झूट जब बोला तो ताली हो गई

27-01-2008

झूट जब बोला तो ताली हो गई

नीरज गोस्वामी

बात सचमुच में निराली हो गई
झूट जब बोला तो ताली हो गई

फेर ली जाती झुका कर थी कभी
उस शरम से आँख खाली हो गई

ये असर हम पे हुआ इस दौर का
भावना दिल की मवाली हो गई

मिल गई उनको इजाज़त ज़ुल्म की
अपनी तो फ़रियाद गाली हो गई

इक नदी बहती कभी थी जो यहाँ
बस गया इंसाँ तो नाली हो गई

डाल दीं भूखे को जिसमें रोटियाँ
वो समझ पूजा की थाली हो गई

हाथ में क़ातिल के नीरज फूल है
बात अब घबराने वाली हो गई

0 टिप्पणियाँ

कृपया टिप्पणी दें

लेखक की अन्य कृतियाँ

ग़ज़ल
विडियो
ऑडियो