माँ (कामिनी कामायनी)

15-10-2016

माँ (कामिनी कामायनी)

कामिनी कामायनी

"क्या हुआ ...लड़का या लड़की ..."

"लड़का... या ...लड़की .. .मुझे क्या पता"

"वाह...तुम्हें ही नहीं पता .. . फिर जन्म किसको दिया।"

"जन्म... . जन्म तो मैंने एक संतान को दिया... .दुनिया की निगाह में वह लड़का या लड़की हो सकता है। मेरे लिए तो मेरे कलेजे का टुकड़ा मात्र है...मेरा संतान . ..नौ महीने में एक बार भी नहीं सोचा कि क्या लिंग होगा .. .हाँ यह सोच सोच के रोमांचित ज़रूर होती रही कि "माँ" कहने वाला आ रहा है।"

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