सांध्य सुषमा

15-08-2020

सांध्य सुषमा

सौरभ मिश्रा

कह क्षितिज को विदा सूर्य ढलने चला
साँझ   चूनर   लिए  अब  लहरा   रही
बादलों  पे  सुनहरी  परत   चढ़    गई
डालियाँ  वृक्ष  की  मौन  होकर  खड़ीं


दूर   बोले   पपीहा   विरह   में   कहीं
गिर  गई इक धरा पे कली बिन खिले
अब  तुम  ही  कहो  प्यार   कैसे  बढ़े
हो गई  तुम  जुदा  बिन  मुझसे  मिले


मध्य की आज  बेला  है  सुंदर  सजी
गूँथकर  कुछ  सितारे  चली  रात्री  है
चांद  झांके  अभी  पूर्व  की  ओर  से
कैसी सुंदर  बनी  और  ठनी  रात्री  है

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