08-01-2019

हम ले के अपना माल जो मेले में आ गए

हस्तीमल 'ह्स्ती'

हम ले के अपना माल जो मेले में आ गए
सारे दुकानदार दुकानें बठा गए

बस्ती के क़त्ले आम पे निकली न आह भी 
ख़ुद को लगी चोट तो दरिया बहा गए

दुनिया की शोहरतें हैं उन्हीं के नसीब में
अंदाज़ जिनको बात बनाने के आ गए

फ़नकार तो ज़माने मे गुमनाम ही रहे
ताजिर थे जो हुनर के ज़माने पे छा गए

दोनों ही एक जैसे हैं कुटिया हो या महल 
दीवारो दर के मानी समझ में जो आ गए

नज़रें हटा ली अपनी तो ये मोजजा हुआ
जल्वे सिमट के ख़ुद मेरी आँखों मे आ गए

पंडित उलझ के रह गए पोथी के जाल में
क्या चीज़ है ये ज़िंदगी बच्चे बता गए

0 Comments

Leave a Comment