टूट गया जब डाल से पत्ता
उड़कर जा पहुँचा कलकत्ता
भीड़ देखकर वह घबराया
धूल –धुएँ से सिर चकराया.
शोर सुना तो फट गए कान
वापस फिर बगिया में आया॥

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