कुण्डलियाँ - अटल बिहारी बाजपेयी को सादर शब्दांजलि

01-01-2021

कुण्डलियाँ - अटल बिहारी बाजपेयी को सादर शब्दांजलि

डॉ. सुशील कुमार शर्मा

1.
भारत का सौभाग्य है,मिला रत्न अनमोल।
अटल अमित अविचल सदा, शब्द शलाका बोल।
शब्द शलाका बोल, जिया शुचिता मय जीवन
राजनीति के संत, देश को अर्पित तन मन।
करता नमन सुशील, राष्ट्र सिरमौर सदारत।
मेधा अमित अनंत, गर्व करता है भारत।
2.
अंतर व्यथा को चीरकर, कविता लिखी अनेक।
संघर्षों की राह में, संयम अटल विवेक।
संयम अटल विवेक, नीति की लाज बचाई।
कर जीवन आहूत, देश को दिशा दिखाई।
करता नमन सुशील, राष्ट्र बदला अभ्यांतर।
जन गण सभी समान, नहीं कोई भी अंतर।

0 टिप्पणियाँ

कृपया टिप्पणी दें

लेखक की अन्य कृतियाँ

गीत-नवगीत
सामाजिक आलेख
कविता
कविता-मुक्तक
लघुकथा
कविता - हाइकु
व्यक्ति चित्र
दोहे
साहित्यिक आलेख
सिनेमा और साहित्य
कहानी
बाल साहित्य कविता
किशोर साहित्य नाटक
किशोर साहित्य कविता
ग़ज़ल
ललित निबन्ध
विडियो
ऑडियो

विशेषांक में