कोशिश करते हैं इन्हें पढ़ने की

15-03-2021

कोशिश करते हैं इन्हें पढ़ने की

संजय कवि ’श्री श्री’

लटों से झाँकती
उम्मीदी आँखें,
निःशब्द आकृति
अनकही बातें।


कोशिश करते हैं
इन्हें पढ़ने की,
ख़यालों में
ख़्वाब गढ़ने की।

0 टिप्पणियाँ

कृपया टिप्पणी दें

लेखक की अन्य कृतियाँ

कविता
कविता - क्षणिका
नज़्म
खण्डकाव्य
विडियो
ऑडियो

विशेषांक में