यूँ ख़बर हवा में तो पिछले पंद्रह दिनों से थी लेकिन मंत्री जी इसे पत्रकारों और न्यूज़ चैनलों द्वारा उड़ायी हुई ख़बर मान रहे थे। अभी तीन दिन पहले उनकी मुख्यमंत्री से मुलाक़ात हुई तो सब कुछ सामान्य था। हाँ, यह ज़रूर तय था कि आज मंत्रीमंडल में कुछ बदलाव होंगे। वे नियत वक़्त पर राजभवन पहुँचे तो उन्हें तब पता चला कि उन्हें इस्तीफ़ा देना है। इस्तीफ़े का प्रारूप तैयार था और उसमें उन्हें सिर्फ़ हस्ताक्षर करने थे। उन्होंने हस्ताक्षर तो कर दिए लेकिन उन्हें अभी भी यह नहीं बताया गया कि उनका मंत्रालय किसे दिया जा रहा है? ख़ैर, जब शपथ ग्रहण समारोह शुरू हुआ तो उनकी जगह जिस विधायक को शपथ दिलायी गई, वह तो हमेशा से उनका समर्थक गिना जाता था। यह वही विधायक था जो नियमित रूप से उनसे मुख्यमंत्री की कार्यशैली की आलोचना करता था। उन्हें यह देख ताज्जुब हुआ कि मंत्री पद की शपथ लेने के तुरंत बाद उनके उस समर्थक विधायक ने मुख्यमंत्री के पाँव छुए, उस मुख्यमंत्री के, जिन पर वह हमेशा से आपसी बातचीत में तानाशाही का आरोप लगाता रहा।

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