खोजता हूँ 
आसमान में कहीं
सम्वेदनाओं के वो बादल
जो बरसें तो आ जाये
पतझड़ में सावन
छा जाए प्यार का मौसम
हमेशा-हमेशा के लिए
सम्वेदना से शून्य
इस भाव भूमि पर
उगने लगे
परम्परा, संस्कृति और संस्कार
की फ़सल


खोजता हूँ
किसी मरुस्थल में
अमृत जल का ऐसा झरना
जिसका जल कर दे
बेजान तन, मन को तृप्त
मौन की दीवारें गल जाएँ
और जंग लगे रिश्तों में
मुस्कराहट छाये
दिलों में महकने लगे
आशा की किरण


खोजता हूँ
धर्म सभाओं में
गुरुओं की ऐसी वाणी
जो दिशाहीन इस जीवन को
नव विहान दे
ऊँची हो गई स्वार्थ की दीवारों को
पिघला दे प्रेम की ऊष्मा देकर
पुलकित हो जाये जीवन!

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