20-02-2019

नरेन्द्र श्रीवास्तव -4

नरेंद्र श्रीवास्तव

हाइकु - 4

शिकारी हारा
जाल सहित पक्षी
नभ में उड़े।
*
दर्द के गीत
प्रीत लिखती रही
पत्थर देव।
*
मौन आकांक्षा
मन की बात जाने
कोई अपना।
*
शब्द व्यथित
अपरिचित जन
भाषा अंजान।
*
नदी से रेत
पर्वत से खनिज
लुटती धरा।

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