मछेरा ले के जाल आया है

07-09-2008

मछेरा ले के जाल आया है

सजीवन मयंक

मछेरा ले के जाल आया है।
समन्दर में उबाल आया है॥


मेरा दुश्मन मुझसे मिलने को।
बिना तलवार ढाल आया है॥


एक चिड़िया उदास बैठी है।
मुझे तेरा ख़्याल आया है॥


मैं जिसका जानता नहीं उत्तर।
वही फिर से सवाल आया है॥


काम पूरा कभी नहीं होगा।
जिसे तू कल पर टाल आया है॥

एक जुगनू ने बताया हमको।
सारी बस्ती उजाल आया है॥

ग़ज़ल खुद ही लिपटती है हमसे।
तभी तो ये कमाल आया है॥

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