निःसंदेह अजेय हो तुम

01-02-2021

निःसंदेह अजेय हो तुम

संजय कवि ’श्री श्री’

(पूज्य अग्रज डॉ. ए. के. श्रीवास्तव, निदेशक, भारती विद्यापीठ यूनिवर्सिटी को समर्पित)
 
निःसंदेह अजेय हो तुम।
दुर्भाग्य को
ललकार के,
उत्क्रांति को
आकार दे;
तुम्हारी ये विजय।
निःसंदेह अजेय हो तुम।
आभार
जन्मदाता को
जिन बदौलत तुम बड़े हुए,
उन उँगलियों को
जिन्हें थाम तुम खड़े हुए;
यहाँ तक लाने वाली
सीढ़ियाँ,
तुम्हारे लिए खप गईं
पीढ़ियाँ;
सभी धन्य हुईं।
निःसंदेह अजेय हो तुम।

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