राष्ट्रभाषा पर बहस चले!

15-09-2020

राष्ट्रभाषा पर बहस चले!

बरुण कुमार सिंह

हिन्दी दिवस (14 सितम्बर 2020) पर विशेष


नमस्कार! प्रणाम! हम भूल चले,
हैलो! हाय! बाय! हम बोल चले।
चरण स्पर्श! भूल चले,
आलिंगन को हाथ बढ़े।
 
संस्कृति को भूल चूके,
विकृति को बढ़ चले।
पौराणिकता को भूल चले,
आधुनिकता को हाथ बढ़े।
 
अपव्यय पर हाथ रुके, 
मितव्यय पर हाथ बढ़े।
कृत्रिमता को भूल चले,
अकृत्रिमता को बढ़ चले।
 
सुप्रीमकोर्ट में बहस बेमानी है,
न्याय की चौखट पर,
राष्ट्रभाषा हारी है,
मंज़िल अभी बाक़ी है।
 
सितम्बर में हिन्दी दिवस मने,
हिन्दी पखवाड़ा विसर्जन बने।
राष्ट्रभाषा पर बहस चले, 
हिन्दी पर राजनीति जारी है।

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