फगुवाया  मौसम गली गली

01-04-2021

फगुवाया  मौसम गली गली

डॉ. शोभा श्रीवास्तव

फगुवाया  मौसम गली गली 
झूमे बासंती पुरवाई।
अबके होली में ख़ुशियाँ भरी 
रंगों की गंगा लहराई॥

टेसू फूले, कचनार खिले 
मदमाने लगी है अमराई,
कोयल ने छेड़े गीत मधुर
भँवरों की  गूँजी शहनाई 
अंबर सिंदूरी रंग,  रँगा
धरती मुस्काई धानी में
वन-उपवन बासंती रंगत
हलचल नदिया के पानी में
चहुँ ओर सुहाना मौसम है
हर छटा निराली मन भाई

फगुवाया  मौसम गली गली . . .

मनभावन के घर आवन की 
पाती जीवन रस घोल गई
ख़त में टिपकारी रंगों की
सब भेद हृदय के खोल गई 
प्रियतम की पिचकारी से जब 
छलकेगा रंग, तरंग भरा
भीगी चोली, भीगा आँचल 
गाएँगे गीत उमंग भरा
हुए गाल गुलाबी लजवंती
घूँघट में गोरी शरमाई

फगुवाया  मौसम गली गली . . .

मत समझो यह बस खेला है 
होली ख़ुशियों का मेला है 
रँग लो जीवन का सूनापन 
छोड़ो आती-जाती उलझन
रंग देखो किसने फेंका है
रंग ही तो मन का एका है
तो आओ हम मनुहार लिए 
झूमें रंगीन बहार लिए
जीवन में सबके जाए बिखर 
फिर वही ख़ुशियों की तरुणाई
फगुवाया मौसम गली गली
झूमे बासंती पुरवाई।

0 टिप्पणियाँ

कृपया टिप्पणी दें

लेखक की अन्य कृतियाँ

गीत-नवगीत
कविता
सामाजिक आलेख
रचना समीक्षा
साहित्यिक आलेख
कविता-मुक्तक
बाल साहित्य कविता
ग़ज़ल
विडियो
ऑडियो

विशेषांक में