इतवारी रिश्ते

15-03-2021

इतवारी रिश्ते

राजेश ’ललित’

रिश्ते कितने कठिन
बनाने भी
निभाने भी


पहले ख़ाली 
इतवार ढूँढ़ो 
फिर बहाना 
जाना; नहीं जाना


रिश्ता दूर का
पास का
बुलाना; नहीं बुलाना


अमीर या ग़रीब 
घर से
दिल से
दूर या क़रीब 


चलें या न चलें
चलो घर पर
मनाते हैं रिश्ते
संडे है न
रिश्ते फिर कभी

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