ऑस्कर वाईल्ड कृत महान औपन्यासिक कृति : पिक्चर ऑफ़ डोरिएन ग्रे

23-02-2019

ऑस्कर वाईल्ड कृत महान औपन्यासिक कृति : पिक्चर ऑफ़ डोरिएन ग्रे

डॉ. एम. वेंकटेश्वर

उपन्यास, आधुनिक साहित्य की सबसे लोकप्रिय और सार्थक विधा मानी गई है। मानव जीवन में उत्पन्न सूक्ष्म से सूक्ष्म कंपन्न को भी अंकित कर सकने की क्षमता केवल उपन्यास में ही संभव है। उपन्यास साहित्य युगीन यथार्थ, युगबोध और परिवेशजनित मानव व्यवहार का जीवंत दस्तावेज़ होता है। अंग्रेज़ी साहित्य में ऐसे कई उपन्यासकार पैदा हुए जिन्होंने अपने जीवन काल में केवल एक उपन्यास की रचना की और उनकी वह एक मात्र रचना कालजयी बनकर साहित्येतिहास में अमर हो गई। 

ऑस्कर वाइल्ड (1854-1900) आइरिश मूल के अंग्रेज़ी लेखक हैं जिनका जन्म 16 अक्तूबर 1854 को डबलिन (आयरलैंड) में हुआ। कविता, कहानी, निबंध, आलोचना और पत्रकारिता क्षेत्रों में ऑस्कर वाइल्ड ने इंग्लैंड और फ्रांस में ख्याति अर्जित की। इनके द्वारा रचित एक मात्र उपन्यास "द पिक्चर डोरियन ग्रे" है जो अंग्रेज़ी कथा साहित्य में विलक्षण दार्शनिक उपन्यास के रूप में सुविख्यात है। "द पिक्चर ऑफ़ डोरियन ग्रे" उपन्यास एक नए ढंग का विचित्र उपन्यास है जिसने विश्वकथा साहित्य में अपने कथ्य के कारण हलचल मचा दी। यह उपन्यास प्रथम बार सन् 1890 में "लिपिनकॉट्स मैगज़ीन" नामक एक मासिक पत्रिका में जुलाई के संस्करण में प्रकाशित हुआ। इस पत्रिका के संपादक ने उपन्यास के अभद्र होने के अनुमान से, ऑस्कर वाइल्ड को बिना बताए इसके कुछ अंश काट दिए। इस काट-छाँट के बाद भी अंग्रेज़ी साहित्य के समीक्षकों और नैतिकतावादी सामाजिक वर्ग की भावनाओं को उपन्यास ने ठेस पहुँचाई, जिससे इंग्लैंड के समाज का एक बड़ा वर्ग ऑस्कर वाइल्ड को सामाजिक अभियान एवं नैतिक मूल्यों की अवमानना के आरोप में दंडित करने के लिए अभियान छेड़ दिया। प्रत्युत्तर में ऑस्कर वाइल्ड ने अपने औपन्यासिक कथ्य को उचित ठहराते हुए कुछ विवादास्पद प्रसंगों को संशोधित कर उपन्यास को अधिक विस्तार के साथ प्रकाशित किया। इस तरह "द पिक्चर ऑफ़ डोरियन ग्रे" का संशोधित और दीर्घ संस्करण, लेखकीय भूमिका के साथ सन् 1891 में प्रकाशित हुआ। ऑस्कर वाइल्ड ने अपनी भूमिका में लेखकीय अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता एवं अधिकारों को पुष्ट करते हुए "द पिक्चर ऑफ़ डोरियन ग्रे’ उपन्यास के कथ्य को नैतिक मूल्यों के संदर्भ में उचित ठहराया। 

प्रस्तुत उपन्यास को उन्नीसवीं शताब्दी की गॉथिक शैली में रचित महत्वपूर्ण उपन्यास माना जाता है। 

"द पिक्चर ऑफ़ डोरियन ग्रे" एक विचित्र और अविश्वासनीय कथानक पर आधारित उपन्यास है जिसने विश्व के बुद्धिजीवी वर्ग को सबसे अधिक प्रभावित किया। उन्नीसवीं सदी का उच्चवर्गीय अंग्रेज़ी समाज और उनका अनियंत्रित विलासी समाज जो देहवादी जीवन दर्शन का प्रचार कर रहा था, ऐसे समाज में बढ़ते अतिचार का चित्रण करने के लिए ही ऑस्कर वाइल्ड ने "डोरियन ग्रे’ के पात्र को गढ़ा है। डोरियन ग्रे एक विचित्र मानसिकता का पात्र है जो समूचे विश्व कथा-साहित्य में अनूठा है, जिसके चरित्र की तुलना अन्य किसी औपन्यासिक पात्र से नहीं की जा सकती। उपन्यास का नायक "डोरियन ग्रे’ आत्मकेंद्रित, अहंवादी, सौंदर्योपासक, देहवादी तथा क्षणवादी जीवन दर्शन का समर्थक है। वह अपना उच्छृंखल जीवन गोपनीय ढंग से जीता है। "द पिक्चर ऑफ़ डोरियन ग्रे" अस्तित्ववादी दर्शन पर आधारित उपन्यास है जो विक्टोरियन युग के अंग्रेज़ी समाज के संभ्रांत वर्ग के ह्रासोन्मुख जीवन मूल्यों को प्रदर्शित करता है। उपन्यास का कथानायक डोरियन ग्रे एक आत्ममुग्ध (नारसिस्ट) पात्र है। उपन्यास की कथावस्तु नायक की इसी मनोवैज्ञानिक दुर्बलता एवं चारित्रिक ह्रास को चित्रित करती है। ऑस्कर वाइल्ड ने डोरियन ग्रे के माध्यम से शरीर और आत्मा के अंतरसंबंधों को व्याख्यायित करने का प्रयास किया है। कोई व्यक्ति अपनी आत्मा को तस्वीर में क़ैद कर कैसे अपना जीवन केवल शारीरिक धरातल पर जी सकता है? यही प्रश्न इस उपन्यास का प्रतिपाद्य है। लेखक ने नायक की ऐसी जटिल मनोवैज्ञानिक दुर्बलता का वर्णन किया है जो आत्म-विध्वंसक है, किन्तु यही मानव जीवन की वास्तविकता है। 

उपन्यास का प्रारम्भ विक्टोरियन युगीन इंग्लैंड के एक सुहावने ग्रीष्मकालीन दिवस के वर्णन से होता है। लॉर्ड हेनरी वॉटन अपने एक घनिष्ठ चित्रकार मित्र बेसिल हालवर्ड को डोरियन ग्रे नामक एक रूपवान नवयुवक की तस्वीर बनाते हुए निहारता रहता है। बेसिल हालवर्ड एक संवेदनशील चित्रकार है जिसे डोरियन ग्रे का रूप और उसका देह सौष्ठव उसकी चित्रकला के लिए प्रेरक शक्ति बनकर उसे आकर्षित करता था। डोरियन ग्रे अपना चित्र बनवाने के लिए चित्रकार बेसिल हालवर्ड के सम्मुख खड़े-खड़े, लॉर्ड हेनरी वॉटन और बेसिल वॉटन के वार्तालाप को सुनता रहता है। लॉर्ड हेनरी नवयुवकों को आनंदपूर्ण जीवन जीने की कला समझाने के प्रयास में तल्लीन रहते हैं। लॉर्ड हेनरी के अनुसार जीवन का सौन्दर्य उसके सुखों को भोगने में ही है। डोरियन ग्रे, लॉर्ड हेनरी के विचारों से प्रभावित हो जाता है। धीरे-धीरे उसकी मैत्री लॉर्ड हेनरी से प्रगाढ़ होने लगती है। लॉर्ड हेनरी डोरियन को अभिजात समाज के अपने ऐयाश महिला मित्रों से परिचय कराता है। चूँकि डोरियन ग्रे इंग्लैंड के धनाढ्य वर्ग का आकर्षक नवयुवक था, वह बहुत जल्द लॉर्ड हेनरी की कुसंगत में पड़ जाता है। उसमें जीवन की सारी वासनाओं और सुखों को भोगने की अदम्य लालसा जाग उठती है।

बेसिल हालवर्ड द्वारा उसकी तस्वीर इतनी मनोहर और आकर्षक बन पड़ती है कि डोरियन स्वयं अपनी उस तस्वीर पर मुग्ध हो जाता है। वह सोचता है कि समय के साथ उसका रूप और यौवन ढाल जाएगा, उसके व्यक्तित्व में बदलाव आ जाएगा, और वह एक दिन बूढ़ा होकर कुरूप हो जाएगा। बढ़ती उम्र के साथ उसका रूप सौन्दर्य नष्ट हो जाएगा, किन्तु यह तस्वीर हमेशा वैसी ही सुंदर और आकर्षक बनी रहेगी। अकस्मात उसके मन में एक विचित्र इच्छा जागती है। वह कामना करता है कि वह सदैव उसी युवा रूप में ही बना रहे और उसके बदले उसकी तस्वीर उसकी आयु की क्षीणता को धारण करती रहे और तदनुरूप तस्वीर में बदलाव आए। संयोग से उसकी यह विचित्र कामना पूरी हो जाती है। ऑस्कर वाइल्ड की काल्पनिक सृजनशीलता का यह अनूठा प्रयोग है जिसने उपन्यास जगत में नया इतिहास रच दिया। बेसिल हालवर्ड द्वारा निर्मित अपने इस आकर्षक और सम्मोहक चित्र को डोरियन ग्रे अपने आवास के मुख्य कक्ष में सजाकर रख देता है। इसके बाद डोरियन, लॉर्ड हेनरी वॉटन से प्रेरित होकर, विलासितापूर्ण जीवन में डूब जाता है। वह अपनी कामुकता और वासनाओं की पूर्ति को ही अपने चिरयौवन का लक्ष्य बना लेता है। उसकी दैहिक व्याकुलता को लॉर्ड हेनरी अधिक से अधिक उत्तेजित करते हैं। लॉर्ड हेनरी धनी विलासी स्त्रियों से डोरियन की मैत्री कराते हैं, जिससे डोरियन अपनी कामुक प्रवृत्ति को संतुष्ट करता जाता है। सुंदर महिलाएँ, डोरियन के यौवन और ऐश्वर्य की ओर आकर्षित होती हैं और उसे मनचाहा सुख उपलब्ध कराती हैं। 

इसी क्रम में डोरियन को मज़दूरों और निम्नवर्ग के लोगों के एक मनोरंजन स्थल, एक छोटे से नाटक थियेटर में शेक्सपियर के नाटकों की अभिनेत्री सिबिल वेन, दिखाई देती है। डोरियन, उस रात थियेटर में मंचित रोमियो जूलियट नाटक में सिबिल को जूलियट के पात्र में देखकर उस पर मोहित हो जाता है और उससे प्रेम करने लग जाता है। सिबिल भी डोरियन के आकर्षक व्यक्तित्व के मोहपाश में पड़कर उसके प्रेम में आकंठ डूब जाती है। वह डोरियन को प्यार से "प्रिंस चार्मिंग" के नाम से संबोधित करती है। डोरियन सचमुच उसके लिए मोहक राजकुमार था। सिबिल वेन का एक भाई है जो अपनी बहन से बेहद प्रेम करता है। वह बहन के सुखी जीवन के लिए चिंतित रहता है। इसलिए वह सिबिल को प्रिंस चार्मिंग से सतर्क रहने की सलाह देता है। वह सिबिल को आगाह करता है कि यदि प्रिंस चार्मिंग उसकी बहन के जीवन से खिलवाड़ करेगा तो वह उसे मार डालेगा। उपन्यास का यह प्रसंग, पात्रों के भविष्य की ओर संकेत करता है। 

डोरियन अपनी प्रेमिका से लॉर्ड हेनरी और बेसिल हालवर्ड का परिचय कराने के लिए उसी थियेटर में रोमियो-जूलियट नाटक देखने के लिए आमंत्रित करता है। लेकिन उस रात सिबिल, जूलियट की भूमिका में अनाकर्षक दिखाई देती है जिससे डोरियन क्रोधित हो जाता है। सिबिल डोरियन के प्रेम में इतनी डूब जाती है कि अभिनय में उसका मन नहीं लगता इसीलिए उसके अभिनय में पहले जैसा आकर्षण नहीं था। वह डोरियन के प्रेम के लिए थियेटर छोड़ देने का निर्णय लेती है किन्तु उस रात सब कुछ बिखर जाता है। डोरियन की नाराज़गी एक पल में उसके प्यार को तहस-नहस कर देती है। सिबिल वेन को डोरियन की क्षणवादी मानसिकता समझा में नहीं आती। डोरियन उसी क्षण सिबिल को ठुकराकर चला जाता है। डोरियन ग्रे में प्रेम की गहन संवेदना का अभाव था जिसे सिबिल अनुभव करती है। अन्यमनस्क स्थिति में वह अपने आवास लौटता है। उसे अपनी प्रिय तस्वीर में कुछ बदलाव दीखता है, उसके चेहरे पर क्रूरता और हिंसा के चिह्न उभर आते हैं। तस्वीर मानो सिबिल के साथ किए गए विश्वासघात और दुर्व्यवहार की छवि को व्यक्त कर रही थी। उसे आभास होने लगता है कि तस्वीर के लिए उसने जो कामना की थी वह सच हो रही है।

अकेलेपन और मानसिक द्वंद्व से त्रस्त डोरियन को सिबिल के प्रति सहानुभूति जागती है। वह अपने दुर्व्यवहार के लिए सिबिल के सम्मुख पश्चाताप व्यक्त करने का निश्चय करता है, किन्तु तभी लॉर्ड हेनरी उसे ख़बर करते हैं कि सिबिल ने ज़हर पीकर आत्महत्या कर ली। उस क्षण डोरियन को अपनी नियति और जीवन की निर्दिष्ट दिशा का बोध होने लगता है। वह उस वेदनाजन्य यथार्थ से मुक्त होकर दैहिक सुखों को ही लक्ष्य बनाकर शेष जीवन गुज़ारने की चेष्टा में लग जाता है।

इसके बाद के अठारह वर्ष डोरियन, अपने परम हितैषी, पतनोन्मुख मित्र लॉर्ड हेनरी वॉटन की कुसंगति में भौतिक जगत में उपलब्ध सारे सुखों को भोगता है, उसे परम आनंद की अनुभूति होती है। लॉर्ड हेनरी उसे अश्लील फ्रांसीसी साहित्य से परिचित कराते हैं जिससे वह और अधिक उत्तेजित होकर अपनी कामुकता को संतुष्ट करने के लिए नए उपाय सोचता है। इधर उसकी तस्वीर में उसके दुष्कर्मों की छवि प्रतिबिंबित होती जाती है। उसका चेहरा धीरे-धीरे कुरूप और विकृत होता जाता है। जब वह अपनी तस्वीर में नित नई विकृति को देखता है तो वह भयभीत होने लगता है। दूसरी ओर उसके अपने व्यक्तित्व में बीते हुए अठारह वर्षों में कोई बदलाव नहीं आया था, वह पूर्ववत आकर्षक और चिर-युवा ही बना हुआ था। उसके स्थान पर उसकी तस्वीर में अठारह वर्षों का रीतापन स्पष्ट झलकने लगता है। उसके वासनामय कृत्यों से उसकी आत्मा जिस तरह कुत्सित होती जाती है, उस ह्रास के चिह्न उस तस्वीर में स्पष्ट दिखाई देने लगते हैं। डोरियन उस आदमक़द तस्वीर को अपने बैठक से निकालकर इमारत के ऊपरी खंड में स्थित सामान-घर में रखवा कर उस पर आवरण ओढ़ देता है और उस कमरे पर ताला जड़ देता है। वह अपने आवास के तमाम नौकरों को निकाल देता है जिससे कोई भी उसके रहस्य को न जान सके। 

इस अंतराल में डोरियन का संपर्क अपने चित्रकार मित्र बेसिल हालवर्ड से भी टूट जाता है। इस बीच बेसिल हालवर्ड लंदन से निकलकर पेरिस में बसाना चाहता है। वह पेरिस जाने से पहले एक बार अपने पुराने मित्र डोरियन से मिलना चाहता है। वह पेरिस के लिए रवाना होते हुए रास्ते में डोरियन के आवास पर पहुँचता है। बेसिल, डोरियन के चरित्र के बारे में शहर में जो अफ़वाहें फैल रहीं थीं उस संबंध में उससे पूछताछ करना चाहता है। डोरियन अपनी दुश्चरित्रता और व्यभिचारी व्यवहार के संबंध में बेसिल से किसी भी प्रकार की बात नहीं करना चाहता। बेसिल अपने मित्र को सुधर जाने की सलाह देता है। लेकिन डोरियन पर बेसिल की सलाह का कोई असर नहीं पड़ता। डोरियन, बेसिल के किसी सवाल का जवाब नहीं देता। बदले में खीझकर डोरियन उसे ऊपर के कमरे में बंद अपनी उस तस्वीर को दिखाने के लिए ले जाता है। वह बेसिल को आक्रोश और हिंसात्मक मुद्रा में अपनी उस विकृत, कुरूप चेहरे और शिथिल होती अपनी तस्वीर को दिखाता है जो उसकी आत्मा का प्रतिरूप बन चुका था। बेसिल हालवर्ड अपने ही द्वारा चित्रित एक ख़ूबसूरत तस्वीर की ऐसी दुर्गति देखकर हतप्रभ हो जाता है। वह तस्वीर में डोरियन के बदले हुए विकृत चेहरे को देखकर काँप उठता है। ठीक उसी समय, डोरियन अपनी नियति को कोसता हुआ क्रोध से थर-थर काँपते हुए, कमरे की मेज़ पर पड़े हुए एक धारदार छुरे से बेसिल की हत्या कर देता है। उपन्यास इस मोड़ पर एक क्राइम थ्रिलर का रूप ले लेता है। बेसिल के लहूलुहान लाश को ठिकाने लगाने के लिए वह अपने एक पुराने विश्वसनीय मित्र एलेन कैंपबेल को बुला भेजता है। एलेन कैंपबेल रसायन-शास्त्र का विशेषज्ञ था। वह एलेन कैंपबेल को अपने रसायन-शास्त्र के ज्ञान का उपयोग कर बेसिल हालवर्ड के लाश को नष्ट कर देने के लिए ब्लैकमेल करता है।

इस तरह डोरियन ग्रे एक के बाद एक दुष्कर्मों में लिप्त होता जाता है, जिसका असर उसकी तस्वीर पर पड़ता जाता है और तदनुरूप उसमें विकृतियाँ तेज़ी से उभरती जाती हैं। 

अपने कुकृत्यों से डोरियन, विक्षिप्त मानसिकता में अपराधबोध से ग्रस्त होकर नशा करने के लिए अफ़ीम और अन्य मादक द्रव्यों के लिए कुख्यात अड्डों में नशाखोरों के बीच पहुँचता है। संयोग से उस अफ़ीमखाने में वह अनजाने ही जेम्स वेन (सिबिल का भाई) से टकरा जाता है। डोरियन को वहाँ मौजूद लोगों में से कोई बूढ़ी औरत प्रिंस चार्मिंग नाम से बुलाती है तो जेम्स वेन के कान खड़े हो जाते हैं क्योंकि वह बरसों से अपनी बहन की आत्महत्या का बदला लेने के लिए डोरियन ग्रे को ढूँढ रहा था। जेम्स प्रिंस-चार्मिंग नाम सुनकर चौकन्ना होकर डोरियन को मारने के लिए उसका पीछा करता है। उन दोनों की मुठभेड़ होती है। उस मुठभेड़ में डोरियन चालाकी से जेम्स को अपनी मौजूदा युवावस्था का वास्ता देकर, अठारह वर्ष पूर्व की किसी सिबिल वेन को न पहचानने का दावा करके जेम्स के चंगुल से छुटकर भाग जाता है। लेकिन तभी फिर से नशे में धुत एक औरत जेम्स को इस रहस्य को खोल देती है कि डोरियन ग्रे का व्यक्तित्व एक छल और धोखा है, इतने बरसों बाद भी वह वैसा ही युवा है जैसा कि वह अठारह वर्ष पहले था। इस तरह वह सिद्ध कर देती है कि जिसे जेम्स ने छोड़ दिया वही वास्तव में प्रिंस-चार्मिंग उर्फ डोरियन ग्रे था। जेम्स वेन अपनी बहन की मृत्यु का बदला लेने के लिए फिर से डोरियन की तलाश में निकल पड़ता है। 

डोरियन अकस्मात एक रात जेम्स वेन को अपने आवास के निकट घूमता हुआ देखता है। डोरियन को अपने प्राणों का भय सताने लगता है। उसे विश्वास हो जाता है कि जेम्स वेन, सिबिल की मृत्यु का बदला लेने के लिए उसे मार डालेगा। वह निरंतर भयभीत अवस्था में ही दिन गुज़ारता रहता है। किन्तु डोरियन ग्रे के भाग्य में जेम्स के हाथों मृत्यु नहीं थी। विधि का निर्णय कुछ और ही था। ऑस्कर वाइल्ड का नियतिवादी दर्शन उपन्यास के पात्रों और घटनाओं पर स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। 

इन्हीं दिनों जेम्स वेन के साथ एक अनहोनी दुर्घटना घटती है। जेम्स वेन दुर्योग से एक शिकारी की बंदूक की गोली का निशाना बन जाता है जिससे घटनास्थल पर ही तत्काल उसकी मृत्यु हो जाती है। डोरियन को जब यह ख़बर मिलती है तो वह चैन की साँस लेता है और समझता है कि अब उसके दुखों का अंत हो गया। वह लंदन लौटकर लॉर्ड हेनरी से एक नए जीवन को प्रारम्भ करने का अपना निर्णय व्यक्त करता है। वह अपने कुकृत्यों का प्रायश्चित्त करने के लिए भोगवादी जीवन को अलविदा कहकर सज्जनता सहित साधारण जीवन जीने का संकल्प लेता है। जीवन के निर्णायक मोड़ पर डोरियन की भेंट एक सरल स्वभाव की ग्रामीण युवती, "हेट्टी मेर्टोन" से होता है जिसके प्रति डोरियन में प्रेम भाव जागता है। वह हेट्टी मेर्टोन से विवाह कर नए सिरे से जीवन को आरंभ करने का संकल्प करता है। वह सोचता है कि उसके इस प्रायश्चित्त से उसकी तस्वीर फिर से पूर्ववत सुंदर और युवा स्वरूप में परिवर्तित हो जाएगी। वह अपनी तस्वीर को अपनी पूर्ववत सुंदर अवस्था में देखने की आस सँजोये तस्वीर को देखने के लिए जाता है। वह कमरे में बंद अपनी तस्वीर पर से पर्दा उठाकर देखता है तो वह अचंभित रह जाता है। वह तस्वीर पहले से ज़्यादा खूंखार और भयावह हो गई थी। वह और अधिक आक्रामक, भयावह और विकृत चेहरे को प्रतिबिंबित कर रही थी। वह तस्वीर के उस घिनौने रूप को नहीं सह सकता, उसकी सहनशीलता समाप्त हो जाती है। उस क्षण उसके मन में इस यातना से हमेशा के लिए छुटकारा पाने की इच्छा कौंध जाती है। अनायास उसके हाथ में वही छुरी आ जाती है जिससे उसने अपने चित्रकार मित्र बेसिल हालवर्ड की हत्या की थी। उस क्षण उसमें छिपी क्रूरता भयानक रूप से हिंसक रूप धारण कर लेती है वह उसी छुरे से अपनी उस कुरूप और घृणित तस्वीर को घोंपकर नष्ट कर देता है। इसके साथ ही वह भी एक चीख के साथ वहीं ढेर हो जाता है।

आधी रात को इमारत की ऊपरी मंज़िल पर स्थित कमरे से चीख सुनकर आवास में मौजूद नौकर वहाँ पहुँचकर देखते हैं कि वहाँ एक अनजान बूढ़े की लाश पड़ी है जिसके सीने में छुरी घुसी हुई थी। उस लाश का चेहरा बहुत ही वीभत्स और कुरूप था। पहले तो वह लाश पहचान में नहीं आयी लेकिन घर के नौकर लाश की उँगली में पड़ी हुई अँगूठी देखकर उसे अपने मालिक डोरियन ग्रे के रूप में पहचान लेते हैं। उस लाश के किनारे युवा डोरियन ग्रे की सुंदर तस्वीर, अपने पूर्ववत आकर्षण के साथ मौजूद थी। 

इस उपन्यास में ऑस्कर वाइल्ड ने शरीर और आत्मा के गहरे संबंध को दार्शनिक ढंग से व्यक्त किया है। कोई भी व्यक्ति इस जीवन में आयु को अपने वश में नहीं कर सकता। शरीर नश्वर है और समय के साथ उसमें कालजनित परिवर्तन शाश्वत है, इस पर किसी का वश नहीं चलता। जो व्यक्ति अपनी आयु पर विजय प्राप्त कर सदा के लिए युवा बने रहने की कामना उसकी दुर्बलता होती है। इस दुर्बलता को मनोविज्ञान में "डोरियन ग्रे" सिंड्रोम कहा जाता है। इसे एक मनोरोग की संज्ञा दी गई है। 

ऑस्कर वाइल्ड को अपने इस उपन्यास से बेहद लगाव था क्योंकि यह विक्टोरियन युगीन अंग्रेज़ी समाज की नैतिकतावादी संस्कृति पर कुठाराघात करता है। इस उपन्यास के प्रकाशन से तत्कालीन अंग्रेज़ी समाज अपराध बोध से तिलमिला गया और अभिजात वर्ग ऑस्कर वाइल्ड के प्रति हिंसात्मक हो उठा। इस उपन्यास का केंद्रीय भाव सौंदर्योपासना है जिसे भोगने के लिए नायक का दोहरा जीवन विधान है। डोरियन ग्रे अपने व्यक्तित्व के दोहरेपन का ख़ूब लाभ उठाता है। व्यक्तिगत और सामाजिक दोनों धरातलों पर डोरियन सौंदर्योपासना को ही अपने देहवादी सुखों का आधार बनाता है। अपने शारीरिक सौन्दर्य के प्रति वह आत्ममुग्ध तो है ही, इसे ही वह स्त्रियों को अपनी ओर आकर्षित करने का औज़ार बनाता है। जीवनपर्यंत युवा बने रहने की उसकी अभिलाषा दैवीय संयोग से पूरी हो जाती है किन्तु इसके बदले बढ़ती उम्र के कारण उसके शारीरिक ह्रास की छवि उसकी तस्वीर में क्रमश: प्रतिबिंबित होती रहती है, जिसे वह बरदाश्त नहीं कर पाता और अंत में वह आत्महंता बन जाता है। इस बिन्दु पर उपन्यास में फेंटेसी का तत्व शामिल हो जाता है, जो यथार्थवादी उपन्यास में अविश्वसनीय और अकल्पनीय है। लेखक, डोरियन के सुखवाद के सिद्धान्त को उसके भोगवादी जीवन शैली के माध्यम से पुष्ट करता है।

ऑस्कर वाइल्ड की सन् 1890 में प्रकाशित उपन्यास "द पिक्चर ऑफ़ डोरियन ग्रे" की रोमांचक कथ्यात्मकता ने हॉलीवुड के फ़िल्मकारों का ध्यान स्वाभाविक रूप से आकर्षित किया। इसकी कथा में फ़िल्म के लिए आवश्यक तत्व मौजूद हैं जैसे नैतिक-अनैतिक का द्वंद्व, सौंदर्योपासना के तत्व, डोरियन का द्वन्द्वात्मक चरित्र और नायक की एकाधिक प्रेम कथाएँ आदि। सन् 1910 से ही इस उपन्यास के कई फ़िल्मी संस्करण प्रदर्शित हुए। हॉलीवुड के मूक फ़िल्म युग से लेकर आज तक इस उपन्यास के बीस से अधिक टीवी फिल्में अंग्रेज़ी, फ्रेंच और अन्य अन्य भाषाओं में निर्मित हुईं। सिनेमा के बड़े पर्दे के लिए इसी नाम से एवं इतर नामों से भी लगभग दस फ़िल्में, 1945 से 2014 के बीच हॉलीवुड द्वारा निर्मित की गईं। इनमें 1945 में निर्मित फ़िल्म की कथा विशेष रूप से उल्लेखनीय है जो आज तक सराही जाती है। यह फ़िल्म "द पिक्चर ऑफ़ डोरियन ग्रे" के नाम से थोड़े से फेर बादल के साथ प्रस्तुत की गई। 

सन् 1945 में अल्बर्ट लेविन के निर्देशन में पेड्रो एस बेरमान ने द पिक्चर ऑफ़ डोरियन ग्रे फ़िल्म का निर्माण किया जो मूलत: ऑस्कर वाइल्ड के उपन्यास पर आधारित फ़िल्म थी। इस फ़िल्म में डोरियन ग्रे की भूमिका हर्ड हैटफ़ील्ड, लॉर्ड हेनरी वॉटन की भूमिका जॉर्ज सैंडर्स, चित्रकार बेसिल हालवर्ड की भूमिका लोवेल गिलमर, सिबिल वेन की भूमिका एंजिला लेंसबरी और जेम्स वेन की भूमिका को रिचर्ड फ्रेज़र ने कुशलता से निभाया। इनके अतिरिक्त उपन्यास के अन्य पात्रों के लिए भी हॉलीवुड के मशहूर कलाकारों ने अपने अभिनय कौशल द्वारा इस फ़िल्म को चिरविस्मरणीय बनाया। यह फ़िल्म श्वेत-श्याम रूप में बनी थी इसलिए इसमें पात्रों की रूप सज्जा और परिवेशगत दृश्यों में काफ़ी स्वाभाविकता है। अभिनेता हैटफ़ील्ड का नायक डोरियन ग्रे की भूमिका में अभिनय बेजोड़ है जिसे आज भी याद किया जाता है। हैटफ़ील्ड स्वयं बहुत ख़ूबसूरत अभिनेता था, जिसके व्यक्तित्व में सम्मोहक आकर्षण विद्यमान था इसीलिए वह डोरियन ग्रे के पत्र के लिए बहुत ही सटीक सिद्ध हुआ। द्वन्द्वात्मक व्यक्तित्व के बाह्य सौन्दर्य के साथ उसकी आंतरिक क्रूरता एवं विद्रूपता का प्रदर्शन करने में हैटफ़ील्ड ने अद्भुत अभिनय कौशल का परिचय दिया। उसके चेहरे का भोलापन और उसके आचरण की अभिजात शालीनता जिस तरह युवाओं को अपनी ओर आकर्षित कर आत्मसमर्पण कराती है, वह डोरियन ग्रे को जीवंत कर देती है। इस फ़िल्म की पटकथा में थोड़े से बदलाव किए गए हैं, जैसे कि फ़िल्म में सिबिल वेन शेक्सपियर के नाटकों की नायिका न होकर एक रेस्टरों की गायिका है। फ़िल्म में सिबिल, डोरियन को "सर ट्रिस्टन" नाम देती है जब कि उपन्यास में वह उसके लिए प्रिंस-चार्मिंग है। फ़िल्म में डोरियन ख़ुद अपने आवास में जेम्स वेन की भी हत्या कर देता है और दुबारा एलेन कैंपबेल को जेम्स के शव को भी बेसिल के शव की तरह ही नष्ट करने के लिए बाध्य करता है। अंत में एलेन कैंपबेल भी आत्महत्या कर लेता है। लॉर्ड हेनरी वॉटन के सिवाय, डोरियन के संसर्ग में आने वाला हर पात्र, किसी न किसी दुर्घटना या त्रासदी का शिकार हो जाता है, यही डोरियन के चरित्र की विडंबना है। उपन्यास में डोरियन की अंतिम प्रेमिका "हेट्टी मेर्टोन" एक ग्रामीण युवती है किन्तु फ़िल्म में वह पात्र "ग्लेडिस" बेसिल हालवर्ड की भतीजी है, जो बचपन से डोरियन से मन ही मन प्रेम करती है। वह डोरियन को पति के रूप में हासिल करना चाहती है। अंत में डोरयन उससे विवाह के लिए तैयार हो जाता है। उपन्यास में ग्लेडिस नामक एक स्त्री मौजूद है किन्तु वह एक अन्य भूमिका में दिखाई देती है। उपन्यास में अंत में डोरियन के क्षत-विक्षत शव को उनके नौकर देखकर पहचानते हैं, जब कि फ़िल्म में डोरियन के साथ विवाह की प्रतीक्षा में उस के साथ रहने वाली ग्लेडिस और लॉर्ड हेनरी वॉटन, डोरियन के विकृत शव को देखते हैं। 

यह फ़िल्म सन् 1946 के ऑस्कर पुरस्कारों के लिए नामित हुई थी। इसे सर्वश्रेष्ठ सिनेमाटोग्राफी के लिए ऑस्कर पुरस्कार प्राप्त हुआ। सर्वश्रेष्ठ सहनायिका और सर्वश्रेष्ठ नाटकीय प्रस्तुति के लिए इसे गोल्डन ग्लोब पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इस फ़िल्म ने हॉलीवुड सिनेमा के इतिहास में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया। 

इसी क्रम में सन् 2009 में निर्मित डोरियन ग्रे नामक फ़िल्म उल्लेखनीय है। नई तकनीक और आकर्षक रूप सज्जा के साथ संगीन प्रारूप में डोरियन के पात्र को अधिक रोमांचक और रहस्यमय बनाकर उसे एक फेंटेसी में परिवर्तित कर एक हॉरर फ़िल्म के रूप में प्रस्तुत किया गया। इस रंगीन हॉरर फ़िल्म "डोरियन ग्रे’ का निर्देशन ओलिवर पार्कर ने निर्माता बार्नबी थोंपसन के लिए किया। इसमें बेन बार्न्स ने डोरियन ग्रे पात्र को अलग अंदाज़ में आकर्षक और प्रभावशाली बनाया। कॉलिन फर्थ, रेबेका हॉल, बेन चैपलिन, एमिलिया फॉक्स, रेचल हर्डवुड आदि इसके अन्य कलाकार हैं जो साज के हॉलीवुड सिनेमा के प्रमुख अभिनेता हैं। इस फ़िल्म की कहानी को पूरी तरह से बदलकर क्राइम थ्रिलर और हॉरर फ़िल्म बनाया गया। इस फ़िल्म ने बॉक्स ऑफ़िस में ख़ूब पैसा बटोरा। कुछ साहित्यिक कृतियाँ फ़िल्म को लोकप्रियता प्रदान करती हैं तो कुछ फ़ल्में साहित्य को पहचान दिलाती हैं। ऑस्कर वाइल्ड कृत द पिक्चर ऑफ़ डोरियन ग्रे उपन्यास ने फ़िल्मों को लोकप्रियता प्रदान की, यह इसकी अतिरिक्त विशेषता है। 

"द पिक्चर ऑफ़ डोरियन ग्रे" जैसे अनूठे उपन्यास सदियों में एक बार रचे जाते हैं। इस उपन्यास में लेखकीय कौशल के साथ समसामयिक सामाजिक स्थितियों एवं नैतिकतावादी समाज की खोखली मान्यताओं पर लेखक ने जिस व्यंग्यपूर्ण शैली में प्रहार किया है वह महत्वपूर्ण है। निश्चित रूप से ऑस्कर वाइल्ड कृत द पिक्चर ऑफ़ डोरियन ग्रे एक कालजयी उपन्यास है। 
 

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