मैं वहीं ठहर गया हूँ

15-02-2017

मैं वहीं ठहर गया हूँ

महेश रौतेला

मैं वहीं ठहर गया हूँ
जहाँ तुम हो,
तुम्हारी जिज्ञासा है,
अद्भुत आत्मा है,
आँखों की आदतें हैं,
प्यार का मिजाज है।

मैं वहीं ठहर गया हूँ
जहाँ गणित के प्रश्न हैं,
भूगोल के नक्शे हैं,
इतिहास का रोना है,
कंठस्थ कविता है,
मौसम का आनन्द है,
वर्षों का लालित्य है,
पानी का आचमन है,
पगडण्डियों का भुलावा है,
सड़कों का सारांश है,
मन का मंतव्य है
मैं वहीं ठहर गया हूँ।

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