सूरज मुझको लगता प्यारा
लेकर आता है उजियारा।
सूरज से भी लगते प्यारे
टिम-टिम करते नन्हें तारे।

तारों से भी प्यारा अम्बर
बाँटे खुशियाँ झोली भर-भर।
चन्दा अम्बर से भी प्यारा
गोरा चिट्टा और दुलारा।

चन्दा से भी प्यारी धरती
जिस पर नदियाँ कल-कल करती।
पेड़ों की हरियाली ओढ़े 
हम सबके है मन को हरती।

हँसी दूध –सी जोश नदी –सा
भोले मुखड़े मन के सच्चे।
धरती से प्यारे भी लगते
खिल-खिल करते नन्हें बच्चे।

इन बच्चों में राम बसे हैं
ये ही अपने किशन कन्हाई।
इन बच्चों में काबा-काशी
और नहीं है तीरथ है भाई।
 

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