न्यूटन जी! 

हरिहर झा

न्यूटन जी
बैठे 
फ़रमाते,  
काम के बराबर प्रतिरोध।

  

नियम तीसरा सच ही है तो 
परिश्रम भला क्यों करना 
पिछड़े रह कर भी जी लेंगे  
ऐयाशी कर के मरना

 

प्रगति में झंझट है ज़्यादा 
प्रतिक्रिया में सारा बोध।

 

भौतिकता बढ़ती पश्चिम में  
उत्पादन ज़्यादा करते
प्रतिरोध में शिशु आत्माओं  
से दुनिया को हम भरते


अरब खरब पहुँचे आबादी  
कहाँ भला इसमें गतिरोध। 

 

न्यूटन जी! 
हमारे क़ानून 
जब भी चाहा तोड़ दिया
हों लचीले, पकड़ कर  इन्हे,  
जब जी चाहा मोड़ दिया

 

अनुसंधान लाल फीते में,
भटक जाय राहों में शोध।

1 Comments

  • 5 May, 2019 12:08 AM

    वाह क्या बात कही है सर ।

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