हर किसी से न वास्ता रखना

15-10-2020

हर किसी से न वास्ता रखना

कु. सुरेश सांगवान 'सरू’

हर किसी से न वास्ता रखना
ख़ास लोगों को ही सखा रखना
 
काम के लोग सब नहीं होते 
क्यूँ सभी का अता पता रखना 
 
लौटने में न शाम हो जाए
दीप इस राह का जला रखना
 
जो अचानक कहीं भी उठ जाए 
साथ उस दर्द की दवा रखना 
 
नफ़रतें तुम कहीं गवाँ देना 
प्यार की दौलतें जमा रखना
 
गर ज़मीं का दयार छोटा है
सर पर इक आसमाँ खुला रखना 
 
जो हुनर जानते निभाने का 
दिल उन्हीं से सदा लगा रखना

0 टिप्पणियाँ

कृपया टिप्पणी दें

लेखक की अन्य कृतियाँ

ग़ज़ल
विडियो
ऑडियो

विशेषांक में