान बैठ गए। सरगम इशिता के साथ अभी स्टेज पर खड़ी थी। एक जज ने पूछा, "सरगम, आज आप इस शो की विनर हो कैसा लग रहा है?" वह चुपचाप खड़ी रही तो इशिता ने कहा, "बताओ बेटा, कहो, अच्छा लग रहा है।"

सुनकर वह बोली, "अच्छा"।

"ये बताओं इतने सारे रुपये लेकर आप अपने घर जाओगी। इन रुपयों से आप क्या ख़रीदोगी, आप क्या-क्या चाहती हो?” उसकी ओर अगला प्रश्न उछाला गया।

इशिता ने कहना चाहा, "जी सरू की इच्छा है कि जीत के इन रुपयों से वह एक डांस स्कूल खोलेगी, जिसमें ग़रीब बच्चों को नृत्य सिखाया जाएगा। जिससे कि उनके टेलेण्ट को निखरने का मौका मिलेगा...।"

परन्तु श्री जया ने उसके बोलने से पहले ही कह दिया, "बच्ची को बोलने दीजिए। यह बहुत प्रतिभाशाली है।" 

संचालक ने सरगम के आगे माइक करते हुए कहा, "बताओ सरगम, श्रीजया आण्टी ने आपसे जो पूछा है।" 

उसने मासूमियत से उत्तर दिया, "जी अपनी गुड़िया के लिए कपड़े।" 

टेलीविजन के सामने बैठे हुए नमन के चेहरे पर संतोष के भाव उभर आए।

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