मोहताज़ साँसें 

01-12-2019

मोहताज़ साँसें 

हरिपाल सिंह रावत 'पथिक'

पल-पल की.. मोहताज़ साँसें,
धीरे-धीरे झुर्रियों से.. ढ़लता जिस्म,
हर रोज़... 
बेहिसाब सा... बढ़ता अहम, 
रिश्तों की कड़वाहट।
आख़िर किस लिये???
बस इसीलिये.... 
कि इक पल ‍आये मौत, 
लपेटे स्याह रात,
बोझिल दिन,
और छीन ले... 
सारा गुरुर,
सारा अंहकार, 
मोहताज़ साँसें और जिस्म।
सब कुछ। 

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