लेकर निगाह-ए-नाज़ के ख़ंजर नए-नए

15-01-2021

लेकर निगाह-ए-नाज़ के ख़ंजर नए-नए

निज़ाम-फतेहपुरी

ग़ज़ल- 221 2121 1221 212
अरकान- मफ़ऊल फ़ाइलात मुफ़ाईल फ़ाइलुन
 
लेकर निगाह-ए-नाज़ के ख़ंजर नए-नए
मिलते हैं शहरे ग़ैर में दिलवर नए-नए
 
तहज़ीबे नौ का दौर है हर बात है नई
औरत भी अब बदल रही शौहर नए-नए
 
आएगी जैसे-जैसे क़यामत क़रीब जब
देखोगे और भी यहाँ मंज़र नए-नए
 
कुर्सी पे हमने जिनको बिठाया था शान से
ढाते हैं अब सितम वही हम पर नए-नए
 
जो रास्ता बता रहे खादी लिबास में
रहज़न से कम नहीं हैं ये रहबर नए-नए
 
मिलती है बेकसूर को अक़्सर सज़ा यहाँ
डरते नहीं गुनाह से अफ़सर नए-नए
 
हमदर्द बन के लोगों ने लूटा 'निज़ाम' को
मिलते रहे हमेशा सितमगर नए-नए

निज़ाम- फतेहपुरी

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