मेरी यादों में

अवनीश कुमार गुप्ता

मेरी यादों में एक गलियारा है
जिसमें तुम्हारी बेचैनी 
तुम्हें कुछ दूर तक भगाकर मेरे पास ले आती है
फिर तुम्हारी तहज़ीब तुम्हें रोककर
मेरे पास चुपचाप बिठा देती है


मेरी यादों में तुम्हारी शरारतें हैं
जिसमें तुमने अपनी बेलगाम हँसी से
मेरी मुस्कुराहटों को दबा रखा है


मेरी यादों में एक सेज है
जिस पर तुम किसी दुल्हन की तरह
इतनी ख़ामोश बैठी हो कि
तुम्हारी धड़कनों की आवाज़
उठती गिरती सुनाई दे रही है


मेरी यादों में जितनी जगह है
सब मैंने तुम्हारे लिये सबसे उधार ले ली है
जिसे चुका पाना अब मेरे बस में नहीं


पर कभी कभी कुछ बादल आकर
तुम्हारी इन तस्वीरों को धुँधलाकर
मुझे परेशान करते रहते हैं


इसलिये कभी कभी लगता है
काश ! तुम मेरी यादों में न रहो

मेरे सामने रहो
                       हमेशा ...

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