आई.सी.यू.

14-07-2016

यह एक पीड़ादायक इंतज़ार है
जब बहुत अर्सा बीत जाता है
आप ने खुला आकाश नहीं देखा होगा


थक जाते हैं फेफड़े
वेंटिलेटर से फूँकी हुई हवा लेते हुए
डॉक्टरों को देखते…
परिवार और दोस्तों को देखते…
परंतु मैं एक शब्द भी व्यक्त नहीं कर सकता!


मैं एक सवाल का जवाब तलाश रहा हूँ
जीवन की खिड़की के अंदर से
मैंने कमरे में देखा
सब ख़ाली था
पुराने दरवाज़े के अलावा
और चुपचाप लहराते कैलेंडर
सिर्फ प्रतिध्वनि
दिल की धड़कन की


एक आवाज़ -
जीवन के कठिन सवाल के
जवाब के रूप में भीतर से आयी
यह मौन है
जो समस्त को पीछे छोड़ देता है
यह एक अजीब सांत्वना है
परम सत्य है!
तो फिर क्यों मैं –
जीवन में वापस आने के लिए बेक़रार हूँ

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